दुनिया के बेहतरीन फिनिशर कहे जाने वाले धोनी के प्रदर्शन में कई बार पुरानी चमक कौंधती है। वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे में पैंतीस साल के माही फिर पुराने रंग में नजर आए। मुश्किल विकेट पर पहले संभलकर खेलना और फिर तकाजा देखकर गियर बदलना उनकी खास खूबी है। खुद अपनी तुलना पुरानी शराब से करने वाले धोनी का मानना है कि वक्त के साथ उनका खेल और बेहतर हो रहा है।
विकेटकीपर बल्लेबाज ने एंटीगा में भारतीय जीत में मुश्किल विकेट पर 79 गेंदों पर नाबाद 78 रन की लाजवाब पारी खेली और ‘मैन ऑफ द मैच’ के हकदार बने। पूर्व कप्तान खुश हैं कि उन्हें इस मैच में स्तरीय पारी खेलने का मौका मिला। बकौल धोनी पिछले एक-डेढ़ साल से हमारे शीर्ष तीन बल्लेबाज काफी रन बटोर रहे थे। लिहाजा पिच पर समय बिताने का मौका मिलने और रन बनाने से खुश हूं।
मुझे लगता है कि विकेट के मिजाज से यह पारी और भी खास हो गई क्योंकि पिच में असमान उछाल था और गेंद की गति में भी विविधता थी। मेरी केदार के साथ अच्छी साझेदारी हुई। हमने 250 रन का लक्ष्य बनाया था और उसमें सफल रहे।
टिप्स तो अभी भी देते हैं पूर्व कप्तान
बेशक धोनी कप्तानी छोड़ चुके हैं लेकिन टीम को उनके अनुभव के खजाने का फायदा अब भी बराबर मिलता है। वह विकेट के पीछे से स्पिनरों को टिप्स देते रहते हैं। उनकी ये आवाजें स्टंप्स माइक पर सुनी जा सकती है। ‘फ्लाइट कर, सीधी फेंक, टप्पा सही रख’ वगैरा-वगैरा। खुद माही का कहना है स्पिनरों को बताना पड़ता है।
कुलदीप ने आईपीएल में काफी मैच खेले हैं लेकिन वनडे में नए हैं। पांच-दस मैच खेल लेंगे तो समझ जाएंगे। चैंपियंस ट्रॉफी में उपयोगी साबित हुए पार्टटाइम स्पिनर केदार जाधव को गेंद सौंपने की सलाह भी धोनी ने ही दी थी जिसे बाद में कप्तान कोहली ने भी सराहा था।
हम सब भाग्यशाली हैं कि माही भाई टीम में हैं। कप्तान विराट कभी भी उनसे सलाह ले सकते हैं। तीसरे वनडे में माही भाई और केदार के कारण हम 20 रन अतिरिक्त बनाने में सफल रहे।