भारत की महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शनिवार को टीम के लिए महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए मुख्य कोच अमोल मजूमदार को श्रेय दिया और स्वीकार किया कि इंग्लैंड पर रिकॉर्ड 347 रन की जीत में कोच की भूमिका अहम रही, क्योंकि उनके पास टेस्ट में कप्तानी करने के लिए अपेक्षित अनुभव की कमी थी। भारतीय महिला टीम को रनों के हिसाब से सबसे बड़ी टेस्ट जीत का विश्व रिकॉर्ड बनाने में ठीक सात सत्र लगे। यह टीम इंडिया की इंग्लैंड पर 39 टेस्ट मैचों में छठी जीत रही।
2014 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाली हरमनप्रीत ने पहली बार इस प्रारूप में भारत का नेतृत्व किया। हरमनप्रीत ने बड़ी जीत के बाद मीडिया से कहा, 'हमारे कोच ने हमारी बहुत मदद की। मेरे पास टेस्ट में टीम का नेतृत्व करने का कोई अनुभव नहीं था। मैं उनके (मजूमदार के) फैसलों पर भरोसा कर रही थी, चाहे वह पहली पारी में शुभा (सतीश) को वन-डाउन पर भेजना हो या गेंदबाजी में उन्होंने जो भी विचार दिए हों, जैसे कि पहले 40 मिनट आज महत्वपूर्ण थे, यह सभी विचार उनके थे। उन्होंने कहा था कि सुबह की परिस्थितियों का उपयोग करें।'
हरमनप्रीत ने कहा- उनके अनुभव ने वास्तव में हमारी मदद की और इससे मुझे यह तय करने का समय भी मिला कि टीम के लिए सबसे अच्छा क्या है।' उन्होंने कहा कि भारत अपनी सभी योजनाओं को लागू करने और अपनी फील्डिंग से सभी को चौंकाने में सक्षम है, जो मेजबान टीम के लिए निर्णायक साबित हुआ। कप्तान ने कहा कि वे अगले सप्ताह एक और एकमात्र टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया से भिड़ने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा- सबकुछ योजना के मुताबिक हुआ। हमें वह स्कोर मिला जो हम चाहते थे और गेंदबाजों ने अच्छा काम किया, मध्यम गति के गेंदबाज और स्पिनर दोनों को अपनी योजनाओं के बारे में पता था और उन्होंने उसके अनुसार प्रदर्शन किया। सबसे सकारात्मक बात हमारी फील्डिंग थी। खासकर लंबे फॉर्मेट में जब आपको (एक दिन में) 90 ओवर फील्डिंग करनी होती है तो ऊर्जा बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है। हम अपनी फील्डिंग से टोन सेट करने में कामयाब रहे।
उन्होंने कहा कि भारत ने गेंदबाजी और फील्डिंग योजना तैयार करने के लिए पहली पारी में अपने बल्लेबाजी अनुभव पर बहुत अधिक भरोसा किया, जिससे इंग्लैंड को दो पारियों में 136 और 131 रन पर आउट होना पड़ा। हरमनप्रीत ने कहा, 'हमारे पास टेस्ट क्रिकेट खेलने का इतना अनुभव नहीं है कि हम यह तय कर सकें कि किस तरह की फील्ड प्लेसमेंट कहां मदद कर सकती है। आप जितना अधिक बल्लेबाजी करेंगे, उतना ही आप समझ पाएंगे कि अपने गेंदबाजों के लिए कौन सी फील्ड लगानी है।'
उन्होंने कहा, 'इसका श्रेय गेंदबाजों को भी जाता है। उन्हें जैसा भी फील्ड सेट दिया गया उन्होंने उसी के अनुसार गेंदबाजी की। आपका काम तब आसान हो जाता है जब आपके गेंदबाज सही जगह पर गेंदबाजी कर सकते हैं।' हरमनप्रीत ने डेब्यू टेस्ट में ही अपनी पहली पारी में 69 रन की पारी खेलने वाली शुभा की तारीफ की और इसमें मजूमदार की भूमिका का एक बार फिर जिक्र किया। उन्होंने कहा- शुभा ने हमें बहुत अच्छी शुरुआत दी। यह हमारे कोच का निर्णय भी था। एनसीए में प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने उसे बल्लेबाजी करते और खेल को आगे ले जाते हुए देखा था।
हरमनप्रीत ने कहा- मजूमदार ने कहा कि अगर हम उसे वन-डाउन पर भेज सकते हैं तो वह हमें ठोस शुरुआत दे सकती है और शुभा ने वैसा ही किया जैसा हम उनसे उम्मीद कर रहे थे।' भारतीय कप्तान ने कहा कि अगले सप्ताह वानखेड़े स्टेडियम में 21-24 दिसंबर तक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट में भारतीय टीम के दृष्टिकोण में कोई बदलाव नहीं होगा।
कप्तान ने कहा, 'वानखेड़े का विकेट इस विकेट से थोड़ा अलग है। हमारे पास ट्रेनिंग के लिए दो से तीन दिन हैं और देखें कि पिच कैसी है और उसके अनुसार हम निर्णय ले सकते हैं। लेकिन हम उसी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ेंगे और जीतना चाहेंगे।' हरमनप्रीत ने गेंदबाजी कोच ट्रॉय कूली की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय गेंदबाजों को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की पुरुष टीम के पूर्व कोच पर काफी भरोसा है। हरमनप्रीत ने कहा- जब भी हमें उनके साथ काम करने का मौका मिलता है, वह हमें हमेशा प्रेरित करते हैं। खासकर गेंदबाजों को किस क्षेत्र में गेंदबाजी करनी है और उनकी लाइन और लेंथ के बारे में बताते हैं।
उन्होंने कहा- गेंदबाज भी उन पर और उनके फैसलों पर भरोसा करते हैं। वह उनके लिए जो भी फैसले ले रहे हैं, वे उन पर भरोसा कर रहे हैं और वह उनके लिए जो योजनाएं बना रहे हैं, उन्हें क्रियान्वित करने में सक्षम हैं। आपको एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जिस पर आप भरोसा कर सकें, खासकर एक कोच और वे उसके विचारों और योजनाओं पर भरोसा कर रहे हैं।