भारत में क्रिकेट को लेकर दीवानगी कोई नई बात नहीं है, लेकिन अगर पिछले दो दशकों में किसी एक घटना ने भारतीय क्रिकेट की दिशा और दशा दोनों को सबसे ज्यादा बदला है, तो वह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) है। आज आईपीएल सिर्फ एक क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं, बल्कि खेल, मनोरंजन, प्रसारण, विज्ञापन और निवेश की दुनिया का एक ऐसा मॉडल है, जिसने क्रिकेट को पूरी तरह बदल दिया है। हर साल करोड़ों दर्शक टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसे देखते हैं, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी इसमें हिस्सा लेने के लिए अपनी राष्ट्रीय टीमों के कार्यक्रमों तक को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित करते हैं और इसके मीडिया अधिकार करोड़ों में बिकते हैं।
आईपीएल की यह सफलता अचानक नहीं आई। इसके पीछे एक लंबी कहानी है, जिसमें एक निजी क्रिकेट लीग की चुनौती, बीसीसीआई की रणनीति, कानूनी लड़ाइयां, विवाद, स्पॉट फिक्सिंग, टीमों का आना-जाना और लगातार बढ़ता कारोबार शामिल है। आईपीएल की कहानी को समझने के लिए हमें 2007 में लौटना होगा, जब भारतीय क्रिकेट के सामने पहली बार एक ऐसी चुनौती खड़ी हुई जिसने बीसीसीआई को अपने इतिहास का सबसे बड़ा दांव खेलने पर मजबूर कर दिया।
आईसीएल और उसमें शामिल होने वाले कप्तान
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आईसीएल: वह चुनौती जिसने आईपीएल की नींव रखी
शुरुआत 2007 से होती है जब 24 सितंबर को पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में पांच रन से जीत दर्ज कर अपना पहला टी20 विश्व कप का खिताब जीता था। हालांकि, इससे पहले ही देश में बैठे रसूखदारों ने फटाफट क्रिकेट की लोकप्रियता को भांप लिया था और एक नई लीग बनाने का विचार किया। इसी साल तीन अप्रैल को मीडिया समूह एसेल ग्रुप ने इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) की घोषणा की, जिसकी औपचारिक शुरुआत 27 जुलाई 2007 को हुई। यह एक निजी क्रिकेट लीग थी, जिसे बीसीसीआई और आईसीसी की मान्यता प्राप्त नहीं थी। उस समय क्रिकेट की दुनिया पूरी तरह राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्डों के नियंत्रण में चलती थी और किसी निजी संगठन द्वारा इतनी बड़ी लीग शुरू करना अपने आप में एक साहसिक कदम माना गया।
आईसीएल ने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के खिलाड़ियों को जोड़ते हुए शहर आधारित टीमों का गठन किया। पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव इस लीग के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। लीग में कई पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को कोच, सलाहकार और प्रशासक के रूप में जोड़ा गया। आयोजकों का मानना था कि टी20 क्रिकेट के तेजी से बढ़ते आकर्षण को देखते हुए निजी क्षेत्र में भी एक सफल क्रिकेट लीग विकसित की जा सकती है।
बीसीसीआई सचिव ने दे डाली थी प्रतिबंध की धमकी
तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार (2005-2008) ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र पर सीधी चुनौती माना। यही वजह थी कि बीसीसीआई ने शुरुआत से ही आईसीएल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। आईसीएल में खेलने वाले खिलाड़ियों को आधिकारिक क्रिकेट से बाहर करने की चेतावनी दी गई। बीसीसीआई के तत्कालीन सचिव निरंजन शाह ने यहां तक कह दिया था कि जो भी खिलाड़ी आईसीएल में हिस्सा लेंगे उन पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। उन्होंने कहा था, 'हमारा रुख एकदम साफ़ है। जो खिलाड़ी आईसीएल में हिस्सा लेंगे, वे फिर कभी देश के लिए खेलने के योग्य नहीं होंगे। अब यह खिलाड़ियों को ही तय करना है कि वे क्या करना चाहते हैं।' उन्होंने कहा था जो खिलाड़ी अभी तक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेले हैं, और आईसीएल में भाग लेते हैं उन पर भी यह प्रतिबंध लागू होगा।
इसके बाद कई खिलाड़ियों के करियर पर संकट खड़ा हो गया। कपिल देव को राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया और राज्य क्रिकेट संघों को भी आईसीएल से दूरी बनाए रखने के संकेत दिए गए ईएसपीएनक्रिकइन्फो की रिपोर्ट के अनुसार कपिल देव आईसीएल के कार्यकारी बोर्ड में चेयरमैन के तौर पर शामिल हुए थे। इस मामले में उन्हें बीसीसीआई की ओर से एक पत्र भेजा गया था जिसके जवाब में उन्होंने कहा, 'मैंने उन्हें अपना जवाब पहले ही भेज दिया है। अगर वे चाहें तो मुझे एनसीए से हटा सकते हैं। वे बस यही चाहते थे कि मैं क्रिकेट के खेल में अपना योगदान दूं, और जब मैं ऐसा कर रहा हूं, तो वे मुझे चुनौती नहीं दे सकते। अगर मैं 'इंडियन क्रिकेट लीग' के जरिए इस खेल और युवा क्रिकेटरों के लिए कुछ कर सकता हूं, तो मैं अपनी जगह से टस से मस नहीं होऊंगा।'
शेन बॉन्ड ने लगाए बीसीसीआई पर दबाव के आरोप
न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज शेन बॉन्ड भी आईसीएल में शामिल हुए थे। ईएसपीएन के अनुसार, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्डों पर आरोप लगाया था कि वे भारतीय क्रिकेट बोर्ड के दबाव में आकर उन खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं, जो इस लीग (आईसीएल) में शामिल होते हैं।
बीसीसीआई
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अदालत तक पहुंची लड़ाई
आईसीएल और बीसीसीआई के बीच टकराव जल्द ही कानूनी लड़ाई में बदल गया। आईसीएल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि बीसीसीआई खिलाड़ियों और क्रिकेट संघों पर दबाव बना रहा है तथा लीग के संचालन में बाधाएं पैदा कर रहा है। दूसरी ओर बीसीसीआई का तर्क था कि आईसीएल आधिकारिक क्रिकेट ढांचे का हिस्सा नहीं है और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय क्रिकेट व्यवस्था से अलग नहीं होने दिया जा सकता। इस विवाद ने भारतीय क्रिकेट में पहली बार यह सवाल खड़ा किया कि खेल पर नियंत्रण किसका होना चाहिए, राष्ट्रीय बोर्ड का या बाजार की ताकतों का। हालांकि कानूनी लड़ाई चलती रही, लेकिन वास्तविकता यह थी कि बीसीसीआई आर्थिक और प्रशासनिक रूप से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में था।
टी20 विश्व कप 2007
- फोटो : BCCI-X
टी20 विश्व कप ने बदल दी तस्वीर
