आपको याद तो होगा वर्ल्ड कप 2011 का क्वार्टर फाइनल का वह मैच जब ऑस्ट्रेलिया के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया का शीर्ष क्रम बिखर गया था उस वक्त युवराज सिंह की बेहतरीन पारी ने टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया और ऑस्ट्रेलिया को बाहर का रास्ता दिखाया था। इस वर्ल्ड कप में भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया को ऐसी ही एक शानदार पारी की जरुरत थी। लेकिन युवराज की कमी कोई पूरी नहीं कर पाया।
वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने चयनकर्ताओं के सामने यंग ब्रिगेड की सिफारिश की थी। जिसके चलते युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर जैसे धुरंधरों को टीम में जगह नहीं मिल पाई। उनके स्थान पर चोटिल रविंद्र जडेजा और अक्षर पटेल को टीम में जगह दी गई। धोनी की जिद थी कि युवा खिलाड़ी ही टीम को जीत दिला सकते है। लेकिन शायद वह भूल गए कि प्रेशर में टीम की नैय्या पार लगाने वाले युवराज की जगह कौन लेगा?
टीम में युवराज की कमी पूरी करने के लिए धोनी ने जडेजा और सुरेश रैना को तैयार किया। हांलाकि रैना वर्ल्ड कप में अच्छा खेले लेकिन ऐन मौके पर फुस्स हो गए। वहीं दूसरी ओर टीम में ऑलराउंडर की भूमिका के तौर पर शामिल हुए जडेजा किसी भी मैच में युवराज नहीं बन सके। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करो या मरो के मैच में वह गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में फेल हो गए।
याद कीजिए वर्ल्ड कप 2011 में युवराज की वह नाबाद परफॉर्मेंस जिसके बूते टीम इंडिया ने चार बार विश्व विजेता रही ऑस्ट्रेलियाई टीम के जीत के तिलिस्म को तोड़कर इतिहास रचा।