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पटौदी ट्रॉफी: 2007 के बाद से कभी ओपनिंग और गेंदबाजी में इंग्लैंड से आगे नहीं निकला भारत, पर अब बदले आंकड़े

Wed, 25 Aug 2021 08:51 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्रा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लीड्स

सार

अगर इस टेस्ट में भारत जीत हासिल कर लेता है, तो 10 साल में पहली बार टीम अजेय बढ़त लेने में कामयाब हो जाएगा। वहीं, इंग्लैंड के पास सिर्फ सीरीज ड्रॉ कराने का मौका सीमित रहेगा।
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2007 से अब तक इंग्लैंड में भारत का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टेस्ट मैचों की सीरीज का तीसरा मैच बुधवार यानी आज (25 अगस्त) से लीड्स के हैडिंग्ले मैदान पर खेला जाना है। पिछले दो मैचों में भारत ने मजबूत प्रदर्शन दिखाते हुए इंग्लैंड पर बढ़त बनाई है। जहां दूसरे टेस्ट में भारत को आखिरी मौकों पर जीत मिली, वहीं पहले टेस्ट में बारिश के कारण टीम इंडिया की तय मानी जा रही जीत हाथ से फिसल गई। अब तीसरे टेस्ट में भी भारतीय टीम जीत की बड़ी दावेदार मानी जा रही है। अगर इस टेस्ट में भारत जीत हासिल कर लेता है, तो 10 साल में पहली बार टीम अजेय बढ़त लेने में कामयाब हो जाएगा। वहीं, इंग्लैंड के पास सिर्फ सीरीज ड्रॉ कराने का मौका सीमित रहेगा। इस रिपोर्ट में जानते हैं कि हर दौरे पर कैसा रहा इंग्लैंड में भारतीय टीम का प्रदर्शन?
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2007 में जीती थी सीरीज

ओपनिंग
टीम इंडिया ने इंग्लैंड में खेली जाने वाली पटौदी ट्रॉफी आखिरी बार 2007 में जीती थी। तब भारत ने इंग्लैंड को तीन टेस्ट्स की सीरीज में 1-0 से हराया था। दिनेश कार्तिक उस दौरान वसीम जाफर के साथ सलामी बल्लेबाजी की कमान संभाल रहे थे। दोनों ने पहले टेस्ट में पहली पारी में 18 और दूसरी पारी में 38 रन की साझेदारी की। वहीं, दूसरे टेस्ट में दोनों ने दो पारियों में 147 और 47 रन की साझेदारी की। तीसरे टेस्ट में दोनों के बीच 62 और 10 रन की साझेदारी हुई। यानी उस पूरी सीरीज में ओपनिंग साझेदारी का औसत 45.83 रहा था।

गेंदबाजी
इस सीरीज में भारत मुख्यतः तीन तेज गेंदबाजों और एक स्पिनर के साथ उतरा। तेज गेंदबाजी का जिम्मा जहीर खान, आरपी सिंह और एस श्रीसंत ने संभाला। वहीं स्पिन विभाग में अनिल कुंबले ने मोर्चा लिया। पार्टटाइम गेंदबाजों के रूप में सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर ने भी साथ दिया। इन गेंदबाजों ने उस सीरीज में 6 में से 5 पारियों में इंग्लैंड को ऑल आउट किया, वहीं एक पारी में छह विकेट लिए। इस दौरान गेंदबाजी औसत 32.98 रहा।

2011 में खराब रहा प्रदर्शन

ओपनिंग
इस साल भारतीय टीम की ओपनिंग जोड़ी चारों टेस्ट मैच में बदली। अभिनव मुकुंद, गौतम गंभीर, वीरेंद्र सहवाग के अलावा राहुल द्रविड़ भी ओपनिंग करने उतरे। जहां मुकुंद और गंभीर ने पहले टेस्ट की पारियों में 63 और 19 रन की साझेदारी की। वहीं दूसरे टेस्ट में अभिनव मुकुंद और राहुल द्रविड़ 0 और 6 रन की साझेदारी ही कर पाए। तीसरे टेस्ट में गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग ने दोनों पारियों में 8 और 3 रन की पार्टनरशिप की और चौथे टेस्ट में उतरी सहवाग-द्रविड़ की जोड़ी के बीच 8 और 49 रन की साझेदारी हुई। इस सीरीज में ओपनिंग का औसत 19.5 का रहा।

गेंदबाजी
इस सीरीज में भी तेज गेंदबाजी की कमान जहीर खान ने संभाली, उनके चोटिल होने के दौरान अलग-अलग मैचों में प्रवीण कुमार, इशांत शर्मा, आरपी सिंह और एस श्रीसंत भी टीम में रहे। इसके अलावा स्पिन गेंदबाजी में कभी हरभजन सिंह तो कभी अमित मिश्रा ने मोर्चा संभाला। इस दौरान चार टेस्ट में भारत सिर्फ दो बार ही इंग्लैंड को ऑलआउट कर सका। भारत का गेंदबाजी औसत भी इस सीरीज में 59.76 पर पहुंच गया। यानी टीम को लगभग हर 60 गेंदों पर विकेट मिल रहे थे।

