भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच जितना मैदान पर होता है लगभग उतना ही मैदान के बाहर भी होता है। फर्क इतना होता है कि मैदान के बाहर यह मैच जुबानी होता है। खासकर कंगारू खिलाड़ी इस माइंड गेम का जमकर प्रयोग करते हैं। इस दौरे पर भी वही हुआ। हालांकि इस गेम में टीम इंडिया जीत गई। चेन्नई टेस्ट में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से करारी मात देकर बता दिया कि भारत को भारत में हराना आसान नहीं है।
भारतीय स्पिनरों पर बनाया 'जुबानी' दबाव
भारतीय जमीं पर उतरते ही ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को इस बात की जानकारी थी कि उन्हें यहां स्पिन पिचों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए टीम के ज्यादातर खिलाड़ी और पूर्व कोच बुचनन ने बयान देने शुरू कर दिए कि हमारी टीम स्पिनरों को बेहतर खेलती है। वाटसन ने तो खुलेआम कहा था कि वो भारतीय स्पिनरों के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाएंगे। उन्हें लय में आने ही नहीं देंगे। ये अलग बात है कि पहले टेस्ट की दोनों पारियों में वाटसन स्पिन गेंदबाज अश्विन की गेंद पर आउट हुए।
मैच से पहले टीम की घोषणा
भारत के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पिछली दो सीरीज से मैच से दो दिन पहले ही टीम की घोषणा कर दबाव बनाने की सोचते हैं। ऑस्ट्रेलिया में तो यह सफल रहा। लेकिन चेन्नई टेस्ट में क्लार्क का यह दांव बुरी तरह उल्टा पड़ा। क्लार्क ने चेन्नई टेस्ट से 2 दिन पहल ही चार तेज गेंदबाजों को उतारने की बात डंके की चोट पर कही। जबकि चेन्नई की पिच पहले ही दिन से टर्न करने लगी। क्लार्क को अब समझ लेना चाहिए कि वो ऑस्ट्रेलिया में नहीं भारत में खेल रहे हैं। इसलिए इस तरह के दांव खेलने से पहले उन्हें कई बार सोचना पड़ेगा।
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