अनिल कुंबले और कपिल देव के बाद हरभजन सिंह तीसरे गेंदबाज हैं जिन्होंने भारत की तरफ से 100 टेस्ट मैच खेला है। 1998 में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान ही बंगलोर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैचों में डेब्यू करने वाले भज्जी अपना सौंवा टेस्ट भी ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ खेला। पहले टेस्ट में भज्जी को 29 ओवर में सिर्फ 2 विकेट मिले थे। भारत यह मैच 8 विकेट से हार गया था।
लगभग 15 साल बाद 400 विकेट से ज्यादा विकेट ले चुके भज्जी के पास अब 100 टेस्ट खेलने के अनुभव है। ऐसे में अगर वो अपने पहले टेस्ट के आस पास का प्रदर्शन भी नहीं कर पाते हैं तो यह उनके कैरियर के लिए बुरे संकेत हैं। भज्जी के साथ चेन्नई टेस्ट में अश्विन भी ऑफ स्पिनर की भूमिका में हैं। लगभग एक जैसी गेंदबाजी करते हुए अश्विन ने जिस पिच से एक पारी में 7 विकेट झटके वहीं भज्जी को केवल 1 विकेट मिला।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चेन्नई टेस्ट में कप्तान धोनी ने हरभजन को उतार कर शायद उनके 100 टेस्ट खेलने का ख्वाब ही पूरा किया है। क्योंकि हरभजन का प्रदर्शन जिस तरह पिछले मैचों में रहा है उसके बाद उनको मौका मिलना सिर्फ उनके कैरियर का हैप्पी एंडिंग करना ही है। इसमे कोई संदेह नहीं कि हरभजन कुंबले के भारत के दूसरे सबसे सफल स्पिनर हैं। बदलाव के दौर से गुजर रही टीम इंडिया से अगर इस सीरीज के बाद भज्जी का पत्ता कट जाए तो इसमे हैरानी नहीं होनी चाहिए!