बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने अपने दामाद गुरूनाथ मयप्पन के सट्टेबाजी में फंसने के बाद इस्तीफा देने से इंकार जरूर कर दिया है। लेकिन उनके इस्तीफे को लेकर बोर्ड की अंदरूनी राजनीति बुरी तरह गहरा गई है।
सूत्रों की मानें तो बोर्ड के कुछ सदस्य श्रीनिवासन को इस पद बने नहीं रहने देना चाहते हैं। लेकिन उनके लिए बोर्ड अध्यक्ष के खिलाफ विशेष आम सभा की बैठक में दो तिहाई बहुमत जुटाना तो दूर इस बैठक को बुलाने के लिए जरूरी 10 सदस्यों को एकत्र करना मुश्किल हो रहा है। बावजूद इसके यह कोशिशें तेजी से शुरू हो गई हैं।
बोर्ड से जुड़े सूत्रों के अनुसार श्रीनिवासन की रविवार को बोर्ड के कई अधिकारियों के साथ बैठक हुई। इनमें अरुण जेटली, जगमोहन डालमिया, राजीव शुक्ला, संजय जगदाले आदि शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि एकबारगी श्रीनिवासन को इस्तीफे के लिए मनाने पर भी बात चली। लेकिन उनके स्थान पर अंतरिम अध्यक्ष बनने के लिए एक पूर्व बोर्ड अध्यक्ष की ओर से कोशिशों की चर्चाओं के बाद श्रीनिवासन को ही अध्यक्ष पद पर बने रहने की सहमति बन गई।
बोर्ड के ये आला धुरंधर नहीं चाहते हैं कि पूर्व बोर्ड अध्यक्ष की फिर वापसी हो जिससे पुराना गुट एक बार फिर अपना कब्जा बना ले। सूत्र यह भी बताते हैं कि श्रीनिवासन के साथ छोटे राज्य एसोसिएशनों का बड़ा समर्थन है। उन्होंने इन राज्यों में क्रिकेट के विकास के लिए काफी कुछ किया है। कुछ बड़े धुरंधर इन्हें तोड़ने की कोशिश में हैं। लेकिन वे श्रीनिवासन का साथ छोड़ने को तैयार नहीं है। इन्हीं के दम पर श्रीनिवासन इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं।
शनिवार को जगमोहन डालमिया की ओर से दिए गए डिनर के बाद ही श्रीनिवासन इस्तीफा नहीं देने के अपने निर्णय पर पूरी तरह अडिग हो गए। बोर्ड नियमों के मुताबिक अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 10 सदस्यों का सचिव को विशेष आम सभा बैठक बुलाने का पत्र देना जरूरी है। फिर इस बैठक में अध्यक्ष समेत 31 सदस्यों में से दो तिहाई यानि 24 सदस्यों का इस प्रस्ताव पर समर्थन हो तब ही अध्यक्ष की कुर्सी जा सकती है। यह संभव होता नहीं दिखाई दे रहा है। बावजूद इसके कुछ बड़े धुरंधर इसकी पूरी कोशिशों में लगे हैं।