क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने 2004 में कुछ ऐसा किया था, जिसे आज भी याद किया जाता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि सचिन दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में से एक रहे हैं। हालांकि, उनके करियर में कई ऐसे मौके आए, जब उनका बल्ला शांत हो गया था और रन नहीं निकल रहे थे। ऐसे में सचिन ने एक ऐसा तरीका अपनाया, जिसका कायल खुद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) है।
आईसीसी ने 2004 में सिडनी में सचिन द्वारा लगाए गए शतक को याद किया है। उन्होंने ऐसा क्यों किया है, इसके बारे में हम आपको बताते हैं। दरअसल, सचिन ने हमेशा सेना देशों (ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका) के खिलाफ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। उन्होंने इन देशों के खिलाफ उनके घरेलू मैदान पर भी जमकर रन बनाए हैं। हालांकि, 2003 में जून के बाद सचिन को एक खराब दौर से गुजरना पड़ा था।
वह टेस्ट में बिना शतक के 13 पारियां खेल चुके थे। तब दिसंबर में टीम ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर पहुंची थी। इससे पहले वह लगातार ऑफ स्टंप से बाहर जाती गेंदों पर छेड़छाड़ करते हुए आउट हुए थे। इसके बाद सिडनी भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें सिडनी में आमने-सामने थीं। तब सचिन ने कुछ ऐसा किया, जो उन्होंने कभी नहीं किया था। उन्होंने अपना एक ट्रेडमार्क शॉट, कवर ड्राइव नहीं खेलने का फैसला किया।
इसका फायदा सचिन को मिला और वह 241 रन बनाकर नाबाद रहे। उन्होंने ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंदों को छुआ तक नहीं और पूरा सम्मान दिया। नतीजा यह हुआ कि उन्होंने अपने टेस्ट करियर का दूसरा सर्वोच्च स्कोर बना डाला। सचिन का यह शतक उनकी सर्वश्रेष्ठ टेस्ट पारियों में से एक है। यह शतक उन्होंने ठीक 17 साल पहले चार जनवरी को बनाया था। आईसीसी ने भी उस दिन को याद किया है।
आईसीसी ने ट्वीट में लिखा- 2004 में, सचिन तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में नाबाद 241 रनों की मैराथन पारी खेली थी। उन्होंने इस पारी में एक भी कवर ड्राइव नहीं खेला। सचिन के पास स्थिति को परखकर रन बनाने की गजब की क्षमता थी। यही वजह रही कि वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक कहलाए।