भारत के पूर्व कोच रवि शास्त्री चाहते है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) चयन मामले में इंग्लैंड की नीति अपनाए। इंग्लैंड ने चयन समिति को बर्खास्त कर दिया है। टीम चयन करने का अधिकार पूरी तरह कोच और कप्तान के पास है। शास्त्री ने भले ही इस नीति का समर्थन किया हो, लेकिन एशेज सीरीज में इंग्लैंड की हार के बाद से इस पर सवाल उठने लगे हैं।
रवि शास्त्री ने स्टार स्पोर्ट्स से कहा, “मुझे लगता है कि चयन प्रक्रिया में कोच और कप्तान को ज्यादा महत्व दिया जाए। इसे आधिकारिक रूप से अमल में लाया जाना चाहिए। जब कोच अनुभवी हो तो यह काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। मैं था, राहुल द्रविड़ हैं। कप्तान को भी बोलने का हक देना चाहिए।” शास्त्री ने 2019 वर्ल्ड कप के दौरान अंबाती रायुडू को बाहर किए जाने पर कहा कि वे टीम में दो विकेटकीपर को रखना चाहते थे।
रायुडू को तीसरे विकेटकीपर के चयन के लिए बाहर किया गया था। शास्त्री ने कहा कि महेंद्र सिंह धोनी के रहते हुए वे सिर्फ दो विकेटकीपर टीम में रखना चाहते थे। धोनी सभी मैचों में खेलने वाले थे। मौजूदा स्थिति को देखें तो चयन प्रक्रिया में कोच और कप्तान से सिर्फ इनपुट लिए जाते हैं। अंतिम निर्णय चयन समिति ही लेती है।
टीम प्रबंधन और चयन समिति के बीच हालिया तनातनी ने रवि शास्त्री को कुछ और सोचने पर मजबूर कर दिया है। टी20 वर्ल्ड कप के लिए हार्दिक पांड्या के चयन को लेकर टीम मैनेजमेंट और चयन समिति में विवाद हो गया था। चयन समिति के अध्यक्ष ने वादा किया था कि हार्दिक पांड्या गेंदबाजी करने के लिए उपलब्ध होंगे। हालांकि, पंड्या अनफिट दिखाई दे रहे थे। इसके अलावा खिलाड़ियों और चयन समिति के बीच संवाद की कमी को हाल ही में टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने खुद उजागर किया है।