सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़
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भारत और बांग्लादेश के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला ढाका में खेला जा रहा है। टीम इंडिया को जीत के लिए 145 रन का लक्ष्य मिला है। बांग्लादेशी गेंदबाजों के सामने भारतीय बल्लेबाजों के लिए यह लक्ष्य आसान नहीं होने वाला है। टीम इंडिया का प्रदर्शन चौथी पारी में कई बार खराब रहा है। एक बार तो 120 रन के लक्ष्य को टीम इंडिया हासिल नहीं कर पाई थी। तब बल्लेबाजी क्रम में सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज बल्लेबाज भी थे।
दरअसल, वह मुकाबला भारत और वेस्टइंडीज के बीच 1997 में खेला गया था। तब टीम इंडिया चार टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए वेस्टइंडीज के दौरे पर गई थी। सीरीज का तीसरा मुकाबला ब्रिजटाउन में खेला गया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज की टीम ने 298 रन बनाए थे। उसके लिए शिवनारायण चंद्रपॉल ने 137 रनों की शानदार पारी खेली थी। इसके बाद भारत ने पहली पारी में 319 रन बनाए थे। उसे 21 रनों की बढ़त हासिल हुई थी। सचिन ने 92 और द्रविड़ ने 78 रन बनाए थे।
कुरुविला और वेंकटेशन ने बरपाया था कहर
दूसरी पारी में भारतीय गेंदबाजों ने वेस्टइंडीज को 120 रनों पर ही समेट दिया था। दिग्गज बल्लेबाज ब्रायन लारा ने 45 रन बनाए थे। भारत के लिए अबे कुरुविला ने पांच और वेंकटेश प्रसाद ने तीन विकेट अपने नाम किए थे। टीम इंडिया को चौथी पारी में टेस्ट को जीतने के लिए 120 रनों का लक्ष्य मिला था। ऐसा लग रहा था कि भारत इस लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लेगा, लेकिन यह हुआ नहीं।
10 बल्लेबाज नहीं छू पाए थे दहाई का आंकड़ा
भारतीय टीम चौथी पारी में 81 रनों पर ही सिमट गई। टीम इंडिया के 10 बल्लेबाज तो दहाई के आंकड़े को भी नहीं छू पाए थे। वीवीएस लक्ष्मण ने सर्वाधिक 19 रन मिले थे। भारत को टेस्ट में एक शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। वेस्टइंडीज ने 38 रन से मैच को अपने नाम कर लिया था।
सचिन ने बताया था काला दिन
सचिन ने इस हार का जिक्र अपनी किताब में किया है। उन्होंने लिखा, ''31 मार्च 1997 का दिन भारत के क्रिकेट इतिहास का काला दिन था। उस हार को लेकर कोई दलील नहीं दी जा सकती। मैं किसी को भी उस हार का जिम्मेदार नहीं मानता। टीम का सदस्य और कप्तान होने के नाते मैं पूरी तरह से जिम्मेदार था। इस हार ने मुझे तोड़ दिया था। मैंने खुद को दो दिनों तक कमरे में बंद कर लिया था।''