साल 2007 में दक्षिण अफ्रीका में पहला आईसीसी टी20 विश्व कप खेला गया। भारतीय टीम युवा थी और बहुत कम लोगों को उम्मीद थी कि वह टूर्नामेंट जीत पाएगी। लेकिन महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने खिताब जीता। इस जीत ने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी। अचानक टी20 क्रिकेट देश में सबसे लोकप्रिय प्रारूप बन गया। स्टेडियम भरने लगे, टीवी दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और क्रिकेट को एक नए मनोरंजन उत्पाद के रूप में देखा जाने लगा। उधर आईसीएल अपने पैर पसार रहा था। बीसीसीआई ने भी बहुत जल्दी समझ लिया कि टी20 क्रिकेट का व्यावसायिक भविष्य बेहद बड़ा है। यही वह लम्हा था जिसने आईपीएल के जन्म का रास्ता तैयार किया।
आईपीएल-ललित मोदी
- फोटो : IPL/BCCI/Lalit Modi-x
आईपीएल का एलान और ललित मोदी का विजन
बीसीसीआई ने 13 सितंबर 2007 को इंडियन प्रीमियर लीग की घोषणा कर दी। इस परियोजना के सबसे प्रमुख चेहरे तत्कालीन बीसीसीआई उपाध्यक्ष ललित मोदी थे। उन्होंने अमेरिकी खेल लीगों के फ्रेंचाइजी मॉडल को भारतीय क्रिकेट में लागू करने का प्रस्ताव रखा। शहर आधारित टीमें बनाई जानी थीं, खिलाड़ियों की नीलामी होनी थी, निजी निवेशकों को फ्रेंचाइजी अधिकार दिए जाने थे और दुनिया भर के स्टार खिलाड़ियों को एक मंच पर लाया जाना था। उस समय बहुत से लोगों को यह प्रयोग जोखिम भरा लगा। लेकिन बीसीसीआई को विश्वास था कि भारतीय बाजार, क्रिकेट की लोकप्रियता और टी20 प्रारूप का आकर्षण मिलकर इसे सफल बना सकते हैं।
एड गुरू पीयूष पांडे
- फोटो : X(@nsitharaman)
पीयूष पांडे की मार्केटिंग स्ट्रैटजी
आईपीएल की शुरुआती पहचान सिर्फ क्रिकेट लीग के तौर पर नहीं, बल्कि एक बड़े मनोरंजन उत्सव के रूप में गढ़ी गई थी। इसकी ब्रांडिंग के पीछे मशहूर विज्ञापन विशेषज्ञ पीयूष पांडे की अहम भूमिका मानी जाती है। आईपीएल के पहले मार्केटिंग कैंपेन की रूपरेखा तैयार करते समय उन्होंने एक लाइन दी थी 'Carnival outside the boundary, pure cricket inside' यानी 'मैदान के बाहर कार्निवल जैसा माहौल, मैदान के अंदर शुद्ध क्रिकेट।' इस सोच के पीछे विचार यह था कि आईपीएल को सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक ऐसे उत्सव के रूप में पेश किया जाए जहां संगीत, रोशनी, मनोरंजन, सेलिब्रिटी और दर्शकों का जोश एक मेले जैसा अनुभव दें, लेकिन मैदान के भीतर क्रिकेट की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा से कोई समझौता न हो। यही वजह रही कि आईपीएल ने शुरुआत से ही खेल और मनोरंजन का ऐसा मिश्रण पेश किया, जिसने इसे पारंपरिक क्रिकेट टूर्नामेंटों से अलग पहचान दी।
जूही चावला-शाहरुख खान
- फोटो : Twitter
आईपीएल का बॉलीवुड कनेक्शन
आईपीएल को सिर्फ क्रिकेट लीग नहीं, बल्कि एक बड़े मनोरंजन ब्रांड के रूप में स्थापित करने में बॉलीवुड की भूमिका भी बेहद अहम मानी जाती है। लीग की शुरुआत के समय बीसीसीआई और आयोजकों को समझ आ गया था कि अगर क्रिकेट को फिल्मी ग्लैमर और सेलिब्रिटी कल्चर के साथ जोड़ा जाए तो इसकी पहुंच पारंपरिक खेल दर्शकों से कहीं आगे जा सकती है। यही वजह रही कि शाहरुख खान ने जूही चावला और जय मेहता के साथ मिलकर कोलकाता नाइट राइडर्स में निवेश किया, जबकि प्रीति जिंटा पंजाब फ्रेंचाइजी का चेहरा बनीं। बाद में शिल्पा शेट्टी भी राजस्थान रॉयल्स से जुड़ीं। इन सितारों की मौजूदगी ने इस लीग को सिर्फ खेल प्रतियोगिता नहीं रहने दिया, बल्कि इसे एक ऐसे स्पोर्ट्स-एंटरटेनमेंट शो में बदल दिया जिसमें मैच के साथ-साथ ग्लैमर, सेलिब्रिटी संस्कृति और फैन कनेक्शन भी शामिल था।
