आज नहीं तो कल विराट कोहली के इस प्रयोग पर सवाल उठेंगे ही उठेंगे कि उन्होंने अपना बल्लेबाजी क्रम क्यों बदला? ये बात सौ फीसदी सच है कि विराट कोहली ने बड़ा दिल दिखाते हुए ये फैसला टीम के हित में किया क्योंकि नंबर चार पर आकर वो शिखर धवन, रोहित शर्मा और केएल राहुल तीनों को प्लेइंग 11 में जगह दे सकते हैं। उन्होंने मुंबई वनडे में ऐसा किया भी। 28.5 ओवर में 140 रन पर तीन विकेट के बाद भी भारतीय टीम स्कोरबोर्ड पर 255 रन ही जोड़ पाई।
विराट कोहली के आउट होने के बाद पूरी टीम ने सिर्फ 99 रन जोड़े। हो सकता है कि आने वाले मैचों में से कुछ में तीन सलामी बल्लेबाजों को खिलाने या विराट कोहली के नंबर चार पर खेलने की ‘थ्योरी’ चल भी जाए लेकिन लंबे समय तक ये व्यवस्था नहीं चलने वाली क्योंकि इससे पूरी टीम का संतुलन बदलता है। वन-डे करियर के कुल 43 में से 36 यानी 80 फीसदी से ज्यादा शतक नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने वाले विराट कोहली को अगर नंबर चार पर खेलना पड़े तो इस फैसले को कैसे सही ठहराया जाएगा?
अगर विराट कोहली को ही नंबर चार पर खेलना था तो ये फैसला कुछ साल पहले कर लेना चाहिए था। आदर्श स्थिति में 2019 विश्व कप से पहले क्योंकि इसी जगह को लेकर भारतीय टीम ने दर्जनों प्रयोग किए थे जो सारे के सारे 2019 विश्व कप में नाकाम रहे। नतीजा अच्छे प्रदर्शन के बाद भी भारतीय टीम को सेमीफ़ाइनल से हारकर बाहर होना पड़ा। अब चर्चा विकल्प पर होनी चाहिए।
इस विकल्प को अच्छी तरह आज़माने में कोई हर्ज नहीं है। ये विकल्प है केएल राहुल को नंबर चार पर बल्लेबाजी के साथ साथ विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी देना। पहले वन-डे में वो पंत की जगह कीपिंग करते दिखे भी थे। ये प्रयोग 2003 विश्व कप में सौरव गांगुली ने राहुल द्रविड़ के साथ किया था। उन्हें पता था कि दक्षिण अफ्रीका की पिचों पर द्रविड़ जैसा धैर्यवान बल्लेबाज चाहिए होगा लेकिन वो द्रविड़ की स्ट्राइक रेट को भी समझते थे। लिहाजा उन्होंने द्रविड़ को दोहरी जिम्मेदारी सौंपी।
द्रविड़ के पास उस दोहरी जिम्मेदारी के लिए ‘हां' करने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं था क्योंकि सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर वो सौरव की वन-डे टीम में नहीं आ सकते थे। अब केएल राहुल की स्थिति भी कुछ कुछ ऐसी ही है। वो कीपिंग के साथ साथ नंबर चार पर बल्लेबाजी कर सकते हैं। उनमें प्रतिभा है। उन पर कप्तान को भरोसा है। यानी इस दोहरे रोल में फिट बैठने के लिए उन्हें जो अतिरिक्त समय चाहिये वो उन्हें दिया जा सकता है।
खबर है कि इस बारे में टीम मैनेजमेंट में चर्चा शुरू हो भी चुकी है। उनके विकेटकीपर का मोर्चा संभालते ही ऋषभ पंत की जगह बचेगी। जिनके बारे में लंबे समय से बस यही सुनने को मिला है कि वो भारतीय क्रिकेट का भविष्य हैं, अफसोस ऐसा देखने को नहीं मिला।
एक दूसरा विकल्प ये है कि कप्तान विराट कोहली अब शिखर धवन के मुकाबले केएल राहुल को तरजीह दें। क्योंकि जगह 11 खिलाड़ियों की ही है और उन्हें मिलाकर एक संतुलित टीम बनानी होगी। वरना 2020 टी-20 विश्व कप भी असंतुलित टीम के साथ नहीं जीता जा सकता है।
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