भारतीय टीम में प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि हर बार जब आप एक अवसर प्राप्त करते हैं, तो आपको अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने की आवश्यकता होती है। टीम से दूर रहने के बावजूद क्रिकेट के प्रति मेरे जुनून में कभी कमी नहीं आई।
एक जून, 1985 को मेरा जन्म चेन्नई में हुआ था। मेरे पिता कुवैत में बतौर सिस्टम एनालिस्ट काम करते थे और मैं नौ साल की उम्र में भारत से कुवैत चला गया था। उस दौरान मेरी पढ़ाई उसी खाड़ी देश में हुई। मेरे पिता भी चेन्नई के प्रथम श्रेणी क्रिकेट खिलाड़ी रह चुके हैं। जब मेरा रुझान क्रिकेट की ओर बढ़ रहा था, तभी मेरे पिता ने मुझे खेल के बजाय पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देने की सलाह दी, क्योंकि मेरे पिता को आशंका थी कि कहीं उनके बेटे का क्रिकेट करियर भी उनकी तरह प्रथम श्रेणी तक ही न सीमित रह जाए। लेकिन यह भी सच्चाई है कि बचपन में उन्हीं के प्रशिक्षण ने मुझे अच्छा बल्लेबाज बनने में मदद की।