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Mohammed Shami: विश्व कप में इतिहास रच शमी ने फिर दिखाई अपनी ताकत, निजी जीवन ने कई बार करियर पर लगाया 'ग्रहण'

Thu, 16 Nov 2023 08:56 AM IST
गुलाम अहमद स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

निजी जिंदगी की उलझनें हों या निष्ठा पर सवाल या फिर 2019 विश्वकप के बाद वनडे, टी-20 टीम से बाहर होना मोहम्मद शमी ने न हिम्मत हारी और न मेहनत छोड़ी। शमी ने न सिर्फ वनडे टीम में जगह बनाई बल्कि विश्वकप टीम में भी शामिल हुए। विश्वकप के लिए भी वह प्रबंधन की प्राथमिक योजनाओं का हिस्सा नहीं थे। वह पहले चार मैचों से बाहर बैठे। हार्दिक पंड्या के चोटिल होने के बाद उन्हें अंतिम एकादश में मौका दिया, जिसे उन्होंने दोनों हाथों से भुनाया।
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भारत की जीत के हीरो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने विश्व कप सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने शानदार प्रदर्शन से क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया। शमी ने इस मुकाबले में न्यूजीलैंड के सात विकेट चटकाए और विश्व कप फाइनल में भारत की जगह पक्की करने में अहम योगदान दिया। 33 वर्षीय गेंदबाज ने विश्व कप में केवल 17 मैचों में 50 विकेट पूरे करने का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने मैन ऑफ द मैच पुरस्कार भी अपने नाम किया।

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मैच के बाद शमी ने कहा कि वह ओवर फेंकने के दौरान गेंद की गति कम करने की कोशिश करते रहे, ताकि बल्लेबाज शॉट लगाने को मजबूर हों। उन्होंने कहा, हम विविधताओं के बारे में बहुत बात करते हैं, लेकिन मैं अभी भी इसे आगे बढ़ाने और नई गेंद से विकेट लेने में विश्वास करता हूं। मैंने गेंद की गति को कम करने की कोशिश पर ध्यान दिया ताकि बल्लेबाज इसे हवा में मारने को मजबूर हों। जिससे उन्हें विकेट लेने में कामयाबी मिली।

हालांकि, शमी ने इस बात को स्वीकारा कि शाम को ओस के कारण भारतीय खेमा थोड़ा परेशान था। हार्दिक पांड्या के चोटिल होने के बाद शमी को प्लेइंग-11 में जगह मिली। इस पर तेज गेंदबाज ने कहा कि वह प्लेइंग-11 टीम में मौका पाने का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा, मैं अपने मौके का इंतजार कर रहा था। मैंने ज्यादा सफेद गेंद के साथ क्रिकेट नहीं खेला। मेरी वापसी न्यूजीलैंड के खिलाफ (धर्मशाला में) शुरू हुई। 
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क्रिकेट करियर 
उत्तर प्रदेश के अमरोहा में 03 सितंबर 1990 को जन्मे मोहम्मद शमी ने 06 जनवरी, 2013 में दिल्ली के अरुण जेटल स्टेडियम में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे डेब्यू किया था। वह अब तक 100 एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय (वनडे) मैच खेल चुके हैं और 99 पारियों में 194 विकेट अपने नाम किए हैं। इसी तरह 64 टेस्ट मैचों में उन्होंने 229 विकेट झटके हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय की बात करें तो शमी 23 मैचों में 24 विकेट चटकाएं हैं।

पत्नी से विवाद और घरेलू हिंसा के आरोप
मोहम्मद शमी ने 2014 में मॉडल और चीयरलीडर हसीन जहां से शादी की थी। दोनों की एक बेटी है। फिलहाल दोनों अलग रह रहे हैं। दरअसल, 2018 में शमी और हसीन जहां के बीच पारिवारिक विवाद सामने आया था। हसीन ने शमी और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ घरेलू हिंसा और व्यभिचार का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। जिसमें शमी के बड़े भाई के खिलाफ भी दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था। हसीन ने शमी पर घरेलू हिंसा, हत्या का प्रयास, आपराधिक धमकी समेत कई आरोप लगाए थे।

हालांकि, शमी ने सभी आरोपों से इनकार किया था और उन्हें क्रिकेट से विचलित करने की साजिश करार दिया था। दो सितंबर 2019 में कोलकाता की एक अदालत ने घरेलू हिंसा के मामले में शमी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। नौ सितंबर को जिला अदालत ने वारंट पर रोक लगा दी थी। फिलहाल हसीन जहां और शमी का तलाक केस अदालत में लंबित है। हसीन के मुताबिक, शमी गुजारा भत्ते के रूप में उन्हें हर महीने 1.30 लाख रुपये देते हैं। 

मैच फिक्सिंग के आरोप
हसीन जहां ने यह भी दावा किया था कि शमी मैच फिक्सिंग में शामिल थे। इन आरोपों के बाद बीसीसीआई ने शमी को अपनी राष्ट्रीय अनुबंध सूची से हटा दिया था। बीसीसीआई की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई ने इन आरोपों की जांच की और शमी को भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त कर दिया गया। साथ ही बीसीसीआई ने उनका राष्ट्रीय अनुबंध बहाल कर दिया।
 
आत्महत्या का विचार
2015 के विश्वकप के बाद शमी चोट से वापसी कर रहे थे। उनकी निजी जिंदगी में काफी कुछ ऐसा चल रहा था, जिससे वह परेशान थे। वह खुद बताते हैं कि उन्होंने तीन बार आत्महत्या करने की सोची थी। 2015 में चोट से वापसी करने में उन्हें 18 महीने लगे। वह टीम में वापस आने की पूरी कोशिश कर रहे थे। लेकिन आईपीएल से 10-12 दिन पहले ही उनका एक्सीडेंट हो गया। उनका घर 24वीं मंजिल पर था और वह इतने हताश थे कि उनके घर वालों को लगता था कि कहीं वे आत्महत्या न कर लें। इसलिए परिवार का कोई न कोई सदस्य हमेशा उनके साथ रहता था। परिवार का यही साथ उनकी ताकत थी।

...तो लाल गेंद के गेंदबाज बनकर रह जाओ
शमी के कोच बदरुद्दीन बताते हैं कि विश्वकप के अंतिम 11 में जगह नहीं मिलने से शमी निराश थे, लेकिन उन्हें मौका मिला तो उन्होंने फिर अपने को साबित किया। एक समय वह था जब सफेद गेंद के प्रारूप से बाहर होने पर शमी इस गेंद पर महारत हासिल करने को छटपटा रहे थे। उस दौरान उन्होंने यही कहा कि जैसे लाल गेंद पर मेहनत की है, वैसी सफेद गेंद पर करो। ऐसा नहीं करना है तो लाल गेंद के गेंदबाज बनकर रह जाओ। इसके बाद उन्होंने दिन-रात एक किया।

शमी ने अपनी ताकत पर किया काम
शमी ने इस विश्वकप में कुछ अतिरिक्त नहीं करते ही अपनी ताकत पर काम करते ही गेंद को आगे रखा है। बदरुद्दीन बताते हैं कि सेमीफाइनल में कॉन्वे का विकेट इसका उदाहरण है। गेंद की सीम एकदम सीधी थी। अब यह बल्लेबाज को समझना है कि गेंद पड़कर अंदर आएगी या बाहर जाएगी। इसमें चूक होने पर शमी को विकेट मिला। शमी ने दूसरे गेंदबाजों की तरह कभी भी तिरछी सीम का इस्तेमाल नहीं किया।

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