मंगलवार को खेला गया वर्ल्ड कप का पहला सेमीफाइनल मुकाबला उम्मीद से कहीं ज्यादा रोमांचक रहा। अंतिम गेंद तक सभी की सांसें अटकी पड़ी थी कि बाजी दक्षिण अफ्रीका के पक्ष में जाएगी या न्यूजीलैंड के। हालांकि अंत तक संघर्ष करने का जज्बा कीवी टीम में दिखा और एक गेंद शेष रहते अफ्रीकी टीम को हराते हुए फाइनल का टिकट कटा ही लिया। दोनों टीमें इतिहास रचने की दहलीज पर थीं लेकिन दक्षिण अफ्रीका को निराशा हाथ लगी और जीत के बेहद करीब आकर उन्हें हार के आंसू बहाने को मजबूर होना पड़ा।
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पहले सेमीफाइनल के बाद अब बारी दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले की है। इस मुकाबले में वर्ल्ड चैंपियन टीम इंडिया मेजबान ऑस्ट्रेलिया से दो-दो हाथ करेगी, जो भी टीम यहां पर जीतेगी उसे फाइनल का टिकट मिलेगा और 29 मार्च को मेलबर्न में न्यूजीलैंड से खिताबी जंग में आमने-सामने होंगे। सिडनी में यह मैच बृहस्पतिवार को भारतीय समयानुसान सुबह 9 बजे से खेला जाएगा।
वर्ल्ड कप में दोनों टीमें अब तक 10 बार भिड़ चुकी हैं जिसमें ऑस्ट्रेलिया 7 बार और भारत 3 बार विजयी रहा है। लेकिन पिछले वर्ल्ड कप में टीम इंडिया ने बाजी मारी थी और कंगारुओं को क्वार्टर फाइनल में ही वर्ल्ड कप से बाहर कराया था। महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया लगातार दूसरी बार फाइनल में पहुंचती है तो वेस्टइंडीज, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के बाद ऐसा करने वाली पांचवीं टीम बन जाएगी।
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9 फाइनल खेल चुके भारत और ऑस्ट्रेलिया और अब 10वीं की बारी
जहां इस वर्ल्ड कप से पहले न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका की टीमे कुल 9 सेमीफाइनल खेल चुकी थी, वहीं भारत और ऑस्ट्रेलिया कुल मिलाकर 9 फाइनल खेल चुकी हैं और एक टीम इस बार 10वां फाइनल खेलने उतरेगी। 10वां फाइनल कौन सी टीम खेलेगी यह तो मुकाबले के बाद ही पता चलेगा कि जो भी जीते मुकाबला कांटे का होने वाला है।
गत चैंपियन भारतीय टीम 1983 और 2011 में वर्ल्ड कप जीतने के बाद लगातार तीसरी बार खिताब जीतने के अभियान में जुटी है, वहीं मेजबान ऑस्ट्रेलिया की नजर अपने पांचवें वर्ल्ड खिताब पर है।
पहले टीम इंडिया बात, शीर्ष क्रम के बल्लेबाज जमकर रन बना रहे हैं। शिखर धवन के 2 शतक के अलावा, रोहित शर्मा, विराट कोहली और सुरेश रैना ने एक-एक शतक लगाए हैं। शीर्ष क्रम के अलावा टीम की गेंदबाजी ने भी अब तक कमाल का प्रदर्शन किया है। उसने 7 मैचों में कुल 70 विकेट झटके हैं। मोहम्मद शमी, उमेश यादव और मोहित शर्मा की तेज गेंदबाजों की तिकड़ी ने वर्ल्ड कप में धूम मचा रखी है। फिर फिरकी गेंदबाज आर अश्विन तो अपनी गेंदबाजी से विपक्षी बल्लेबाजों को छकाने में माहिर हैं ही और ऊपर से सिडनी की पिच फिरकी गेंदबाजी के अनुकूल होने की संभावना है। आलराउंडर रवींद्र जडेजा भी फॉर्म में लौट चुके हैं। जैसा कहा जा रहा है कि इस मैच में फिरकी गेंदबाज हावी रहेंगे और यह मैच अश्विन के नाम होने की संभावना है।
