क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर समेत छह भारतीय खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने से सुर्खियों में आए थे इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और आईसीसी के मैच रेफरी माइक डेनिस।
डेनिस का कैंसर से 72 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को निधन हो गया। स्काटलैंड में जन्मे डेनिस ने अपने 22 वर्षों के कैरियर में 28 टेस्ट तथा 12 वन-डे खेले थे। वह बाद में आईसीसी मैच रेफरी मैच बने थे।
कप्तान और मैच रेफरी के रूप में डेनिस का कार्यकाल विवादास्पद रहा था। उनके ज्योफ्री बायकाट के साथ तनावपूर्ण संबंध खासे चर्चा में रहे थे लेकिन वह सुर्खियों में तब सबसे ज्यादा आए जब उन्होंने वर्ष 2001-02 में पोर्ट एलिजाबेथ में सचिन तेंदुलकर समेत छह भारतीय खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने के फैसला किया था।
सचिन पर तो बॉल टेंपरिंग का आरोप लग गया था और अन्य भारतीय खिलाड़ियों पर अत्यधिक अपील करने का आरोप लगा था। उनके इस फैसले से इतना हंगामा हुआ कि भारतीय और दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट बोर्डों ने सेंचुरियन में अगले मैच में डेनिस को प्रतिबंधित कर दिया था।
इसके बाद आईसीसी ने फिर अपनी तरफ से कार्रवाई करते हुए सेंचुरियन मैच से टेस्ट दर्जा ही छीन लिया था। डेनिस के फैसले से सचिन के अलावा प्रभावित होने वाले अन्य भारतीय खिलाड़ी कप्तान सौरभ गांगुली, ओपनर वीरेंद्र सहवाग, ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह, बल्लेबाज शिव सुंदर दास और विकेटकीपर दीप दासगुप्ता थे।
भारतीय मीडिया ने डेनिस पर नस्लभेद तक के आरोप लगा दिए थे और भारत की क्रिकेटप्रेमी जनता में इस बात को लेकर इतना गुस्सा भड़क गया था कि देश में कई जगह डेनिस के पुतले फूंके गए थे।
बीसीसीआई ने दक्षिण अफ्रीका बोर्ड को अल्टीमेटम दिया था कि यदि डेनिस को नहीं हटाया जाता है तो आखिरी टेस्ट नहीं खेला जाएगा। आईसीसी डेनिस को हटाने को तैयार नहीं थी और दक्षिण अफ्रीका को राजस्व खोने का डर था।
डेनिस ने भी खुद अगले मैच से हटने से इनकार कर दिया था। भारत और दक्षिण अफ्रीकी बोर्डों ने सेंचुरियन टेस्ट से डेनिस को बाहर कर उनकी जगह दक्षिण अफ्रीका के पूर्व विकेटकीपर डेनिस लिंडसे को मैच रेफरी नियुक्त किया था।