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तो कप्तान बनते ही बदल गई मुरली विजय की 'किस्मत'

Tue, 10 May 2016 06:45 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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बल्लेबाज मुरली विजय का बल्ला दो हफ्ते पहले तक कुछ खास नहीं चल रहा था कि इस बीच अचानक उनकी किस्मत पलटी कि कप्तान भी बने और फॉर्म भी लौट आया।
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आईपीएल-9 में भी किंग्स इलेवन पंजाब का शुरुआती प्रदर्शन बेहद खराब रहा था और उसे 6 मैचों में उसे 5 में हार मिली और प्लेऑफ में शामिल होने के दावेदारी से दूर होती दिखी तो टीम प्रबंधन ने टूर्नामेंट के बीच में ही अपना कप्तान बदल दिया।

वहीं, कप्तान बनते ही टीम ने 3 में से 2 जीत हासिल कर ली तो खुद कप्तान ने अगुवाई करते हुए इन 4 मैचों में दूसरी फिफ्टी ठोंक दी। दिलचस्प यह है कि 4 मैचों में उनकी दूसरी फिफ्टी रही तो इससे पहले खेले 27 पारियों में उनके खाते में 2 अर्धशतक ही आए थे।
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प्रबंधन ने बल्ले से संघर्ष कर रहे मुरली पर भरोसा जताया और तो उन्होंने भी जवाब में कुछ अच्छे परिणाम दिए। उनके कप्तान बनते ही अगले ही मैच में टीम की जीत का इंतजार खत्म हो गया और उसने गुजरात लायंस को हराकर दूसरी जीत भी हासिल कर ली। इस मैच में नए कप्तान मुरली ने 41 गेंदों में 55 रनों (6 चौके) की आतिशी पारी भी खेली थी।

इसके बाद कोलकाता नाइटराइसर्ड (केकेआर) के खिलाफ पंजाब हार गया, लेकिन फिर अगले ही मैच में टीम ने दिल्ली डेयरडेविल्स को हराकर अपनी तीसरी जीत दर्ज कराई। 3 मैचों में मुरली की अगुवाई में पंजाब को 2 जीत मिल चुकी थी।

पंजाब को अपने 10वें मैच में रॉयल चैलेंजर्स बंगलोर (आरसीबी) के खिलाफ कांटेदार संघर्ष के बाद अंतिम गेंद पर एक रन से हार मिली। यह मैच शानदार रहा लेकिन हार तो हार है लेकिन विजय ने 57 गेंदों में 89 रनों की जूझारू पारी खेलकर मैच को रोमांचक बना दिया था लेकिन बाद के बल्लेबाज परिणाम को अपने पक्ष में नहीं कर सके। आईपीएल में पंजाब की ओर से बतौर कप्तान यह दूसरी सबसे बड़ी पारी भी है। उनसे पहले एडम गिलक्रिस्ट ने आरसीबी के ही खिलाफ 106 रनों की शतकीय पारी खेली थी।

यानी कि कप्तान बदलने का तुक्का दोनों (टीम और मुरली विजय) के लिए फायदेमंद रहा। इस बार शीर्ष 4 में जाने की संभावनाएं धूमिल होती दिख रही हैं लेकिन आगे के लिए इस कप्तान के साथ बेहतर योजना बनाई जा सकती है।
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मुरली के पास नहीं था कप्तानी का कोई खास अनुभव

पंजाब ने अपने कप्तान डेविड मिलर को कप्तानी के पद से हटा दिया और उनकी जगह बल्लेबाज विजय को कमान सौंप दी। हालांकि प्रबंधन ने अफ्रीकी बल्लेबाज मिलर को टीम में बतौर खिलाड़ी बनाए रखा है।

मिलर की तरह ही विजय के पास भी कप्तान का ज्यादा अनुभव नहीं था। आईपीएल से पहले उन्होंने अपनी घरेलू टीम तमिलनाडु के लिए 2009 से 2011 के बीच कुल 13 मैचों (तीनों प्रारुप) में कप्तानी की जिसमें 7 टी-20 मैच भी शामिल हैं।

आईपीएल में कप्तान बनने से पहले विजय का प्रदर्शन बहुत खास नहीं रहा और 6 मैचों में 113.50 की औसत से 143 रन ही बना पाए थे। 
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