2014 में दो बार मिली पारी से हार

ओपनिंग
टीम इंडिया ने चार टेस्ट की इस सीरीज में पहले मैच में मुरली विजय और शिखर धवन से शुरुआत की। दोनों ने पहली पारी में 33 और दूसरी पारी में 49 की साझेदारी की। वहीं दूसरे टेस्ट की दो पारियों में दोनों के बीच 11 और 40 रन की साझेदारी हुई। तीसरे टेस्ट में दोनों ने अलग-अलग पारियों में 17 और 26 रन की पार्टनरशिप की। चौथे टेस्ट में टीम के ओपनिंग जोड़े में बदलाव किया गया और शिखर धवन की जगह गौतम गंभीर को आजमाया गया। हालांकि, उनका और मुरली विजय का साथ ज्यादा नहीं चला और दोनों ने 8 और 26 रन की साझेदारियां कीं। पांचवें टेस्ट में भी इसी जोड़ी को आजमाया गया और ओपनिंग में एक बार फिर नाकामी हाथ लगी। दोनों ने पहली पारी में 3 और दूसरी पारी में 6 रन ही जोड़े। इसी तरह भारत की सलामी जोड़ी का औसत पूरी सीरीज में महज 21.9 का ही रहा।

गेंदबाजी
इस सीरीज में टीम इंडिया के गेंदबाजी डिपार्टमेंट में इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी, भुवनेश्वर कुमार, स्टुअर्ट बिन्नी, वरुण एरोन, पंकज सिंह, रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा शामिल रहे। पहले दो टेस्टों में गेंदबाजों का प्रदर्शन बेहतर रहा, जिसके चलते भारत 1-0 की बढ़त लेने में भी कामयाब हुआ। हालांकि, तीसरे, चौथे और पांचवें टेस्ट में बल्लेबाजों के बेहद खराब प्रदर्शन के चलते गेंदबाजी विभाग के पास ज्यादा मौके नहीं बचे और दो बार भारत को पारी से हार का सामना तक करना पड़ा। भारतीय टीम का गेंदबाजी औसत 44.41 रहा।

2018 में 4-1 से पिटी टीम इंडिया

ओपनिंग
पांच टेस्ट की इस सीरीज में भारत ने फिर मुरली विजय, शिखर धवन और केएल राहुल पर भरोसा जताया। पहले टेस्ट में विजय और धवन ने दो पारियों में 50 और 19 रन की साझेदारी की। दूसरे टेस्ट में विजय के साथ राहुल को मौका मिला, लेकिन दोनों के बीच दोनों ही पारियों में कोई साझेदारी नहीं हुई। इसके बाद टीम इंडिया ने तीसरे टेस्ट में शिखर धवन और केएल राहुल की जोड़ी को आजमाया और दोनों पारियों में 60 और 60 रन की साझेदारी के बाद भारत को इस मैच में जीत मिली। लेकिन चौथे टेस्ट में यह जोड़ी कुछ खास कमाल नहीं कर पाई और दो पारियों में 37 और 4 रन ही जोड़ पाई। पांचवें टेस्ट में भी हाल कुछ ऐसा ही रहा और दोनों के बीच महज 6 और 1 रन की साझेदारी हुई। नतीजतन भारत दोनों टेस्ट हार गया। इस सीरीज में भी भारत की ओपनिंग साझेदारी का औसत 23.7 ही रहा।

गेंदबाजी
भारत के लिए इस सीरीज में उमेश यादव के साथ इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और हार्दिक पांड्या तेज गेंदबाजी के लिए साथ आए। वहीं स्पिन में रविचंद्रन अश्विन के साथ कुलदीप यादव को आजमाया गया। भारत ने इस पूरी सीरीज में 10 में से 7 बार इंग्लैंड को ऑलआउट किया और टीम का गेंदबाजी औसत भी 2011 के मुकाबले आधे पर आ गया। इसके बावजूद बल्लेबाजों के खराब प्रदर्शन से टीम को 4-1 से हार का मुंह देखना पड़ा।
 
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2021 में रिकॉर्ड सुधारने का मौका

ओपनिंग
इस साल भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज काफी दिलचस्प साबित हुई है। अब तक दोनों टेस्ट्स में टीम इंडिया की तरफ से ओपनिंग करने रोहित शर्मा और केएल राहुल की जोड़ी आई है। जहां पहले टेस्ट की पहली पारी में दोनों के बीच 97 और दूसरी पारी में 34 रन की साझेदारी हुई, वहीं दूसरे टेस्ट की दो पारियों में दोनों ने 126 और 18 रन की साझेदारियां की हैं। यानी करीब 14 साल बाद भारत की सलामी जोड़ी ने इंग्लैंड में खेलते हुए फिर से 100+ रन की साझेदारी का करिश्मा दिखाया है। फिलहाल दो टेस्ट्स में इस जोड़ी का औसत 68.75 का रहा है।

गेंदबाजी
भारत ने इस बार दोनों मैचों में पांच गेदबाजों का इस्तेमाल किया है। पहले टेस्ट में जहां जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर और रविंद्र जडेजा को मोर्चे पर लगाया गया, वहीं दूसरे टेस्ट में ठाकुर के चोटिल होने के बाद उनकी जगह इशांत शर्मा को मौका मिला। भारतीय गेंदबाजी विभाग ने दोनों टेस्ट की चार पारियों में इंग्लैंड को ऑलआउट किया है। इस सीरीज में अब तक 24.92 का रहा है, जो कि इंग्लैंड में पिछली चार टेस्ट सीरीजों के मुकाबले सबसे बेहतर है।
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