हुसैन की बातों से साथी कमेंटेटर और पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली भी सहमत दिखे। नासिर हुसैन भी अपनी इस टिप्पणी के लिए पाकिस्तान में ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं। लेकिन नासिर हुसैन और गांगुली यह भूल गए कि 338 रन के लक्ष्य का पीछा केवल आखिरी के 5 ओवर में ही नहीं होता।
भारत ने पहले पावरप्ले यानी शुरुआत के 10 ओवर में महज 28 रन बनाए हैं। उसी तरह आखिरी के पांच ओवर में केदार जाधव और धोनी महज तीन चौके और एक छक्का लगा पाए और 20 सिंगल लिए। साथ ही छह गेंद पर कोई रन नहीं बने। जाहिर है भारत ने शुरुआत के दस ओवर और आखिर के पाँच ओवर में जैसा खेल दिखाया उससे ही साफ हो गया था कि ये जीतने के लिए नहीं खेल रहे हैं।
पहले पावरप्ले में भारत की शुरुआत हद से ज्यादा धीमी रही। रोहित शर्मा जैसे कि हर मैच में खुद को पहले पिच पर जमाने की कोशिश करते हैं इस मैच में भी ऐसा ही करते दिखे। हालांकि उन्हें पता था कि यह छोटे लक्ष्य की शुरुआत नहीं है। पहले पावर प्ले में 28 रन पर एक विकेट विश्व कप की सबसे धीमी शुरुआत है।
रोहित शर्मा भाग्यशाली साबित हुए कि जो रूट ने दूसरे ओवर में ही सेकंड स्लिप में आसान सा कैच छोड़ दिया। भारत ने हार की पटकथा शुरुआत में ही लिख दी थी। पहले 10 ओवर में 42 गेंदों पर कोई कोई रन नहीं बना और महज पांच चौके लगे।
हालांकि कोहली ने धीमी शुरुआत की बात को खारिज करते हुए कहा है, 'हम पहला विकेट गिरने के बाद सतर्क थे। शुरू में ही विकेट गिर जाने से दबाव बनता है। हमने केएल राहुल को शुरू में ही खो दिया था। इंग्लैंड के गेंदबाजों ने पहले 10 ओवर में बेहतरीन गेंदबाजी की थी।'
धोनी और जाधव ने कोई बयान नहीं दिया है लेकिन रोहित शर्मा ने इनका बचाव किया है। रोहित ने कहा है, 'माही और केदार ने बड़े शॉट खेलने की कोशिश की लेकिन स्लो पिच के कारण संभव नहीं हो पाया। आप यहां इंग्लिश टीम की सराहना कर सकते हैं कि उन्होंने बेहतरीन खेला।'
हालांकि इस बार धोनी पर धीमे खेलने का तोहमत रोहित और विराट की तुलना में नहीं लगाया जा सकता। रोहित शर्मा ने 109 गेंद पर 102 रन की पारी खेली जबकि कप्तान कोहली ने 76 गेंद पर 66 रन की। मतलब दोनों ने रन की तुलना में गेंद ज्यादा खाए। वहीं धोनी ने 31 गेंद में 42 रन की पारी खेली। धोनी एकमात्र खिलाड़ी थे जिन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ एक छक्का मारा। दूसरी तरफ इंग्लैंड ने कुल 13 छक्के मारे।
धोनी की पहचान एक बेहतरीन 'फिनिशर' की रही है। मतलब आखिर के ओवरों में वो टीम के लक्ष्य की पीछा करने की सूरत में कम ही चूकते हैं और तेज रन बनाकर जीत के दरवाजे तक पहुंचा देते हैं। लेकिन इसका मतलब ये नहीं हो सकता है कि कोई अच्छा फिनिशर बड़े लक्ष्य की बेकार शुरुआत की भरपाई भी आखिरी ओवरों में ही कर दे।
आखिर के पांच ओवर में भारत को जीत के लिए 71 रनों की जरूरत थी। मतलब हर गेंद पर दो से भी ज्यदा रन बनाने थे जो कि आसान नहीं था।
धोनी की आलोचना अफगानिस्तान के खिलाफ मैच से ही हो रही है, जिसमें भारत हारते-हारते जीता था। अफगानिस्तान के खिलाफ धोनी ने 52 गेंद पर 28 रन की पारी खेली थी। लेकिन अफगानिस्तान के खिलाफ कप्तान कोहली को छोड़ हर खिलाड़ी ने खराब खेला था।
रोहित शर्मा तो 10 गेंद पर एक रन बनाकर आउट हो गए थे। वहीं वेस्ट इंडीज के खिलाफ भी धोनी की पारी की आलोचना हो रही है, जबकि धोनी ने 61 गेंद पर 56 रन की पारी खेली थी। वेस्ट इंडीज के खिलाफ रोहित शर्मा 23 गेंद पर 18 रन बनाकर आउट हो गए थे और कप्तान कोहली ने 82 गेंद पर 72 रन बनाए थे।
पाकिस्तान में धोनी की आलोचना इसलिए हो रही है, क्योंकि इंग्लैंड की जीत से सेमीफाइनल में पहुंचना उसके लिए अब आसान नहीं है। पाकिस्तान अंक तालिका में इंग्लैंड की जीत से चौथे से पाँचवें नंबर पर आ गया है और इंग्लैंड चौथे नंबर पर।
पाकिस्तान के आठ मैचों में कुल नौ अंक हैं जबकि इंग्लैंड के आठ मैचों में कुल 10 अंक हैं। दोनों के एक-एक मैच बचे हैं। पाकिस्तान अगर अपना अगला मैच बांग्लादेश से जीत भी जाता है तो उसके कुल अंक ग्यारह होंगे और इंग्लैंड जीत जाता है तो उसके कुल अंक बारह हो जाएंगे।