चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली
पुजारा इस बदलती परिभाषा पर कई बार खरे नहीं उतरते हैं। उनके करियर में पहले भी ऐसा हो चुका है। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में खेली सुस्त पारी हार का पोस्टमार्टम हमेशा होता है। सिर्फ हिंदुस्तान में नहीं बल्कि क्रिकेट खेलने वाले हर देश में। ऊपर से अगर हारने वाली टीम दुनिया की नंबर एक टीम हो तो उसके लिए फिक्र का बढ़ना स्वाभाविक है।
पुजारा ने वेलिंग्टन टेस्ट की पहली पारी में 42 गेंद पर 11 रन बनाए। दूसरी पारी में तो पुजारा और सुस्ती से खेले। उन्होंने 81 गेंद पर सिर्फ 11 रन बनाए। फर्ज कीजिए दुनिया का बड़े से बड़ा बल्लेबाज पुजारा के सामने क्रीज के दूसरे छोर पर हो। वो जब बल्लेबाजी करने आएगा तो उसके दिमाग में यही बात होगी कि विरोधी टीम के गेंदबाज इतने घातक हैं कि उनके सामने रन बनते ही नहीं हैं।
अगर टेस्ट मैच में तीन- साढ़े तीन सेशन का खेल बाकी हो और क्रीज पर समय बिताना हो तो भी बल्लेबाजी का ये अंदाज और रणनीति समझ आती है, लेकिन अगर टेस्ट मैच में दो दिन से ज्यादा का समय बचा हो तो फिर हर बॉल वेल लेफ्ट और वेल प्लेयड नहीं हो सकती है। रन बनाने होंगे वरना बल्लेबाज कोई भी हो उस पर सवाल उठेंगे। जो फिलहाल चेतेश्वर पुजारा के साथ हो रहा है।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब पुजारा ने जरूरत से ज्यादा सुस्त बल्लेबाजी की हो। साल 2016 में वेस्टइंडीज के खिलाफ भी पुजारा ने कुछ ऐसा ही किया था। उन्होंने पहले टेस्ट मैच में 67 गेंद पर 16 रन बनाए थे।
वो टेस्ट टीम इंडिया जीत गई थी इसलिए ज्यादा हो हल्ला नहीं हुआ। अगले मैच में पुजारा ने 159 गेंद खेलकर सिर्फ 46 रन बनाए। वेस्टइंडीज ने वो टेस्ट मैच ड्रॉ करा लिया। भारत के पास उस मैच को जीतने का शानदार मौका था। जो मौका हाथ से निकल गया। विराट ने पुजारा को ना सिर्फ चेतावनी दी बल्कि टेस्ट मैच से ड्रॉप भी कर दिया।
इसके बाद पुजारा ने अगली कई पारियों में बेहतर स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। लेकिन एक बार फिर उनकी सुई अटक गई है। टेस्ट फॉर्मेट में टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज होने के बाद भी वो टीम के काम नहीं आ रहे हैं।
दूसरे टेस्ट मैच में उन्हें इस पहलू पर ना सिर्फ ध्यान देना होगा बल्कि इसका समाधान करना होगा वरना ये नई टीम इंडिया सिर्फ कद पर नहीं जाती बल्कि टीम के लिए कुछ बड़ा करने वाले खिलाड़ियों के रिकॉर्ड्स पर जाती है।
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