(फोटो: शाहरुख और प्रीति जिंटा)
आईपीएल नीलामी
- फोटो : IPL
पहली फ्रेंचाइजी नीलामी और करोड़ों की बारिश
24 जनवरी 2008 को आईपीएल फ्रेंचाइजियों की नीलामी हुई। आठ टीमों के अधिकार बेचे गए और उम्मीद से कहीं अधिक बोली लगी। मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स, राजस्थान रॉयल्स, दिल्ली डेयरडेविल्स, किंग्स इलेवन पंजाब, डेक्कन चार्जर्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (पहले- रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर) पहली आठ फ्रेंचाइजी बनीं। फ्रेंचाइजी बिक्री से बीसीसीआई को लगभग 724 मिलियन डॉलर की राशि प्राप्त हुई। उस समय यह आंकड़ा खेल जगत में चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद खिलाड़ियों की नीलामी हुई। पहली बार क्रिकेटरों की खुली बोली लग रही थी। महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह, एंड्रयू फ्लिंटॉफ, जैक्स कैलिस, एडम गिलक्रिस्ट और शेन वॉर्न जैसे बड़े नाम फ्रेंचाइजियों के साथ जुड़े। क्रिकेट का आर्थिक मॉडल तेजी से बदल रहा था।
आईपीएल की मौजूदा टीमें...
| टीम |
घरेलू मैदान |
डेब्यू |
मालिक |
| चेन्नई सुपर किंग्स |
एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम, हैदराबाद |
2008 |
चेन्नई सुपर किंग्स क्रिकेट लिमिटेड |
| दिल्ली कैपिटल्स |
अरुण जेटली स्टेडियम, दिल्ली |
2008 |
GMR ग्रुप (50%), JSW ग्रुप (50%) |
| गुजरात टाइटंस |
नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद |
2022 |
टोरेंट ग्रुप (67%), CVC कैपिटल (33%) |
| कोलकाता नाइट राइडर्स |
ईडन गार्डन्स, कोलकाता |
2008 |
शाहरुख खान (55%), मेहता ग्रुप (45%) |
| लखनऊ सुपर जाएंट्स |
भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी एकाना स्टेडियम, लखनऊ |
2022 |
आरपी-संजीव गोयनका ग्रुप |
| मुंबई इंडियंस |
वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई |
2008 |
रिलायंस इंडस्ट्रीज |
| पंजाब किंग्स |
महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम, मुल्लांपुर |
2008 |
मोहित बर्मन (48%), नेस वाडिया (23%), प्रीति जिंटा (23%), करण पॉल (6%) |
| राजस्थान रॉयल्स |
सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर |
2008 |
लक्ष्मी मित्तल (75%), अदार पूनावाला (18%), मनोज बादाले (7%) |
| रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु |
एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम, बंगलूरू |
2008 |
आदित्य बिड़ला ग्रुप, द टाइम्स ग्रुप, ब्लैकस्टोन इंक., बोल्ट वेंचर्स |
| सनराइजर्स हैदराबाद |
राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, उप्पल |
2013 |
सन टीवी नेटवर्क |
आईपीएल की वो टीमें जो खत्म हो चुकी हैं...
