प्रेस कॉन्फ्रेंस में विराट कोहली
- फोटो : ट्विटर
दरअसल, अपने घर में चार साल बाद मिली हार के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली और रविचंद्रन अश्विन पहले टेस्ट में इस्तेमाल की गई एसजी गेंदों की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं हैं। भारतीय गेंदबाजों ने मैच के दौरान भी गेंद की हालत देख इसे बदलने का अनुरोध किया था, जिसे मैदानी अंपायर नितिन मेनन और अनिल चौधरी ने दरकिनार कर दिया था। विराट दो साल पहले भी खुलकर इन स्वदेशी एसजी गेंद की मुखालफत कर चुके हैं, उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में ड्यूक गेंद की वकालत की थी। भारतीय कप्तान की शिकायत के बाद एसजी ने अपनी गेंदों में तीन बदलाव किए थे।
- गेंद में होने वाले वैरिएशन को कम किया
- बॉल के अंदर के कॉर्क की कठोरता पर काम
- रंग को और गहरा किया गया, नई बॉल पहले से ज्यादा लाल
SG 1993 से भारत के प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए बॉल बना रही है। 1931 में पाकिस्तान के हिस्से वाले सियालकोट में इस कंपनी की शुरुआत हुई थी। बंटवारे के बाद परिवार हिंदुस्तान आ गया फिर मेरठ से ही कंपनी की दोबारा शुरुआत हुई। यह गेंदें हैंडमेड होती है। भारत अकेला देश है, जो इस गेंद का इस्तेमाल करता है। दूसरी गेंदों की अपेक्षा इसकी सिलाई सबसे बढ़िया होती है, लेकिन भारतीय परिस्थितियों में 10-20 ओवर तक ही इसमें स्विंग मिलती है और यह अपनी चमक खो देती है। इसकी सीम 80-90 ओवर्स तक ही रहती है, जिससे रिवर्स स्विंग करना आसान होता है व स्पिनर्स को ग्रिप बनाने में मदद मिलती है।
यह गेंदें इंग्लैंड में बनती है, इसका निर्माण भी हाथ से ही किया जाता है। इंग्लैंड के अलाावा इसका इस्तेमाल आयरलैंड और वेस्टइंडीज में भी होता है। इंटरनेशनल क्रिकेट शुरू होने से पहले ही ड्यूक कंपनी गेंद बना रही है। इस गेंद की सीम शानदार होती है और 50-55 ओवर तक यह बनी रहती है। यह तेज गेंदबाजों की सबसे सबसे ज्यादा मददगार गेंद है। इससे 20 से 30 ओवर बाद ही रिवर्स स्विंग मिलने लगती है। इस कंपनी के मौजूदा मालिक भारतीय मूल के दिलीप जजोदिया हैं।
इसकी सिलाई मशीन से होती है। यह गेंदें ऑस्ट्रेलिया में बनती है और इसका इस्तेमाल ऑस्ट्रेलिया के अलावा दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, जिंबाब्वे और न्यूजीलैंड में होता है। कूकाबुरा में लो सीम होती है और इसमें शुरुआती 20 ओवर्स में अच्छी स्विंग मिलती है, लेकिन इसके बाद यह बल्लेबाजों की मदद करती है। जब इसकी सिलाई उधड़ जाती है तो स्पिनर्स को ग्रिप करने में दिक्कत होती है। वन-डे और टी-20 में इस्तेमाल होने वाली सफेद बॉल सबसे पहले कुकाबूरा ने ही बनाया था।