एनसीपी प्रमुख और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष शरद पवार ने आरोप लगाया है कि लोढ़ा समिति की रिपोर्ट ने क्रिकेट को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। गौरतलब है कि जस्टिस लोढ़ा पैनल ने बीसीसीआई में मामूली बदलावों की सिफारिश की थी, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने भी मंजूरी दे दी थी।
पवार से जब पैनल की सिफारिशों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'पैनल की रिपोर्ट ने निश्चित तौर पर क्रिकेट को बर्बाद किया।' मालूम हो कि पवार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। जस्टिस मुकुल मुद्गल कमिटी की रिपोर्ट में बीसीसीआई में सुधारों पर जोर दिया गया था। इसके मद्देनजर जनवरी 2015 में लोढ़ा कमिटी का गठन किया गया था।
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बता दें कि आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पूर्व चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी, जिसकी सिफारिश में क्रिकेट में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कई तरह के फैसले लिए गए थे। इस सिफारिश में राजनेताओं को क्रिकेट से दूर और 70 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों को बीसीसीआई की पोस्ट पर ना रहने रखने की भी बात की गई थी।
इन सिफारिशों को लागू करने को लेकर भी बीसीसीआई की ओर से आनाकानी की जा रही थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्ती से काम किया और आखिर में लोढ़ा समिति की सभी बातों को मान लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा पैनल की 'वन स्टेट,वन वोट' और 'वन मेंबर, वन पोस्ट' की मंजूरी को भी पास किया था। मालूम हो कि इससे पहले पवार ने कहा था कि यदि बीसीसीआई ने क्रिकेट में ज्यादा सुधार की तो क्रिकेट का रोमांच बिगड़ जाएगा। बीसीसीाई के पूर्व अध्यक्ष शरद पवार ने सुप्रीम कोर्ट से ये भी कहा था कि क्रिकेट सुधारने में 'अति उत्साह' खेल को नष्ट कर सकता है।