| टीम |
घरेलू मैदान |
डेब्यू |
समाप्ति वर्ष |
मालिक |
| डेक्कन चार्जर्स |
राजीव गांधी स्टेडियम |
2008 |
2012 |
डेक्कन क्रॉनिकल |
| कोच्चि टस्कर्स केरल |
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम |
2011 |
2012 |
रेंडेजवस स्पोर्ट्स वर्ल्ड |
| पुणे वॉरियर्स इंडिया |
एमसीए स्टेडियम |
2011 |
2013 |
सहारा इंडिया परिवार |
| राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स |
एमसीए स्टेडियम |
2016 |
2018 |
आरपी-संजीव गोयनका ग्रुप |
| गुजरात लायंस |
निरंजन शाह स्टेडियम |
2016 |
2018 |
इंटेक्स टेक्नोलॉजीज |
ब्रैंडन मैकुलम
- फोटो : Reuters Photo
पहला सीजन और ब्रेंडन मैकुलम का तूफान
18 अप्रैल 2008 को आईपीएल का पहला मैच खेला गया। केकेआर के बल्लेबाज ब्रेंडन मैकुलम ने आरसीबी के खिलाफ 158 रन की नाबाद पारी खेली। यह सिर्फ एक शानदार बल्लेबाजी प्रदर्शन नहीं था, बल्कि दुनिया के लिए एक संदेश था कि आईपीएल कुछ अलग करने आया है। पहले सीजन में दर्शकों का जबरदस्त समर्थन मिला। टीवी रेटिंग्स उम्मीद से कहीं ज्यादा रहीं और विज्ञापनदाताओं ने लीग में भारी निवेश किया। फाइनल में शेन वॉर्न की कप्तानी वाली राजस्थान रॉयल्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को हराकर पहला खिताब जीता। एक कमजोर मानी जा रही टीम का चैंपियन बनना आईपीएल की प्रतिस्पर्धात्मकता का पहला बड़ा उदाहरण था।
आईपीएल ट्रॉफी
- फोटो : IPL
आईसीएल का पतन और आईपीएल का उदय
आईपीएल की सफलता के साथ ही आईसीएल का भविष्य अंधकारमय होने लगा। खिलाड़ी धीरे-धीरे वापस लौटने लगे। 2009 में बीसीसीआई और अन्य क्रिकेट बोर्डों ने आईसीएल से जुड़े खिलाड़ियों को माफी देने की घोषणा की, बशर्ते वे लीग से अपने संबंध समाप्त कर लें। इस फैसले के बाद आईसीएल का खिलाड़ी आधार तेजी से कमजोर हो गया। आर्थिक समस्याएं भी बढ़ने लगीं। अंततः 2009 में आईसीएल का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया। जिस लीग ने बीसीसीआई को चुनौती दी थी, वही लीग अप्रत्यक्ष रूप से आईपीएल की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई।
विस्तार का दौर और नई टीमों की एंट्री
आईपीएल की लोकप्रियता बढ़ने के साथ बीसीसीआई ने इसका विस्तार करने का फैसला किया। 2011 में पुणे वॉरियर्स इंडिया और कोच्चि टस्कर्स केरल को शामिल किया गया। हालांकि कोच्चि टस्कर्स केवल एक सीजन तक ही लीग में रह सकी। बैंक गारंटी से जुड़े विवादों के कारण फ्रेंचाइजी का करार समाप्त कर दिया गया। इसके बाद 2012 में डेक्कन चार्जर्स की फ्रेंचाइजी भी खत्म हो गई। बीसीसीआई नए मालिक तलाशने में सफल नहीं हुआ और बाद में सन टीवी नेटवर्क ने नई हैदराबाद फ्रेंचाइजी खरीदी, जिसे सनराइजर्स हैदराबाद नाम दिया गया। पुणे वॉरियर्स इंडिया भी वित्तीय विवादों के कारण 2013 में लीग से बाहर हो गई। इन घटनाओं ने दिखाया कि आईपीएल का व्यावसायिक मॉडल जितना आकर्षक था, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी था।
एस. श्रीसंत
- फोटो : इ्ंस्टाग्राम
स्पॉट फिक्सिंग का सबसे बड़ा संकट
