धरमवीर पाल, भारतीय टीम में इस नाम के किसी भी खिलाड़ी का नाम आपने नहीं सुना होगा। लेकिन अपने दोनों पैरों पर खड़े नहीं हो पाने के बावजूद इस शख्स को भारतीय टीम के 12वें खिलाड़ी का दर्जा मिला हुआ है। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हों या फिर टीम का दूसरा सदस्य दोनों पैरों से विकलांग धरमवीर की मदद करने से पीछे नहीं हटता है।
यही कारण है कि भारतीय टीम जहां भी खेलेगी वह बाउंड्री लाइन पर हाथों के बल चलते हुए बॉल ब्वाए के रूप में नजर आएंगे। भारतीय टीम से जुड़ने का गौरव उन्हें युवराज सिंह और श्रीसंत की बदौलत मिला है। लेकिन ये दोनों ही खिलाड़ी भारतीय टीम में नहीं हैं। धरमवीर इसको लेकर खासे दुखी हैं।
मध्य प्रदेश की विकलांग क्रिकेट टीम के कप्तान धरमवीर भारतीय विकलांग क्रिकेट टीम के भी सदस्य रह चुके हैं। क्यूरेटर दलजीत सिंह उन्हें पहली बार 2006 में फरीदाबाद में हुए भारतीय टीम के मैच में लेकर गए थे। यहीं युवराज की उन पर नजर पड़ी। तब से वह 55 टेस्ट 165 वन-डे में भारतीय टीम के साथ रह चुके हैं।
युवी पर वह जान छिड़कते हैं तभी उनकी बीमारी का पता लगने के बाद वह मुरैना से ट्राईसाइकिल पर वैष्णों मां से उनकी सलामती के लिए दुआ मांगने गए। इस टेस्ट में भी आए धरमवीर के मुताबिक 15 दिनों में उन्होंने यह यात्रा पूरी की।
वह बताते हैं कि टीम का हर खिलाड़ी उनकी आर्थिक मदद कर देता है। इससे वह टीम के साथ बने रहते हैं और होटल का खर्च उठाते हैं। सही मायनों में वह सभी से खुद पैसे मांग लेते हैं लेकिन सचिन तेंदुलकर से कभी उनकी कुछ मांगने की हिम्मत नहीं हुई। वह तो अपने ही आप ही उनकी मदद कर देते हैं।