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एजुकेशन फॉर भारत महाकुंभ: सहवाग का बड़ा खुलासा, मिला था भारतीय टीम के कोच बनने का ऑफर, जानें क्या दिया था जवाब

Sat, 06 Dec 2025 12:58 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वीरेंद्र सहवाग भी एजुकेशन फॉर भारत महाकुंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें एक बार कोच बनने का ऑफर मिला था, लेकिन तब उन्होंने ठुकरा दिया था। सहवाग ने भारतीय महिला टीम के विश्व कप जीतने पर भी बातचीत की। आइए जानते हैं...
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वीरेंद्र सहवाग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत कॉन्क्लेव का शनिवार को सुबह 11 बजे शुभारंभ हुआ। इसमें राजनीति और शिक्षाविद से जुड़े कई नामी हस्तियां शामिल हुईं। कॉन्क्लेव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), नई शिक्षा नीति, स्किल्स और रोजगार समेत छात्रों के भविष्य से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हो रही है।
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इसी कड़ी में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर और धाकड़ बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने भी अपने विचार रखे और एक बड़ा खुलासा भी किया। सहवाग ने बताया कि भारतीय महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने उन्हें कोच बनने का ऑफर दिया था, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। सहवाग ने पूरी कहानी भी बताई। आइए जानते हैं पूरी कहानी...

हरमनप्रीत कौर से जुड़ी कहानी
सहवाग ने कहा- काफी समय पहले मैं हरमनप्रीत कौर से मिला था। मैंने उनसे कहा था हो सकता है तुम एक दिन टीम इंडिया की कप्तान बनोगी और फिर वह कप्तान बनीं। जब वह भारतीय टीम की कप्तान बनीं तो उन्होंने मुझे कॉल किया और कहा हमारे कोच बन जाइए। मैंने उन्हें जवाब दिया कि मैं इस पद के लिए अभी योग्य नहीं हूं। मैंने हमेशा उन्हें प्रेरित किया है और कहा एक दिन भारतीय महिला क्रिकेट की दिशा और परिणाम बदलेंगे। समय बदला और उन्होंने कर दिखाया।' भारतीय महिला टीम ने वनडे विश्व कप 2025 का खिताब जीता है।

'अगर हमें खेल से प्यार है तो...'
सहवाग ने कहा, 'अगर हमें खेल से प्यार है तो हम डिप्रेशन में कभी नहीं जा सकते। इसलिए हमें अपने काम से प्यार करना चाहिए। हमें उसमें पैसा नहीं देखना चाहिए। इसके लिए मैं विराट का उदाहरण देता हूं। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है खुश रहना। इसलिए मैं साल में सिर्फ 70 दिन काम करता हूं।' सहवाग ने सत्र के दौरान 'चला जाता हूं किसी के धुन में' गाना भी गुनगुनाया।

'बच्चों को नाकामी संभालना सिखाएं'
सहवाग ने बताया, 'बच्चों से सफलता के बजाय स्किल्स पर बात करना जरूरी है। हमें ध्यान रखना होगा कि हम बच्चों को नाकामी को कैसे संभाला जाए, ये सिखाएं। मेरी कोशिश होती है कि मैं बच्चों के साथ अपने क्रिकेट स्किल्स को भी निखार सकूं। बच्चों को पढ़ना भी जरूरी है। इसलिए उनके लिए पहले सीखना जरूरी है। हम अपनी स्कूल में कोशिश करते हैं कि बच्चों को एक स्किल जरूर सीखाएं, जो उसके भविष्य में काम आएं। हम अपने स्कूल में बच्चों को असफलता को कैसे ले यह जरूर सिखाते हैं, क्यों कि क्रिकेट में हर कोई नहीं जा सकता है। हमने उनको सिखाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। किताब और जीवन के अनुभव में फर्क होता है।'

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'मैं टीम इंडिया से ड्रॉप हुआ लेकिन...'
सहवाग ने कहा, 'मुझे खुद से काफी उम्मीदें हैं और मैं खुद की उम्मीदों पर ही काम करता हूं। अगर मैंने अपनी उम्मीदों से खुद को खुश कर दिया तो लोग अपने आप ही खुश हो जाएंगे। मैं क्रिकेट टीम से ड्रॉप हुआ था, लेकिन मैं निराश नहीं हुआ। यही सलाह मैं लोगों को भी देता हूं।'
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