2013 में आईपीएल को अपने इतिहास के सबसे बड़े विवाद का सामना करना पड़ा। राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ी एस. श्रीसंत, अंकित चव्हाण और अजीत चंदीला स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में गिरफ्तार किए गए। जांच आगे बढ़ी तो सट्टेबाजी और अवैध गतिविधियों के आरोप कई प्रभावशाली नामों तक पहुंच गए। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और बाद में लोढ़ा समिति का गठन किया गया। समिति की सिफारिशों के आधार पर 2015 में चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स को दो साल के लिए निलंबित कर दिया गया। यह आईपीएल की विश्वसनीयता के लिए बड़ा झटका था। लेकिन लीग ने इस संकट से भी खुद को बाहर निकाल लिया।
महेंद्र सिंह धोनी
- फोटो : ANI
अस्थायी टीमें और फिर वापसी
चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के निलंबन के बाद 2016 और 2017 में गुजरात लायंस और राइजिंग पुणे सुपरजायंट को शामिल किया गया। इन टीमों ने केवल दो सीजन खेले। 2018 में प्रतिबंध समाप्त होने के बाद चेन्नई और राजस्थान की वापसी हुई। दिलचस्प बात यह रही कि वापसी के पहले ही सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स ने खिताब जीत लिया।
रोहित शर्मा (आईपीएल 2020)
- फोटो : BCCI/PTI
कोरोना महामारी और यूएई में आईपीएल
2020 में कोविड-19 महामारी के कारण दुनिया भर के खेल आयोजन प्रभावित हुए। भारत में टूर्नामेंट आयोजित करना संभव नहीं था, इसलिए पूरा आईपीएल संयुक्त अरब अमीरात में कराया गया। खाली स्टेडियमों में खेले गए मैचों के बावजूद दर्शकों की दिलचस्पी बनी रही। डिजिटल व्यूअरशिप में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई। इससे साबित हुआ कि आईपीएल केवल स्टेडियम आधारित उत्पाद नहीं, बल्कि एक विशाल प्रसारण संपत्ति बन चुका है।
लखनऊ और गुजरात
- फोटो : ANI
2022 में फिर हुआ विस्तार
2021 में बीसीसीआई ने दो नई फ्रेंचाइजियों की घोषणा की। अक्तूबर में हुई बोली प्रक्रिया में आरपीएसजी समूह और सीवीसी कैपिटल्स ने नई टीमों के अधिकार खरीदे। बाद में इन टीमों को लखनऊ सुपर जाएंट्स और गुजरात टाइटंस नाम दिया गया। 2022 से आईपीएल 10 टीमों का टूर्नामेंट बन गया। गुजरात टाइटंस ने अपने पहले ही सीजन में खिताब जीतकर इतिहास रच दिया।
आईपीएल के नियमों में लगातार बदलाव
समय के साथ आईपीएल केवल खिलाड़ियों और टीमों की लीग नहीं रही, बल्कि क्रिकेट नियमों के प्रयोग का मंच भी बनी। रणनीतिक टाइमआउट, डीआरएस का व्यापक उपयोग, वाइड और नो-बॉल की समीक्षा, इम्पैक्ट प्लेयर नियम और एक ओवर में दो बाउंसर की अनुमति जैसे कई बदलाव पहले आईपीएल में दिखाई दिए। इन नियमों ने खेल को और अधिक रणनीतिक तथा दर्शक-उन्मुख बनाने में भूमिका निभाई।
आईपीएल नीलामी
- फोटो : IPL/BCCI
नीलामी का अनोखा मॉडल
आईपीएल की सबसे खास पहचान उसकी खिलाड़ी नीलामी है। हर टीम को सीमित बजट दिया जाता है और उसी के भीतर खिलाड़ियों को खरीदना होता है। हर तीन साल में होने वाली मेगा नीलामी के कारण टीमों को अपने अधिकांश खिलाड़ियों को रिलीज करना पड़ता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को संतुलित बनाए रखना है, ताकि कुछ चुनिंदा टीमें हमेशा मजबूत न बनी रहें।
टाइटल स्पॉन्सर का सफर
