शायद इसी को टी-20 क्रिकेट कहते हैं। महज एक से डेढ़ घंटा में ही लग गया कि जो टीम इंडिया टी-20 वर्ल्ड कप की सबसे मजबूत
दावेदार थी अब उसके लिए हर अगला मुकाबला ‘करो या मरो’वाला हो गया। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी इसका अहसास बखूबी हो
गया है। तभी तो न्यूजीलैंड के खिलाफ हार के बाद उनके मुंह से यही निकला अब उन्हें हर मैच में जीत नहीं बल्कि बड़ी जीत की
दरकार होगी।
सच्चाई यह है कि न्यूजीलैंड के खिलाफ जामथा में मिली हार ने टीम इंडिया की कई खामियों को उजागर कर दिया है। टॉप तीन
बल्लेबाज रोहित शर्मा, शिखर धवन और विराट कोहली का बल्ला चलता रहा और भारतीय टीम जीतती गई। यह दक्षिण अफ्रीका के
खिलाफ अभ्यास मुकाबला था जिसने टीम के मध्यक्रम की खामियों को सामने लाकर रख दिया।
विराट कोहली को भी यह बात अच्छी तरह समझ में आ गई थी तभी तो उन्होंने मैच की पूर्व संध्या पर स्वीकार किया कि मध्यक्रम को
साबित करने के मौके कम मिले हैं, लेकिन इसका चलना जरूरी है। न्यूजीलैंड के खिलाफ यही हुआ मध्यक्रम पूरी तरह चरमरा गया।
पाक से हार बर्दाश्त नहीं
- फोटो : pti
कप्तान धोनी न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली हार के लिए स्पिन पिच को नहीं बल्कि बल्लेबाजों में जुझारूपन की कमी को जिम्मेदार मान रहे हैं। वह कहते भी हैं कि अगर वर्ल्ड कप में कुछ करना है तो जुझारूपन लाना होगा। एक बात यह भी साफ है कि पाकिस्तान के खिलाफ ईडन गार्डंस में जब धोनी उतरेंगे तो उनका काफी कुछ दांव पर होगा। यहां अगर हार हिस्से में आई तो क्रिकेट प्रेमियों की माफी तो उन्हें मुश्किल से मिलेगी ही साथ ही वह कईयों की नजरों में भी चढ़ जाएंगे।
उधर, पाकिस्तान ने बुधवार को हुए वर्ल्ड कप के दूसरे लीग मैच में बांग्लादेश को कोलकाता के ईडन गार्डंस में बुरी तरह धोया। पाक ने 201 रन बनाए और 55 रनों से मैच अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही पाक ने दो निशाने साधे। पहला भारत को कोलकाता में होने वाले आगामी मुकाबले के लिए चेतावनी देना और बांग्लादेश को हराकर एशिया कप का बदला।
धोनी के चेहरे पर शिकन नहीं
- फोटो : pti
हार के बाद न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन के साथ हंसकर चाहे लंबी बातचीत हो या फिर मीडिया का सामना करने की, कप्तान धोनी के चेहरे पर ऐसा कोई भाव नहीं था जिससे यह लगे कि सब कुछ खत्म हो गया है। धोनी का यही सकारात्मक पक्ष भी है।
हालांकि उन्होंने यह माना कि यह हार सावधान करने वाली है, लेकिन यह भी कहा कि ईडन गार्डन में पाकिस्तान से होने वाले मुकाबले के लिए टीम को फिर से एकजुट करना उनके लिए कठिन नहीं होगा। यही उनका काम है। उनकी कोशिश रहेगी की इस हार को पीछे रखकर अब किस तरह अगले मुकाबलों के लिए जोरदार वापसी की जाए।
धोनी को यह भी मालूम है कि श्रीलंका में हुए 2012 के टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान आस्ट्रेलिया के हाथों मिली नौ विकेट से हार ने उन्हें नेट रन रेट में पीछे कर दिया था और टीम नॉक आउट के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थी। यही वजह है अब टीम को अगले मुकाबलों में जीत नहीं बल्कि बड़ी जीत हासिल करनी होगी।