फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bishan Singh Bedi: पाकिस्तान-वेस्टइंडीज के अन्याय से लड़े, टीम को सागर में फेंकने की बात कही; बेदी के किस्से

Mon, 23 Oct 2023 10:56 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

15 साल की उम्र में नादर्न पंजाब की ओर से क्रिकेट में पदार्पण करने वाले बेदी ने सिर्फ क्रिकेटर के तौर पर ही नहीं बल्कि टेस्ट कप्तान, प्रशासक, चयनकर्ता, मैनेजर और कोच के रूप में भी छाप छोड़ी।
विज्ञापन
बिशन सिंह बेदी - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय स्पिन गेंदबाजी को निर्विवाद रूप से दुनिया में स्थापित करने वाले बिशन सिंह बेदी अब इस दुनिया में नहीं रहे। लंबी बीमारी के बाद सोमवार को उनका 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। अपनी अंगुलियों से गेंद को किसी जादूगर की मानिंद हवा में घुमाकर बल्लेबाज को क्रीज से बाहर निकालने की कला से उन्होंने दुनिया को अपना दीवाना बनाया था। दुनिया में विख्यात भारतीय स्पिन चौकड़ी (बेदी, प्रसन्ना, चंद्रशेखर और वेंकटराघवन) के वह प्रमुख स्तंभ थे। 67 टेस्ट में 266 विकेट लेने वाले बेदी को फ्लाइट के जादूगर के साथ हवा में विकेटों का खरीदार बोला जाता था। उनका कलात्मक गेंदबाजी एक्शन ऐसा था मानों कोई हिरन घसियाले मैदान पर लयबद्ध तरीके से चहलकदमी कर रहा हो। बेदी के नाम प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सर्वाधिक 1560 विकेट लेने का भारतीय रिकॉर्ड आज भी दर्ज है।
विज्ञापन


कप्तान, प्रशासक, मैनेजर के रूप में भी छाए
15 साल की उम्र में नादर्न पंजाब की ओर से क्रिकेट में पदार्पण करने वाले बेदी ने सिर्फ क्रिकेटर के तौर पर ही नहीं बल्कि टेस्ट कप्तान, प्रशासक, चयनकर्ता, मैनेजर और कोच के रूप में भी छाप छोड़ी। वह अपनी स्पष्टवादिता के लिए विख्यात थे। बेदी की गेंदबाजी का कद कितना बड़ा था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्हें इंग्लिश काउंटी नार्थहैंप्टनशायर ने 1972 से 1977 तक खिलाया। यह वह दौर था जब आज के आईपीएल की तरह इंग्लिश काउंटी में खेलना बहुत बड़ी बात समझी जाती थी। वह दिल्ली के भी 1974 से 1982 तक कप्तान रहे।

जब लायड के अन्याय पर घोषित कर दी टीम
बेदी को बेहद सख्त कप्तान माना जाता था। वह अन्याय को बिल्कुल सहन नहीं करते थे, इस वजह से उन्हें कई बार विवादों का सामना भी करना पड़ा। 1976 में उन्हें मंसूर अली खान पटौदी की जगह भारतीय टीम की कप्तानी मिली। उनकी कप्तानी में भारत ने रिकॉर्ड 406 रन का पीछा कर जीत हासिल की। अगले टेस्ट में वेस्टइंडीज के कप्तान क्लाइव लायड ने भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ खतरनाक तेज गेंदबाजी और बीमर को हथियार बना लिया। भारत के दो बल्लेबाज बुरी तरह चोटिल हो गए। बेदी ने पांच विकेट गिरने के बाद ही भारत की पारी घोषित कर दी। इसी तरह 1979 में साहीवाल वनडे के दौरान सरफराज नवाज ने चार बाउंसर फेंके। अंपायर ने इन्हें वाइड नहीं दिया। भारत के 8 विकेट शेष थे और उसे 14 गेंद में 23 रन चाहिए थे। कप्तान बेदी ने बल्लेबाजों को मैदान से वापस बुला लिया, जिससे भारत हारा घोषित किया गया।
विज्ञापन


जब हार पर प्रशांत महासागर में टीम फेंकने की बात कही
बिशन सिंह बेदी 1990 के न्यूजीलैंड दौरे पर भारतीय टीम के कोच थे। टीम ने दौरे पर निराशाजनक प्रदर्शन किया। इस पर बेदी ने यहां तक कह दिया कि पूरी टीम को प्रशांत महासागर में उठाकर फेंक देना चाहिए। इस पर काफी विवाद हुआ था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें