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डीडीसीए ने फिर 'हद पार' की , हाई कोर्ट की मिली लताड़

Tue, 08 Nov 2016 10:52 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : Google
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दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त जस्टिल मुकुल मुद्गल के निर्देश पर चुने गए तीन चयनकर्ताओं को पैनल से हटाने के फैसले के लिए दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि यह अवमानना का मामला है और डीडीसीए ने एक बार फिर ‘हद पार’ की है।
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जस्टिस एस रविंद्र भट और जस्टिस दीपा शर्मा ने कहा कि डीडीसीए ने ‘अपनी हद पार’ की है। हाई कोर्ट ने पहले ही इस मामले को खत्म कर दिया था और इस पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था।

डीडीसीए से यह पूछा कि क्या उन्होंने अपने फैसले के बारे में जस्टिस मुद्गल को बताया था। कोर्ट ने कहा, ‘‘हमें लगता है कि आप (डीडीसीए) धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। यह अदालत की अवमानना है।’’
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इनका मकसद सिर्फ क्रिकेट का नुकसान है

क्रिकेट - फोटो : getty
डीडीसीए की खेल समिति ने हाल में पूर्व भारतीय क्रिकेटरों मनिंदर सिंह, अतुल वासन और निखिल चोपड़ा को उनके संबंधित पैनल में से चयनकर्ताओं के रूप में हटा दिया था। जस्टिस मुद्गल ने इसके बाद अपने वकील नितिन मिश्रा के जरिए अदालत में जाते हुए डीडीसीए के इस फैसले को रद्द करने का निर्देश देने की मांग की थी।

डीडीसीए की ओर से वकील अमन लेखी ने कहा कि चयनकर्ताओं को हितों में टकराव का नोटिस जारी किया गया था। फिलहाल टीम का चयन कर रहे जूनियर और सीनियर चयन समिति का गठन मुद्गल के निरीक्षण में किया गया था। मुदगल पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं।

अदालत के समक्ष आवेदन करते हुए न्यायमूर्ति मुद्गल ने कहा कि कुछ अफसरों का लक्ष्य सिर्फ घरेलू सत्र को नुकसान पहुंचाना है। चयनकर्ता पहले ही विभिन्न टीमों का चयन कर चुके हैं जो घरेलू मैच खेल रही हैं।
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