पूर्व भारतीय व कमेंटेटर खिलाड़ी लक्ष्मण शिवारामाकृष्णन की क्रिकेट कमेटी में नियुक्ति के बाद उठे विवाद को देखते हुए आईसीसी ने इस पर अपनी सफाई दी है।
शिवारामाकृष्णन लंबे समय से बीसीसीआई की ओर से क्रिकेटर कमेंटेटर रहे हैं जिन्हें हाल ही में टिम मे की जगह आईसीसी क्रिकेट कमेटी में खिलाड़ियों के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया है।
इस नियुक्ति की चारो तरफ हो रही आलोचनाओं के बाद आईसीसी ने एक बयान जारी कर कहा, ‘इस साल जनवरी में हुए मतदान के दौरान कुछ प्रतिनिधियों की वोटिंग के दौरान हुई कुछ आशंकाओं (जैसे कि वोट टाई होने की स्थिति में क्या हो, जिस किसी भी टीम में अलग-अलग प्रारूपों में अलग-अलग कप्तान हों और कौन से कप्तान वोट डालने के अधिकारी हैं) के बाद आईसीसी ने पूरे मामले को गंभीरता से जांचा और तय किया कि इस पर फिर से वोटिंग हो।’
टिम मे ने प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
चुनाव में परास्त टिम मे ने आईसीसी की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। इस पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ऑफ स्पिनर ने कहा, ‘मैं इस समय केवल इतना ही कह सकता हूं कि यह मेरे या शिवा के इस पद पर चुने जाने के बारे में नहीं है बल्कि सवाल यह है कि चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई या नहीं। क्या चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने वाले कप्तानों के क्रिकेट बोर्डों ने इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया या नहीं।’
फीका ने की जांच की मांग
फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल क्रिकेटर्स एसोसिएशन (फीका) ने आईसीसी पर आरोप लगाया था कि बीसीसीआई के दबाव में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करके शिवारामाकृष्णन का चयन किया गया है। फिका ने इस मामले की जांच की मांग भी की थी।
'आईसीसी गैर प्रभावशाली संस्था'
शिवारामाकृष्णन के चयन के बाद से उठे बवाल के बीच आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर संघ (एसीए) ने आईसीसी को दुनिया की सबसे गैर प्रभावशाली खेल संस्था करार दिया था।
एसीए के मुख्य कार्यकारी पॉल मार्श ने कहा, ‘क्रिकेट के लिए यह दुखद दिन है। दुख इस बात का है कि आईसीसी से उम्मीद की जाती है कि वह उच्च स्तर पर आचार संहिता बनाए रखे लेकिन मौजूदा समय में वह ऐसा नहीं कर रही है। खिलाड़ियों के लिहाज से हम बेहद निराश हैं और आईसीसी से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लेकिन, सच कहें तो हमें किसी कार्रवाई और न्याय की कोई उम्मीद नहीं है। आईसीसी दुनिया की सबसे गैर प्रभावशाली खेल संस्था है।’
उन्होंने आगे कहा, मुझे लगता है कि कोई भी क्रिकेट बोर्ड ऐसा नहीं है जो भारत के साथ खड़ा होने की ताकत रखता हो। ऐसे में यह खिलाड़ियों पर निर्भर करता है। इसलिए हमें खिलाड़ियों के लिए चिंता है।’