ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 4-0 की जीत दर्ज कर टीम इंडिया ने इतिहास रच दिया है। इस सीरीज में टीम इंडिया को पांच ऐसे खिलाड़ी मिले जो लंबे समय तक टेस्ट मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व करते दिख सकते हैं।
जीत के अगुवा रहे अश्विन
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली ऐतिहासिक जीत में ऑफ स्पिनर आर अश्विन ने मुख्य भूमिका निभाई। अश्विन ने सीरीज के सभी चार मैचों में कातिलाना गेंदबाजी करते हुए 29 विकेट झटके। चेन्नई 12, हैदराबाद 6, मोहाली 4 और दिल्ली में 7 खिलाड़ियों को पवेलियन भेजा।
इन चार मैचों में अश्विन ने चार पारियों में पांच या इससे ज्यादा विकेट झटके। इसी प्रदर्शन के चलते अश्विन को 'मैन ऑफ द सीरीज' चुना गया।
तुरुप के इक्का रहे जडेजा
रविंद्र जडेजा इस सीरीज की खोज कहे जा सकते हैं। जडेजा गेंद के साथ बल्ले से भी अहम मौकों पर टीम के काम आए। उन्होंने चार मैचों में 24 विकेट झटके। यही नहीं तीन पारियों में उन्होंने 5 विकेट लेने का कारनामा किया।
शुरुआती तीन मैचों में जडेजा ने ऑस्ट्रेलिया के सबसे अनुभवी बल्लेबाज माइकल क्लार्क को पांच बार आउट कर भारतीय खेमे का काम आसान कर दिया। सीरीज के आखिरी टेस्ट मैच में जब टीम इंडिया का टॉप ऑर्डर फ्लॉप हो गया तो जडेजा ने 43 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली।
मुरली विजय ने दिखाया दम
पिछले एक साल से ओपनिंग की समस्या से जूझ रही टीम इंडिया को इस सीरीज में मुरली विजय के रूप में एक अच्छा विकल्प मिल गया। विजय ने सात पारियों में 430 रन ठोके।
इसमें उन्होंने दो शतक और एक अर्द्घशतक जमाया। इन दोनों शतकीय पारी में मुरली ने 150 से ज्यादा का निजी स्कोर किया। खास बात यह रही कि लगातार दो टेस्ट मैचों में दो शतक जमाकर मुरली ने साबित कर दिया कि वे लगातार प्रदर्शन करने की कुवत रखते हैं।
दीवार बनकर उभरे पुजारा
चेतेश्वर पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस टेस्ट सीरीज में साबित कर दिया कि वे 'दीवार' कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ के सबसे अच्छे विकल्प हैं। पुजारा ने चार टेस्ट मैचों की सात पारियों में 419 रन बनाए। हैदराबाद टेस्ट में उन्होंने 204 रनों धमाकेदार पारी खेली।
गौर करने वाली बात यह रही कि दिल्ली की मुश्किल पिच पर जब धोनी ने पुजारा को ओपनिंग में आजमाया तो वे वहां भी हिट रहे। दिल्ली टेस्ट की दोनों पारियों में उन्होंने अर्द्घशतक जमाया। दूसरी पारी में तो पुजारा ने नाबाद 82 रन बनाकर टीम को जीत दिलाकर ही दम लिया।
धवन ने सबको बनाया दीवाना
विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग के पिछले एक साल से फ्लॉप होने के चलते टीम इंडिया को कई बार मुश्किल क्षणों से गुजरना पड़ा। शिखर धवन ने अपने पहले टेस्ट मैच में ही 187 रनों की रिकॉर्डतोड़ पारी खेलकर बता दिया कि वे लंबी रेस के घोड़े हैं।
महज 174 गेंदों की इस पारी में धवन ने आक्रमकता, आत्मविश्वास, शॉट सलेक्शन, निरंतरता आदि सभी गुणों का प्रदर्शन किया। चोटिल होने के चलते धवन को इस सीरीज में दूसरे मौके नहीं मिले।