ड्रेसिंग रूम में भारतीय खिलाड़ियों को संबोधित करते टी दिलीप
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भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए पूरी तरह तैयार है और तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। दोनों टीमों के बीच पहला टेस्ट मैच 22 नवंबर से पर्थ में खेला जाएगा। भारत ने इस मैच से पहले काफी अभ्यास किया और इंट्रा स्क्वाड मैच खेलकर तैयारियों को परखा। अब टीम के फील्डिंग कोच टी. दिलीप ने बताया है कि अभ्यास सत्र के दौरान किस चीज से खिलाड़ियों को मदद मिलती है।
दिलीप का कहना है कि वह ट्रेनिंग के शुरुआत में खिलाड़ियों का ग्रुप बनाते हैं और उनके बीच फील्डिंग की प्रतियोगिता कराना पसंद करते हैं। फील्डिगं कोच के अनुसार, इससे सही माहौल बनाने में मदद मिलती है। मालूम हो कि दिलीप नए मुख्य कोच गौतम गंभीर की टीम में एकमात्र पुराने सदस्य हैं जो पिछले कोच राहुल द्रविड़ के कार्यकाल के दौरान भी फील्डिंग कोच का जिम्मा संभाल रहे थे।
दिलीप का कहना है कि उन्हें उनके अनुभव से टीम को बेहतर करने में मदद मिली है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने एक्स पर एक वीडियो साझा किया जिसमें दिलीप ने मैच से पहले टीम की तैयारियों पर अपनी राय रखी। दिलीप ने कहा, अब तक मुझे टीम और वे किस तरह काम करते हैं इसका अंदाजा हो गया है। इसलिए मैं हमेशा शुरुआत में थोड़ी प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता देता हूं ताकि वार्म-अप के बाद वे ट्रेनिंस सत्र मौज-मस्ती, हंसी-मजाक और एक-दूसरे के साथ मिलकर शुरू कर सकें।
हाल ही में हुए एक प्रशिक्षण सत्र की बारीकियों को समझाते हुए दिलीप ने कहा कि उन्होंने गेंद को सीमा रेखा से वापस फेंकने पर काम किया। इस सत्र में भारतीय खिलाड़ियों को दो ग्रुप में विभाजित किया गया था। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि सभी लोग एक साथ मिलकर टीम ड्रिल करें, लेकिन साथ ही चाहते हैं कि वे मैच के लिए भी तैयार हों। यही कारण है कि आज की टीम ड्रिल आपसी तालमेल से अधिक संबंधित थी जहां सीमा रेखा पर खड़े क्षेत्ररक्षण को अंदर खड़े क्षेत्ररक्षक के पास गेंद फेंकनी थी इसलिए एक ऊंचे लंबे थ्रो के बजाय हम दो अच्छे सपाट थ्रो चाहते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि इसे अभ्यास में अपनाया जाए ताकि खिलाड़ियों को पता हो कि उन्हें अपने बाएं या दाएं ओर खड़ा होना है ताकि वे उचित स्थिति में रहें और गेंद वापस पहुंचाने में समय बर्बाद नहीं करें।