महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली
अब बड़ा सवाल यह है कि धोनी के बिना वाकई अधूरे हैं विराट? इस सवाल से हम हालांकि सहमत नहीं हैं, लेकिन कई दिग्गजों का ऐसा मानना है। मगर हां, इस सीरीज की अगर बात की जाए तो धोनी की गैरमौजूदगी में विराट की खराब कप्तानी दिखी। आखिरी के दो मैचों में धोनी को आराम दिए जाने के बाद मोहाली वन-डे में पंत की खराब विकेटकीपिंग की वजह से विराट कुछ हताश जरूर दिखे। वैसे आखिरी के दो मैचों में धोनी की गैरहाजिरी में विराट की घबराहट और बौखलाहट दोनों स्पष्ट तौर पर नजर आती रही।
धोनी की गैरमौजूदगी में विराट की कप्तानी को लेकर कुछ दिन पहले ही टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर अजय जडेजा ने कहा था, 'आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2019 के लिए महेंद्र सिंह धोनी को कप्तानी सौंप देनी चाहिए।' इसके अलावा अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर पूर्व महान भारतीय स्पिनर व कप्तान बिशन सिंह बेदी ने भी विराट कोहली की कप्तानी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। बेदी ने विराट को 'आधा कप्तान' करार दिया था। उन्होंने यह बात मोहाली वन-डे में मिली हार के बाद कही थी।
बहरहाल, इन सब से इतर सवाल तो यह भी है कि धोनी आखिर कब तक? निश्चित तौर पर धोनी अब युवा नहीं रहे। वह 37 साल के हो गए हैं, वह पहले जैसे फुर्तीले भी नहीं हैं। फिर भी उम्र के इस पड़ाव पर वह जिस तरह से फिट दिखते हैं, उनका कोई सानी नहीं है। विकेट के पीछे वो जिस तरह से कीपिंग करते हैं, उनका कोई तोड़ नहीं है। विराट को कमर कसनी होगी। धोनी की गैरमौजूदगी में भी विराट को अच्छी कप्तानी करके दिखानी होगी और उन्होंने किया भी है। धोनी के बिना भी विराट को सहज होना होगा और उनकी कमी की भरपाई भी करनी होगी। इसके लिए उन्हें जो भी करना पड़े।
2004 में अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाले एमएस धोनी पांच साल पहले यानी साल 2014 में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं। 15 साल के करियर में 340 वन-डे खेल चुके धोनी को लेकर ऐसा माना जा रहा है कि वह 2019 विश्व कप के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे। अगर ऐसा होता है तो विराट को एक अच्छे विकेटकीपर की भी तलाश करना होगी। हाल ही में पंत का विकेटों के पीछे लचरपन ने सवाल खड़ा कर दिया कि धोनी के अलावा कौन?
विश्व कप से पहले यह हार टीम इंडिया के लिए एक सबक है। तीन साल बाद भारत को अपनी सरजमीं पर हार का मुंह देखना पड़ा। भारत ने पिछले तीन वर्षों में 13 द्विपक्षीय सीरीज खेली हैं, उनमें से 12 में जीत हासिल की है। लगातार 6 द्विपक्षीय वन-डे सीरीज जीतने के बाद भारत को हार मिली है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया लगातार छह द्विपक्षीय वन-डे सीरीज हारने के बाद जीता है।
दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में निर्णायक वन-डे से पहले भारतीय टीम ने प्रैक्टिस करने की बजाय पार्टी की आनंद उठाया। जी हां, आखिरी व निर्णायक वन-डे से पहले टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने प्रैक्टिस करने की बजाय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के घर पार्टी का आनंद ले रहे थे। प्रैक्टिस नहीं करना भी टीम इंडिया की हार की बड़ी वजह बनी। वहीं, ऑस्ट्रेलियाई टीम ने नेट्स पर जमकर पसीना बहाया। उसने इस सीरीज को जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने 2009 के बाद से भारत में कोई वन-डे सीरीज जीती थी। ऐसे में विश्व कप से पहले स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर के बिना लगातार दो सीरीज (टी-20 और वन-डे) जीतना एक चमत्कार से कम नहीं है।