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क्रिकेट के मसीहा के बिना क्रिकेट का मतलब

Thu, 10 Oct 2013 07:12 PM IST
संजीव गर्ग/नई दिल्ली
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आखिर वो दिन आ ही गया जब क्रिकेट के मसीहा को क्रिकेट की दुनिया छोडऩे का फैसला करना पड़ा। यह फैसला सुनाते हुए उन्होंने कहा, मैंने क्रिकेट को जिया है। सोते-जागते, खाते-पीते क्रिकेट के बारे में ही सोचा है।
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क्रिकेट से अलग होने के बारे में सोचना भी मास्टर ब्लास्टर के लिए कितना मुश्किल हुआ होगा इसका अंदाजा खुद ब खुद लगाया जा सकता है।

जितना मुश्किल सचिन के लिए क्रिकेट से अलग होने का निर्णय लेना है, उससे ज्यादा मुश्किल उनके करोड़ों प्रशंसकों के लिए इस बात को पचाना होगा कि वाकई रिकॉर्डों के बादशाह ने संन्यास का फैसला कर लिया है।

मास्टर ब्लास्टर के 200वें टेस्ट के बाद क्रिकेट के एक युग का अंत हो जाएगा। इसके बाद दुनिया भर के क्रिकेट स्टेडियमों में सचिन.... सचिन.... सचिन... का गूंज सुनाई नहीं देगी।
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जिस शख्स ने 24 सालों में भारत में क्रिकेट को धर्म में बदल दिया, जब वह अंतिम बार बल्ला हाथ में लिए मैदान में उतरेगा वह दिन ऐतिहासिक होगा।

जिस शख्स ने अकेले दम पर अरबों लोगों को क्रिकेट का दीवाना बना दिया, जब क्रिकेट के इस मसीहा को अंतिम बार मैदान पर खेलता देखेंगे, तो उनकी आंखों से यदि अश्रुधारा बह निकले तो अचंभित होने की जरूरत नहीं है।

पिछले 24 साल से दुनिया के गेंदबाजों के लिए खौफ बने सचिन से अब उन्हें कोई डर नहीं सताएगा। अब सचिन को लेकर क्रिकेट टीमें विशेष रणनीति नहीं बनाएंगी।

सचिन के टीम में रहते विरोधी टीमें सिर्फ और सिर्फ सचिन पर फोकस रहती थीं तो भारतीय टीम के अन्य खिलाड़ी फ्री होकर खेलते थे। सचिन की सबसे ज्यादा कमी खलेगी ड्रेसिंग रूम में।

जो शख्स पिछले 24 साल से ड्रेसिंग रूम की शोभा बढ़ा रहा था, उसके अचानक ड्रेसिंग रूम में न होने का अहसास तो उनके 200वें टेस्ट खेलने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन इतना जरूर है कि टीम के युवा खिलाड़ी उन्हें बहुत मिस करेंगे।

सचिन को भी गुस्सा आता है
यह करीब चार साल पहले की बात है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मोहाली में टेस्ट मैच खेला जा रहा था। इस टेस्ट में सचिन ने ब्रायन लारा के सबसे ज्यादा रन के रिकॉर्ड को ध्वस्त किया था।

स्क्रीन पर सचिन को ब्रायन से आगे निकलता हुए दिखाया गया था। इससे पहले काफी समय तक सचिन का बल्ला शांत था। लंबे समय के बाद उन्होंने एक शानदार पारी खेलते हुए लारा को पीछे छोड़ते हुए टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था।

करीब दस मिनट तक पूरा स्टेडियम तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंजता रहा था। स्टेडियम में मौजूद हर शख्स ने उन्हें स्टेंडिंग ओवेशन दिया था। स्टेडियम के चारों ओर आतिशबाजी हो रही थी। हो भी क्यों ने क्रिकेट के भगवान ने क्रिकेट की बुलंदियों को जो छू लिया था।

दिन का खेल खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सचिन आए। उस दिन सचिन जितने भावुक थे, उससे पहले मैंने उन्हें इतना भावुक होते हुए कभी नहीं देखा था।

उनकी आंखों में पहली बार आंसू देखे थे मैंने। उस समय भी क्रिकेट के इस भगवान के सामने उन्हीं सवालों की बौछारें थीं। हर पत्रकार यही जानना चाह रहा था कि आखिर कब तक सचिन क्रिकेट खेलने जारी रखेंगे।

उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहली बार मैंने उन्हें इस सवाल पर गुस्सा होते हुए देखा था। उन्होंने साफ कहा, 'मैं जब तक चाहूंगा खेलूंगा। आपको यह सवाल पूछने का कोई हक नहीं है कि मैं कब क्रिकेट से संन्यास ले रहा हूं। जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था तब भी मैंने किसी से पूछा नहीं था और जिस दिन रिटायरमेंट लूंगा उस दिन भी मुझे किसी से पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी।'

पहली बार सचिन इतने आक्रामक मूड में थे। बावजूद इसके सचिन ने किसी भी पत्रकार को नाराज नहीं किया। होटल पहुंचने के बाद भी टी.वी. चैनलों के एक-एक पत्रकार को उन्होंने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया।

इस तरह मनाया था पाकिस्तान के खिलाफ जीत का जश्न
क्रिकेटप्रेमियों ने सचिन को मैदान पर खेलते देखा है। लेकिन क्रिकेट की उपलब्धियों का जश्न भी वे अपने ही अंदाज में मनाते हैं। एक बार का किस्सा याद आता है। मैं करनेल सिंह स्टेडियम में रेलवे और दिल्ली के बीच रणजी मैच कवर कर रहा था। रेलवे टीम में संजय बांगर भी थे।

सचिन तेंदुलकर को लेकर ही कुछ चर्चा चल रही थी। बांगर ने सचिन के बारे में एक किस्सा सुनाया। यह 2003 विश्व कप की बात है। संजय बांगर खुद भी इस विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा थे।

दक्षिण अफ्रीका में खेला गया था यह विश्व कप। सेमीफाइनल में भारत और पाकिस्तान आमने-सामने थे। इस मैच में सचिन ने पाकिस्तानी गेंदबाजों की जमकर धुनाई करते हुए 98 रन की शानदार पारी खेली थी।

भारत ने यह मैच 6 विकेट से जीता था। शाम को सेंचुरियन के ही बुखारा रेस्टोरेंट में इस जीत का जश्न मनाने के लिए एक पार्टी रखी गई थी। इस पार्टी में मास्टर ब्लास्टर कुछ अलग ही मूड में थे।

आनन-फानन में सचिन ने एक सिगरेट सुलगाई और टीम के हर सदस्य से सिगरेट का एक कश लगाने के लिए जिद करने लगे। टीम में कुछ ऐसे सदस्य भी थे जो कि सिगरेट नहीं पीते थे।

लेकिन सचिन की जिद के आगे किसी की नहीं चली और सभी ने उस सिगरेट से एक-एक कश अवश्य लगाया। इस किस्से का जिक्र करना यहां इसलिए जरूरी था ताकी लोग जान सकें कि क्रिकेट का भगवान कोई भगवान नहीं है बल्कि वह भी एक इंसान है और क्रिकेट के हर क्षण को जीना चाहता है उसका जश्न मनाता चाहता है। क्रिकेट की ही उसकी दुनिया है। सोते-जागते, खाते-पीते हर समय वह सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट के बारे में ही सोचता है।
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