जो खिलाड़ी दिल्ली के चयनकर्ताओं का चहेता नहीं बन सका, उस पर दांव देश के एक नहीं दो दिग्गजों ने लगाया। महेंद्र सिंह धोनी पहले शख्स नहीं हैं जिन्होंने पवन नेगी के अंदर छिपे क्रिकेटर को पहचान उन्हें भारतीय टीम की राह दिखाई।
यह वीरेंद्र सहवाग थे जिन्होंने नेगी को देखते ही पहली बार आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए खेलने को चुना। नेगी के ऑयडल भी कोई और नहीं सहवाग हैं।
कुछ दिन पूर्व जब नेगी को श्रीलंका के खिलाफ पहली बार देश की टीम के लिए चुना गया तब उन्हें हैरानी जरूर हुई थी, लेकिन जब उन्हें शुक्रवार को टी-20 वर्ल्ड कप केलिए चुना गया तो वह हैरान नहीं थे।
नेगी ने अमर उजाला से खुलासा किया उन्हें कुछ हद तक अहसास हो गया था कि उनका चयन टी-20 वर्ल्ड कप केलिए भी हो सकता है।
नेगी साफ करते हैं कि उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है। अगर उन्हें अंतिम एकादश में खेलने का मौका मिला तो वह अपनी उपयोगिता साबित करने में कसर नहीं छोड़ेंगे।
हालांकि दिल्ली रणजी टीम में जगह नहीं मिलने पर नेगी कहते हैं कि वह रणजी में तो कम खेले हैं, लेकिन दिल्ली की ओर से विजय हजारे और सैयद मुश्ताक अली ट्राफी में अच्छा प्रदर्शन किया है। नेगी अपने को टी-20 या वन डे विशेषज्ञ नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि वह तीनों संस्करणों के खिलाड़ी हैं।