आपने कई बार मैच के दौरान बेहतरीन और खराब खेलने वाले बल्लेबाजों को गेंद को बाउंड्री पार पहुंचाते हुए देखा होगा। उस वक्त आप इसे शानदार बल्लेबाजी और खराब गेंदबाजी ही मानते है।
वर्ल्ड कप 2003 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच का फाइनल मैच याद कीजिए। उस मैच में कंगारू टीम के सलामी बल्लेबाज एडम गिलिक्रिस्ट ने ताबड़तोड़ छक्कों से टीम इंडिया के गेंदबाजों को बहुत परेशान किया था। उस मैच में टीम इंडिया की शर्मनाक हार हुई थी।
बाद में मीडिया में सवाल उठने पर आईसीसी की जांच में पता चला कि गिलिक्रिस्ट ने अपने दस्तानों में स्क्वैश लगाई थी। जिससे वह छक्के और चौकों की बारिश कर रहे थे। इसके बाद बल्लेबाजों का बल्ले के साथ छेड़छाड़ का सिलसिला शुरू हो हुआ। बल्ले की मोटाई और नाप के साथ छेड़छाड़ करने से बल्लेबाज को गेंद को बाउंड्री पार पहुंचाने में काफी मदद मिलने लगी है।
आईसीसी ने इस बात को माना है कि बल्ले की निर्धारित लंबाई और मोटाई के साथ छेड़छाड़ करने से बल्लेबाज को रन बनाने में फायदा होता है। इसलिए इन चीजों पर नकेल कसने के लिए वर्ल्ड कप से पहले कड़े कदम उठाए जाएंगे।