दुनिया में ऐसे विरले क्रिकेटर हैं जिन्हें सचिन तेंदुलकर के खिलाफ खेलने का मौका मिला और बाद में वे तेंदुलकर के कोच भी बने।
इन्हीं सौभाग्यशाली क्रिकेटरों में गैरी कस्टर्न बड़ा नाम है। कस्टर्न ने दक्षिण अफ्रीका के लिए तेंदुलकर और टीम इंडिया के खिलाफ मैदान पर उतरे। बाद में ही कस्टर्न टीम इंडिया के कोच बने।
यह कस्टर्न ही थे जिनकी कोचिंग में भारतीय टीम ने 28 साल बाद विश्व कप पर कब्जा जमाया और मास्टर ब्लास्टर की दो दशक पुरानी ख्वाहिश को पूरा किया था।
'इंग्लैंड के खिलाफ पारी सबसे महान'
अब सचिन तेंदुलकर ने ऐलान किया है अगले महीने दो टेस्ट खेलकर क्रिकेट से संन्यास लेंगे। उनके संन्यास लेने की घोषणा के बाद टीम इंडिया के पूर्व कोच कस्टर्न का कहना है कि उनके खेल से क्रिकेट महान बना।
कस्टर्न ने कहा, "यूं तो उन्होंने कई बेहतरीन पारी खेली है। लेकिन मेरी नजर में उन्होंने सबसे बेहतरीन बल्लेबाजी 2008 में चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ की थी। जिस समय वह मैदान पर थे उस समय बल्लेबाजी के परिस्थितियां अनुकूल नहीं थी और टीम दबाव में थी, तब 100 रन बनाए थे। टीम इंडिया यह मैच जीतने में सफल रही थी।"
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए साक्षात्कार ने कस्टर्न ने कहा, "इस बात का कोई मतलब नहीं है कि वह अपने अंतिम टेस्ट मैच में कितना रन बनाएंगे। सचिन तेंदुलकर के कारण यह खेल महान हो जाता है।"
उन्होंने कहा, "वह अभ्यास करना पसंद करते हैं। साथ ही वह हमेशा सुधार करने के लिए तत्पर रहते हैं। हर विपक्षी गेंदबाज के लिए उनकी रणनीति साफ रहती है। मैंने जितने लोगों के साथ काम किया है उनमें तकनीक को लेकर उनकी समझ सबसे तेज थी।
पोलाक और रोड्स भी रहे कोच
कस्टर्न के खिलाफ मैदान में उतरने और फिर बाद में उन्हें तथा उनकी टीम को कोचिंग का श्रेय अन्य क्रिकेटरों न्यूजीलैंड के जॉन राइट और दक्षिण अफ्रीका के ही शॉन पोलाक तथा जोंटी रोड्स को भी जाता है।
जॉन राइट टीम इंडिया के कोच रहे हैं। जबकि पोलाक और जोंटी रोड्स आईपीएल में मुंबई इंडियंस के क्रमशः मुख्य कोच और गेंदबाजी कोच हैं।