चेन्नई टेस्ट मैच में 96 रन देकर आठ विकेट लेने और भारत की दूसरी पारी में शतक जमाने के लिए अश्विन को मैन ऑफ द मैच चुना गया। ऑफ स्पिनर ने भारत की रिकॉर्ड जीत के बाद कि उन्होंने चेपॉक की पिच से मिल रहे टर्न के बूते ही नहीं बल्कि 'गति और चालबाजी' से भी विकेट निकाले।
पिच को लेकर काफी चर्चाएं हुई थी। पूर्व दिग्गजों जैसे शेन वार्न और माइकल वॉन तो सोशल मीडिया पर आपस में भिड़ गए थे। अश्विन ने भारत की 317 रन से जीत के बाद कहा, 'लोग जितना बाहर बैठकर भविष्यवाणी कर रहे हैं, मुझे लगता है जो गेंद ज्यादा टर्न कर रही थी उससे विकेट नहीं मिल रहे थे। यह बल्लेबाजों की मानसिकता थी, जिसके कारण हमें विकेट मिले। मैं वर्षों से यहां खेल रहा हूं और हमें विकेट गति और चालबाजी से मिले। अपने इरादे मजबूत रखना बेहद महत्वपूर्ण था।'
अश्विन ने कहा कि उन्होंने घरेलू दर्शकों के सामने मैच का पूरा लुत्फ उठाया क्योंकि वह घरेलू परिस्थितियों से अवगत थे। उन्होंने कहा, 'पिच जिस तरह से व्यवहार कर रही हो उसमें हर तरीका भिन्न परिणाम देता है। मैंने अलग तरीके से कोशिश की। हवा का उपयोग किया, गेंद छोड़ने के लिये विभिन्न कोण का उपयोग किया। रन अप में अपनी तेजी से काम लिया। यह मेरे लिए कारगर रहा क्योंकि मैंने इस पर काम किया था।'
यह लाल मिट्टी वाला विकेट था जबकि पहला बजरी वाला विकेट था।' भारत की दूसरी पारी में अपना पांचवां टेस्ट शतक बनाने के बारे में अश्विन ने कहा, 'गेंदबाजों पर दबाव बनाना बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि अगर आप उन्हें हावी होने का मौका देते हो तो उनके लिये चीजें आसान हो जाएंगी। मैं उन लोगों में शामिल हूं जो कड़ी मेहनत करते हैं और जब चीजें अनुकूल न हों तो मैं और कड़ी मेहनत करता हूं।'
अपने 400वें विकेट से महज छह विकेट दूर इस 34 वर्षीय गेंदबाज ने कहा, 'पहले मैच की तुलना में विकेट काफी भिन्न था। अश्विन ने कहा कि बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौड़ और उप कप्तान अजिंक्य रहाणे की सलाह उनके काफी काम आई। उन्होंने कहा, 'विक्रम राठौड़ का रवैया बेहद सहयोगी रहा। अजिंक्य रहाणे ने भी अहम भूमिका निभाई। सिडनी टेस्ट की पारी ने वास्तव में मेरे लिए लय बनाई।'