आईपीएल के शुरुआती वर्षों में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ टाइटल स्पॉन्सर थी। बाद में पेप्सिको ने अधिकार खरीदे। इसके बाद वीवो ने रिकॉर्ड बोली लगाकर प्रायोजन हासिल किया। भारत-चीन तनाव और कोविड-19 महामारी के दौरान वीवो पीछे हट गया और ड्रीम11 को अस्थायी रूप से अधिकार मिले। बाद में टाटा समूह ने टाइटल स्पॉन्सरशिप संभाली और आज भी वही लीग का शीर्ष प्रायोजक है।
आईपीएल के टाइटल स्पॉन्सर और स्पॉन्सरशिप फीस
| टाइटल स्पॉन्सर |
अवधि |
अनुमानित वार्षिक स्पॉन्सरशिप फीस |
| DLF |
2008-2012 |
₹40 करोड़ (लगभग 9 मिलियन अमेरिकी डॉलर) |
| Pepsi |
2013-2015 |
₹79 करोड़ (लगभग 13 मिलियन अमेरिकी डॉलर) |
| Vivo |
2016-2017 |
₹100 करोड़ (लगभग 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर) |
| Vivo |
2018-2019, 2021 |
₹440 करोड़ (लगभग 64 मिलियन अमेरिकी डॉलर) |
| Dream11 |
2020 |
₹222 करोड़ (लगभग 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर) |
| Tata |
2022-2023 |
₹335 करोड़ (लगभग 43 मिलियन अमेरिकी डॉलर) |
| Tata |
2024-2028 |
₹500 करोड़ (लगभग 52 मिलियन अमेरिकी डॉलर) |
दुनिया की सबसे मूल्यवान क्रिकेट लीग
वर्ष 2016 में आईपीएल की ब्रांड वैल्यू लगभग 4.2 अरब डॉलर आंकी गई थी। कुछ ही वर्षों में यह तेजी से बढ़ती गई। 2022 तक लीग का मूल्यांकन 11 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया। इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान क्रिकेट लीग और खेल उद्योग की सबसे सफल संपत्तियों में से एक माना जाने लगा।
महिला प्रीमियर लीग की विजेता टीमें
- फोटो : WPL-X
महिला क्रिकेट तक पहुंचा आईपीएल मॉडल
आईपीएल की सफलता ने महिला क्रिकेट के लिए भी नया रास्ता खोला। 2022 में महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) की घोषणा की गई और 2023 में इसका पहला सीजन खेला गया। महिला क्रिकेट में निवेश और व्यावसायिक अवसरों के लिहाज से यह एक ऐतिहासिक कदम माना गया।
फ्रेंचाइजी अब वैश्विक ब्रांड बन चुकी हैं
आज आईपीएल की कई फ्रेंचाइजियां केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। मुंबई इंडियंस, दिल्ली कैपिटल्स, सनराइजर्स हैदराबाद और अन्य टीम मालिकों ने दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और कैरेबियन लीगों में भी निवेश किया है। इस तरह आईपीएल एक भारतीय टूर्नामेंट से आगे बढ़कर वैश्विक क्रिकेट फ्रेंचाइजी नेटवर्क का केंद्र बन चुका है।
आरसीबी चैंपियन
- फोटो : BCCI
19 सीजन बाद आईपीएल कहां खड़ा है?
2008 में शुरू हुई लीग 2026 तक 19 सीजन पूरे कर चुकी है। चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस पांच-पांच खिताबों के साथ सबसे सफल टीमें हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स तीन बार चैंपियन बनी है, जबकि और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने दो बार ट्रॉफी जीती है। वहीं, राजस्थान रॉयल्स, डेक्कन चार्जर्स, सनराइजर्स हैदराबाद और गुजरात टाइटंस ने एक-एक बार खिताब जीता है। रविवार (31 मई) को आरसीबी एक बार फिर चैंपियन बनी, उसने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में गुजरात टाइटंस को हराकर आईपीएल 2026 का खिताब जीता।