तेज गेंदबाज गस एटकिंसन ने अपने टेस्ट पदार्पण पर चमक बिखेरी और पहले टेस्ट मैच के शुरुआती दिन वेस्टइंडीज की पहली पारी 121 रन पर ढेर कर दी। एटकिंसन ने 45 रन देकर सात विकेट झटके और वेस्टइंडीज की पारी को पूरी तरह लड़खड़ा दिया। स्टंप्स तक इंग्लैंड ने पहली पारी में तीन विकेट पर 189 रन बना लिए हैं और उसने अबतक 68 रनों की बढ़त हासिल कर ली है। दिन का खेल खत्म होने तक हैरी ब्रूक 25 रन और जो रूट 15 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं।
क्रावले-पोप ने लगाए अर्धशतक
वेस्टइंडीज की पारी ढेर करने के बाद इंग्लैंड की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही थी और सलामी बल्लेबाज बेन डकेट जेडन सील्स की गेंद पर विकेटकीपर जोशुआ डा सिल्वा को कैच थमाकर पवेलियन लौट गए थे। डकेट ने तीन रन बनाए। इसके बाद क्रावले और पोप ने मिलकर इंग्लैंड की पारी को संभाला और दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 94 रनों की साझेदारी की। इस पार्टनरशिप को जेसन होल्डर ने पोप को आउट कर तोड़ा जिन्होंने 74 गेंदों पर 11 चौकों की मदद से 57 रनों की पारी खेली। इसके कुछ देर बाद सील्स ने अपना दूसरा शिकार करते हुए क्रावले को बोल्ड किया जो 89 गेंदों पर 14 चौकों के सहारे 76 रन बनाकर आउट हुए।
पदार्पण पर इंग्लैंड के लिए तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
इससे पहले, इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया जिसे एटकिंसन की अगुआई में गेंदबाजों ने सही साबित करने में ज्यादा देर नहीं लगाई। इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने वेस्टइंडीज के बल्लेबाज ज्यादा देर नहीं टिक सके। वहीं, एटकिंसन ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए अपने पदार्पण को यादगार बनाया। एटकिंसन इंग्लैंड के लिए टेस्ट में डेब्यू पर तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी बने।
पदार्पण पर इंग्लैंड के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
| प्रदर्शन |
गेंदबाज |
बनाम |
वर्ष |
| 7/37 |
जॉन फेरिस |
दक्षिण अफ्रीका |
1892 |
| 7/43 |
डॉमिनिक कॉर्क |
वेस्टइंडीज |
1995 |
| 7/45 |
गस एटकिंसन |
वेस्टइंडीज |
2024 |
| 7/46 |
जॉन लीवेर |
भारत |
1976 |
| 7/49 |
एलेक बेडसेर |
भारत |
1946 |
एटकिंसन के अलावा जेम्स एंडरसन, क्रिस वोक्स और बेन स्टोक्स ने भी एक-एक विकेट चटकाया। वेस्टइंडीज की ओर से पदार्पण कर रहे सलामी बल्लेबाज मिखाइल लुई ने सर्वाधिक 27 रन बनाए। एलिक एथानाजे (23) और केवेम हॉज (24) भी अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में बदलने में नाकाम रहे। वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी इतनी खराब रही कि उसके पांच बल्लेबाज ही दहाई अंक को छू सके।