भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम को शिकस्त झेलनी पड़ी। राहुल द्रविड़ के भारतीय टीम का कोच रहते हुए यह पिछले चार वनडे में दूसरी हार है। टीम ने पिछले साल श्रीलंका दौरे पर भी एक मैच गंवाया था। टीम इंडिया दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज को 2-1 से गंवा चुकी है। वहीं, न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों की घरेलू टेस्ट सीरीज में भी भारत ने सिर्फ 1-0 से जीत हासिल की थी, जबकि घरेलू कंडीशन का फायदा उठाते हुए टीम को 2-0 से जीतना चाहिए था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि टीम इंडिया से कमी कहां हो रही है।
धोनी की कही बात सच साबित हो रही
दरअसल, द्रविड़ की कोचिंग में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज को मिलाकर अब तक छह सीरीज खेली हैं। इसमें से तीन में टीम इंडिया को जीत मिली है। छह में से चार बार ही द्रविड़ सिर्फ एक कप्तान के साथ पूरी सीरीज खेल पाए हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों में दो कप्तानों ने टीम इंडिया की कमान संभाली थी। ऐसे में द्रविड़ को सही टीम संयोजन में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। महेंद्र सिंह धोनी ने काफी पहले कहा था कि स्प्लिट कैप्टेंसी टीम इंडिया के लिए कभी मददगार नहीं रही है। यह सच होता हुआ भी दिख रहा है।
पांच कप्तानों के साथ काम कर चुके कोच द्रविड़
भारतीय टीम का कोच रहते हुए द्रविड़ पिछले सात महीने में अलग-अलग फॉर्मेट में पांच कप्तानों के साथ काम कर चुके हैं। इसमें शिखर धवन, रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे, विराट कोहली और केएल राहुल शामिल हैं। इससे द्रविड़ को टीम बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल श्रीलंका के खिलाफ वनडे और टी-20 सीरीज में कप्तान शिखर धवन थे।
उस वक्त द्रविड़ अस्थायी कोच थे। इसमें वनडे सीरीज में टीम इंडिया ने जीत हासिल की, जबकि टी-20 सीरीज में 2-1 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टी-20 सीरीज से पहले उन्हें हेड कोच बनाया गया। टी-20 सीरीज में रोहित शर्मा कप्तान बने।
रोहित शर्मा तीनों टी-20 में कप्तान रहे
न्यूजीलैंड के खिलाफ तीनों मैचों में रोहित ही कप्तान रहे और द्रविड़ को टीम उनके ईर्दगिर्द ही बनानी पड़ी। ऐसे में टीम संयोजन में उन्हें दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। टीम इंडिया ने यह सीरीज 3-0 से अपने नाम की। इसके बाद कीवी टीम के खिलाफ पहले टेस्ट में अजिंक्य रहाणे और दूसरे टेस्ट में विराट कोहली कप्तान बने। पहला टेस्ट ड्रॉ रहा, जबकि दूसरे टेस्ट में भारतीय टीम ने जीत हासिल की।
राहुल कप्तान बने और टीम को हार का सामना करना पड़ा
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के पहले मैच में विराट कोहली ही कप्तान थे। ऐसे में द्रविड़ को टीम संयोजन में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। इसका फायदा टीम को हुआ और भारत ने सेंचुरियन में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। दूसरे टेस्ट में कप्तान विराट कोहली फिट नहीं थे और केएल राहुल को कप्तानी सौंपी गई, जो कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कप्तानी के मामले में पूरी तरह नए थे।
रोहित की जगह राहुल वनडे टीम के कप्तान बने
दूसरे टेस्ट में फिर से टीम प्लानिंग में अंतर आया और भारत को हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद कोहली एक बार फिर तीसरे टेस्ट में कप्तान बने। फिर से स्ट्रैट्जी चेंज हुई और भारत के हाथ से यह मैच भी निकल गया। वनडे सीरीज में कोहली को कप्तानी से हटाने के बाद रोहित को कप्तान बनाया गया था। उनका अनुभव टीम के काम आ सकता था, लेकिन सीरीज से ठीक पहले रोहित फिट नहीं हो पाए। ऐसे में केएल राहुल को ही कप्तान बनाया गया।
द्रविड़ को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है
टेस्ट सीरीज में मिली हार के बाद केएल राहुल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार भारतीय वनडे टीम की कप्तानी कर रहे थे। ऐसे में द्रविड़ को नए सिरे से टीम बनानी पड़ी। ऐसे में सात महीनों में कोच द्रविड़ ने पांच कप्तानों के साथ काम कर रिकॉर्ड बना दिया। अगर इसी तरह कप्तान बदलते रहे तो द्रविड़ को आगे भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
विराट बतौर कप्तान ज्यादातर मैच खेले
जब तक विराट कोहली कप्तान रहे, उन्होंने ज्यादातर मैचों में हिस्सा लिया। उनकी फिटनेस का हर कोई कायल था। टीम इंडिया ने कोहली के कप्तान और शास्त्री के कोच रहते ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों में जीत हासिल की। हालांकि, द्रविड़ को अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
रोहित के साथ लंबे समय से फिटनेस समस्या
कोहली अब तीनों फॉर्मेट की कप्तानी से हट गए हैं। वहीं, बीसीसीआई ने सीमित ओवर के क्रिकेट में रोहित को कप्तान तो बना दिया, लेकिन उनके साथ हमेशा फिटनेस की समस्या रही है। ऐसे में देखना होगा बीसीसीआई किसे नया कप्तान बनाती है। बहरहाल लगातार कप्तान बदलने से टीम प्लानिंग पर भी असर पड़ा है और कई अहम मौकों पर चूक देखने को मिली। ऐसे में बीसीसीआई को इस मसले पर जल्द से जल्द एक्शन लेने और द्रविड़ को एक कप्तान के अंदर टीम बनाने का मौका देने की जरूरत है।