ज्यादातर क्रिकेट प्रशंसक अपने पसंदीदा खिलाड़ियों से ऑटोग्राफ लेना पसंद करते हैं और वे उनसे ऑटोग्राफ लेने का कोई भी मौका गंवाना नहीं चाहते। ऑटोग्राफ लेने की कतार में न सिर्फ बच्चे बल्कि युवा और बड़े उम्र के लोग भी शामिल होते हैं।
ऑटोग्राफ लेने के कई तरीके होते हैं और इन ढेर सारे तरीकों में एक तरीका वह होता है जिसमें खिलाड़ी जब सीमारेखा के पास आए तो उससे ही ऑटोग्राफ ले लिया जाए। हालांकि सीमारेखा के पास कई खिलाड़ी नहीं आ पाते क्योंकि वे ज्यादातर विकेट के करीब ही रहते हैं। गेंदबाज ही ज्यादातर सीमारेखा के पास खड़े होते हैं। ऑटोग्राफ देना किसी को भी अच्छा लग सकता है। खिलाड़ी ऑटोग्राफ देकर न सिर्फ अपने प्रशंसकों की इच्छा की पूर्ति करते हैं बल्कि उनमें खुद सितारा हैसियत का पुट भी दिखता है।
लेकिन अब प्रशंसकों के लिए ऑटोग्राफ हासिल करने का यह रास्ता भी बंद होने जा रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अब अपने खिलाड़ियों पर यह पाबंदी लगाने जा रही है। बोर्ड के अनुसार, क्षेत्ररक्षण के दौरान अब खिलाड़ी किसी को ऑटोग्राफ नहीं दे सकेंगे।
जानिए, बीसीसीआई ने ऑटोग्राफ पर क्यों लगाई रोक?
आपने हमेशा देखा होगा कि जो खिलाड़ी सीमारेखा के पास खड़े होते हैं उनसे ऑटोग्राफ लेने की काफी होड़ होती है जो दर्शक सीमारेखा के पास खड़े होते हैं। अब बीसीसीआई ने एक फरमान जारी करते हुए ऐसा करने से मना कर दिया है। हालांकि इस के पीछे उसकी मंशा स्पॉट फिक्सिंग या मैच फिक्सिंग की किसी भी संभावना को खत्म करने की है।
बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट के वरिष्ठ जांच अधिकारी केएस माधवन ने कहा, "हमने अपने खिलाड़ियों से कह दिया है वे अब आईपीएल, चैंपियंस लीग टी-20 के अलावा बीसीसीआई की ओर से आयोजित किसी भी टूर्नामेंट में मैच के दौरान किसी को ऑटोग्राफ नहीं दे सकेंगे।" उन्होंने आगे बताया कि हो सकता है कि ऑटोग्राफ लेने का यह तरीका मैच के दौरान क्रिकेटरों और बुकीज के बीच संबंध बनाने का काम करता हो। ऑटोग्राफ के बहाने बुकी ऑटोग्राफ बुक पर क्रिकेटर से मैच के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है। उदाहरण के तौर पर वह पूछ सकता है कि बल्लेबाजी के दौरान कितने रन बनने जा रहे हैं।
माधवन रविवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच रणजी ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला देखने पहुंचे थे। तमिलनाडु के रिटायर्ड एसपी रहे माधवन बताते हैं कि बुकीज इन दिनों एक नए तरीके से फिक्सिंग का धंधा आगे बढ़ा रहे हैं। वे मैच के दौरान स्टेडियम में अपने 'एजेंट' भेजते हैं जिनका काम स्कोर के बारे में बताने का होता है। टीवी पर मैच का प्रसारण कुछ देरी से होता है और ये एजेंट स्कोर बताकर उनकी मदद करते हैं जिससे बुकीज काफी पैसा बनाते हैं।
उदाहरण के तौर पर इसके जरिए उन्हें यह पता चल जाता है कि बल्लेबाज आउट है या नहीं। अगली गेंद पर क्या होगा चौका लगेगा या छक्का, इस तरह से उन्हें पूरी जानकारी मिल जाती है।
2013 में आईपीएल में जमकर स्पॉट फिक्सिंग हुई थी, जिसमें भारत से 3 क्रिकेटरों पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया था।