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मुरली ने दिया अपना बेस्ट, पर चूक गए सचिन-गांगुली का रिकॉर्ड

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जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में मुरली विजय हिट रहे। पहले वनडे में फ्लॉप होने के बाद उन पर अंगुली उठी लेकिन अपने बल्ले से उन्होंने सभी आलोचको को मुंह तोड़ जवाब दिया।
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हालांकि इस मुकाबले में मुरली की रनों की धीमी रफ्तार वनडे के बजाय टेस्ट की याद दिला रहा था। मुरली ने 135 गेंदों में 72 रन बनाए। उन्होंने 82 गेंद खेलकर सिर्फ एक चौके की मदद से अपनी फिफ्टी पूरी की।

अपनी अर्धशतकीय पारी में उन्होंने दो छक्के और एकमात्र चौका लगाया। यह स्कोर उनका वनडे में बेस्ट स्कोर है। कुल 15 वनडे मैच खेल चुके मुरली का इससे पहले 33 रन सर्वाधिक स्कोर था।
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मुरली के साथ टीम इंडिया के युवा कप्तान अजिंक्य रहाणे ने भी धेर्यपूर्वक खेला और बल्ले से रन बरसाए। रहाणे ने भी फिफ्टी पूरी की। दोनों बल्लेबाजों टीम को अच्छी शुरुआत तो दी लेकिन इसी मैदान में 15 साल पुराना सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली का रिकॉर्ड तोड़ने से चूक गए।
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15 साल पहले यहीं सचिन-गांगुली ने जमाया था रंग

आज से ठीक 15 साल पहले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और तत्कालीन टीम इंडिया के कप्तान सौरव गांगुली ने इसी मैदान में रंग जमाया था और शानदार बल्लेबाजी की थी। इस मैदान में सचिन और गांगुली की यह यादगार पारी बेस्ट भारतीय ओपनिंग साझेदारी है।

एक तरफ जिम्बाब्वे के खिलाफ मुरली विजय और अजिंक्य रहाणे ने पहले विकेट के लिए 112 रन जोड़े। तो गांगुली और सचिन के बीच इस मैदान में 133 रन की ओपनिंग साझेदारी हुई थी। मुरली और रहाणे रिकॉर्ड तोड़ने से 21 रन से चूक गए।

4 जुलाई 2001 को वेस्टइंडीज के खिलाफ इस रोमांचक मुकाबले में भारत ने टॉस जीता और पहले क्षेत्ररक्षण चुना। कैरिबियाई टीम 50 ओवर में 5 विकेट खोकर 229 रन ही बना सकी।

जवाब में टीम इंडिया की शुरुआत धमाकेदार रही। टीम इंडिया के बेस्ट ओपनिंग जोड़ी मैदान में पहुंची। गांगुली और सचिन ने पहले विकेट के लिए 133 रन जोड़े। आतिश बल्लेबाजी करते हुए गांगुली ने 10 चौके और एक छक्का लगाकर 62 रन बनाए। जबकि सचिन 12 चौकों और एक छक्के के साथ 122 रन पर टीम को जीत दिलाकर नाबाद लौटे।
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दोनों मुकाबलों में रही एक खास बात

हालांकि मुरली विजय और अजिंक्य रहाणे हरारे के मैदान में बने 15 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने में कामयाब नहीं हो सके। लेकिन इन दोनों मुकाबलों की एक खास बात रही 'हरभजन सिंह का टीम में होना'।

2001 में वेस्टइंडीज के खिलाफ हरभजन सिंह टीम का हिस्सा थे। जबकि 15 साल बाद इसी मैदान में मेजबान टीम के खिलाफ भी हरभजन ‌सिंह ने गेंदबाजी की।

हरभजन सिंह ने 2001 में कैरिबियाई टीम के खिलाफ अच्दी गेंदबाजी की और एक विकेट झटका जबकि रविवार को जिम्बाब्‍वे के खिलाफ भी एक ही सफलता हासिल की।
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