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क्या सचिन ने जाते-जाते जरा देर कर दी...?

Thu, 10 Oct 2013 07:23 PM IST
भरत शर्मा/टीम डिजिटल
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क्रिकेट का मसीहा, बैटिंग का भगवान, मास्टर ब्लास्टर, लिटिल मास्टर, द गॉड...वगैरह-वगैरह। आप थक जाएंगे, लेकिन ये रुतबा नहीं। ये सभी उपनाम एक ही शख्स के हैं। सचिन रमेश तेंदुलकर।
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एक ऐसा बल्लेबाज, जिसका विकेट लेने का जश्न गेंदबाज दिवाली की तरह मनाता था और जिससे पिटने पर उसी गेंदबाज का चेहरा बुझे हुए दिए जैसा हो जाता था। दुनिया का इकलौता बल्लेबाज, जिसे आउट करने वाली गेंद, बॉलर अपनी अलमारी में सजाकर रखता था।

ऐसा खिलाड़ी, जिसकी काबिलियत और कला की कसमें वानखेड़े की पिच से लेकर वॉन्डरर्स तक का मैदान आज भी खाता है। जिसकी सादगी पर दुनिया फिदा है।

रिटायरमेंट पर हैरानी कैसी?
सचिन तेंदुलकर ने गुरुवार को संन्यास का ऐलान किया, तो दुनिया के हर हाथ में थमा बल्ला जैसे गश खाकर गिर गया। लेकिन यह फैसला अचानक नहीं आया। ऐसा नहीं कि उनके रिटायरमेंट की खबर ने दुनिया को हिला दिया।
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दरअसल, यह आशंका लंबे वक्त से जताई जा रही थी कि सचिन अब कभी भी रिटायरमेंट का ऐलान कर सकते हैं। बीते ढाई साल के दौरान उनके धीमे पड़ते रिफ्लेक्स और खामोश होते हुए बल्ले इन आवाजों को और जोर दिया।

कुछ दिन पहले ही यह खबर आई थी कि बोर्ड ने सचिन को इशारों-इशारों में बता दिया है कि उनके जाने का वक्त अब करीब है। हालांकि, चयन समिति के अध्यक्ष संदीप पाटिल और सचिन, दोनों ने इस बात से इनकार किया।

दरअसल, एक बड़ा तबका मानता है कि सचिन ने संन्यास लेने में जरा देर कर दी। शायद सच भी है। वर्ल्ड कप 2011 का खिताबी मुकाबला जीतकर टीम इंडिया के हर सदस्य ने कहा कि यह कप सचिन के लिए जीता गया है।

याद है वर्ल्ड कप फाइनल का दिन
वे तस्वीरें आज भी जहन में ताजा है, जब खिलाड़ियों ने सचिन को कांधों पर बैठाकर मैदान का चक्कर लगाया था। शायद वही दिन संन्यास के लिए मुफीद होता। क्योंकि उसके बाद मास्टर ब्लास्टर का ब्लास्ट कम ही दिखा।

आंकड़े भी इस बात की गवाही देते फिर रहे हैं। इस मैच के बाद सचिन ने कुल 19 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 38 पारियों में वह मैदान पर दिखे। इन पारियों में उन्होंने कुल 1,145 रन बनाए और औसत रहा 30.13 का।

अपनी ओपनिंग के दम पर वनडे की नई परिभाषा गढ़ने वाले सचिन इस मैच के बाद बहुत कम एकदिवसीय मैच खेले, क्योंकि उन्होंने रंगीन क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया।

श्रीलंका के खिलाफ वर्ल्ड कप फाइनल के बाद उन्होंने केवल दस ओडीआई खेले, जिनमें 315 रन बटोर सके। यहां भी औसत रहा 31.5 का।

धीरे-धीरे घटी बल्ले की चमक
2 अप्रैल, 2011 के बाद सचिन के प्रदर्शन में किस कदर गिरावट आई, इसका अंदाजा उनके करियर के कुल आंकड़े देखकर लगाया जा सकता है।

सचिन का एकदिवसीय मैचों में 44.38 का औसत है, जबकि टेस्ट मैच में उनका बैटिंग एवरेज 53.86 है। जाहिर है, उस रोज के बाद उनकी बल्लेबाजी से वह नूर चला गया, जिसके लिए वह जाने जाते हैं।

वर्ल्ड कप फाइनल के बाद टेस्ट और वनडे से अलग सचिन ने आईपीएल और चैंपियंस लीग जैसे टूर्नामेंट में ट्वेंटी20 मैच भी खेले, लेकिन उनका बल्ला पिच पर कोई खास इबारत नहीं लिख सका।

जाने का दुख भी, खुशी भी
यही वजह है कि आज सचिन जा रहे हैं, तो आंखों में आंसू भी हैं और फैसले में देरी का गम भी। उनके अपने प्रशंसकों का बड़ा हिस्सा मानता है कि उन्हें वर्ल्ड कप फाइनल में ही रिटायरमेंट का ऐलान कर देना चाहिए था।

उनका मानना है कि ऐसा करने पर सचिन अपने कद से न्याय कर पाते। यही बात क्रिकेट के कई जानकारों और पूर्व खिलाड़ियों ने भी कह डाली।

यह बात और है कि उनके धमाकेदार रिकॉर्ड के कारण ये दलीलें दबी जबान में दी गई। उनके डाई-हार्ड फैंस का कहना है कि सचिन के अलावा यह फैसला करने के अधिकार किसी और को नहीं कि उन्हें कब जाना है।
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लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वह कहते रहे कि जब उन्हें खुद लगेगा कि वह खेल नहीं पा रहे, तो खुद चले जाएंगे। आखिरकार ऐसा ही हुआ।

लेकिन सभी का मानना था कि रिटायर तब होना चाहिए, जब दुनिया कहे नहीं, मत जाओ। तब नहीं, जब दुनिया कहने लगे कि अब इसे चले जाना चाहिए।

लेकिन संन्यास के फैसले में जरा देरी के यह मायने कतई नहीं कि सचिन के जलवे में कोई कमी आ गई। वह महान थे, महान हैं और महान रहेंगे।

और हां, अब शायद फिरकी के जादुगर शेन वॉर्न भी चैन से सो सकेंगे। उन्हें रातों को ख्वाब में डराने वाला भगवान बल्ला टांग रहा है। अलविदा गॉड!
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