अब ऑस्ट्रेलियाई टीम की बात, वर्ल्ड नंबर वन और मेजबान टीम दोहरी चुनौतियों के साथ यह टीम भारत के खिलाफ मैदान पर उतरेगी। सिडनी में ऑस्ट्रेलिया इस लिहाज से मजबूत है कि पिछले 13 मुकाबले में भारत उसे सिर्फ एक बार ही हरा सका है और वह भी सात साल पहले। ऑस्ट्रेलिया को अपने विस्फोटक बल्लेबाज डेविड वॉर्नर, ग्लेन मैक्सवेल और ऐरोन फिंच जो वर्ल्ड कप में शतक लगा चुके हैं के अलावा स्टीवन स्मिथ पर काफी भरोसा होगा। इसके अलावा मिचेल स्टॉर्क, जोश हैजलवुड के साथ-साथ अनुभवी मिचेल जॉनसन गेंदबाजी विभाग का जिम्मा संभालेंगे।
टीम इंडिया के पास इतिहास रचने का मौका
टीम इंडिया जहां अपना चौथा फाइनल (1983, 2003 और 2011) खेलने के इरादे के साथ ऑस्ट्रेलिया को चुनौती देने उतरेगी तो वहीं ऑस्ट्रेलियाई टीम अपने एक शानदार रिकॉर्ड को बनाए रखना चाहेगी। ऑस्ट्रेलिया ने रिकॉर्ड 4 बार खिताब पर कब्जा जमाया है। सबसे पहले उसने 1987 में जीता, फिर इसके बाद वह 1999, 2003 और 2007 में खिताबी जीत की हैट्रिक लगा दी।
इस कंगारू टीम के नाम एक दिलचस्प रिकॉर्ड यह दर्ज है कि वह जब भी सेमीफाइनल में पहुंची, वह फाइनल में पहुंचने में सफल रही है। उसने अपना पहला सेमीफाइनल 1975 में खेला और फाइनल में पहुंची, लेकिन वहां उसे पहली खिताबी जंग में हार मिली। इसके बाद वह 1987, 1996, 1999, 2003 और 2007 के सेमीफाइनल में पहुंची और यहां से फिर फाइनल तक का रास्ता तय किया। 1975 के बाद ऑस्ट्रेलिया अब अपना छठा सेमीफाइनल मैच खेलने उतरेगा। इस तरह से कंगारू टीम ने अब तक कुल 6 सेमीफाइनल खेलकर फाइनल तक का रास्ता बनाया जिसमें 4 बार खिताब भी जीता। 1975 में वेस्टइंडीज के हाथों खिताबी हार के बाद उसे सिर्फ 1996 में श्रीलंका ही फाइनल में हरा सकी थी।
अब भारत के पास ऑस्ट्रेलिया के अजेय सेमीफाइनल मुकाबले के रथ को अपने लगातार 12 जीत के अजेय रथ से रोकना होगा। अगर वह कंगारुओं को सेमीफाइनल में रोककर इतिहास रचना चाहेगी।
सिडनी की पिच ने वर्ल्ड कप में स्पिनर्स को दिया फायदा
वर्ल्ड कप के खिताबी अभियान से पहले भारत और ऑस्ट्रेलिया अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई हैं। टीम इंडिया लगातार 7 मैच जीतकर यहां पहुंची है और वह इस मैच में भी शायद ही बदलाव करे। कप्तान धोनी विजयी टीम की लय को बनाए रखना चाहेंगे और पिछली टीम के साथ मैदान पर उतर सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया भी अपनी पिछली एकादश में ज्यादा बदलाव नहीं करेगी। एडिलेड में पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में जीत हासिल करने वाली कंगारू टीम में एक बदलाव की उम्मीद की जा सकती है। तेज गेंइबाज पैट कमिंस की जगह जोश हैजलवुड को वापस रखा जा सकता है।
स्पिनरों को सिडनी की पिच रास आ रही है। क्वार्टर फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका के स्पिनरों ने यहां पर 7 विकेट ले लिए थे। लेग स्पिनर इमरान ताहिर 4 विकेट लेकर मैन ऑफ द मैच बने थे और पार्टटाइम स्पिनर जेपी डुमिनी ने तो हैट्रिक ही बना दी थी।
वहीं वेस्टइंडीज के खिलाफ ग्रुप मैच में दक्षिण अफ्रीका के लेग स्पिनर इमरान ताहिर ने 45 रन देकर 5 विकेट लिए थे। दक्षिण अफ्रीका के जो 5 विकेट गिरे थे उनमें से 2 क्रिस गेल को मिले थे।
अब भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सेमीफाइनल मुकाबला यहां खेला जाना है। परंपरागत रूप से इस मैदान पर स्पिनरों को मदद मिलती रही हैं। अगर सेमीफाइनल में भी विकेट का मिजाज स्पिनरों के अनुकूल रहता है तो भारतीय टीम के पास अश्विन और रविंद्र जडेजा मुख्य स्पिनर के रूप में हैं।