संभवतः धोनी ने लगभग एक दशक के अपनी कप्तानी करियर में पहली बार किसी एक दौरे पर ढेर सारे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय कैप पहनने का मौका दिया है। वरना उनका इतिहास यह रहा है कि वह टीम में ज्यादा फेरबदल पसंद नहीं करते और अपने प्रयोग किए हथियारों के साथ मैदान पर उतरते रहे हैं।
पहली बार बतौर कप्तान धोनी जिम्बाब्वे के दौरे पर गए हैं और उनके साथ मंझे हुए खिलाड़ियों की फौज के बजाए युवा खिलाड़ियों को भेजा गया। उम्मीद थी कि सभी युवा खिलाड़ियों को इस बार अपना हुनर दिखाने का मौका मिल जाएगा और जिस तरह से वनडे सीरीज में युवा क्रिकेटरों को लेने की दिलचस्पी दिखाई उससे तो यही लगा था, लेकिन एक युवा खिलाड़ी ऐसा भी रहा जिसकी किस्मत में मौका मिलना नहीं लिखा था और ड्रेसिंग रूम में बैठकर ही दौरे का अंत करना पड़ रहा है।
दिल्ली के ऑफ स्पिनर जयंत यादव है उस अनलकी क्रिकेटर का नाम जिसे मौके के जोरदार अवसर पर भी बेरंग लौटना पड़ेगा। धोनी ने सभी को मौका दिया, कुछ की खराब शुरुआत के बाद भी अगले मैच में खिलाया। लेकिन जयंत को मौका नहीं दिया। अगर कप्तान धोनी 26 साल के इस ऑलराउंडर को चांस दे देते तो टीम को कोई फर्क नहीं पड़ता, साथ ही एक और खिलाड़ी की परख हो जाती कि यह कितने लंबे रेस का घोड़ा है।