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संन्यास का संयोग: धोनी और गांगुली, वक्त के पहिए में घूमते दो पूर्व भारतीय कप्तान

Sun, 16 Aug 2020 10:31 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जब धोनी कप्तान बने और भारतीय क्रिकेट में छाए, सौरव गांगुली हाशिए पर गए और विदा हुए। आज धोनी विदा हो रहे हैं और गांगुली भारतीय क्रिकेट के प्रशासन की कमान संभाल रहे हैं।
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महेंद्र सिंह धोनी और सौरव गांगुली - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी। ये सिर्फ दो नाम नहीं है बल्कि भारतीय क्रिकेट की पहचान है। 'दादा' ने जहां हाशिए पर चल रही टीम को संवारा। नए खिलाड़ी तलाशे, उन्हें लड़ना सिखाया तो महेंद्र सिंह धोनी ने उस प्लेइंग इलेवन में जान फूंककर कामयाबी की बुलंदी तक पहुंचाया, इसे संयोग कहा जाए या किस्मत का फेर। अलग-अलग समय पर टीम की कमान संभालने वाले दोनों ही चैंपियन ईस्ट जोन से आते थे। जब गांगुली का सूरज अस्त हुआ तो टीम इंडिया की गद्दी रांची का यह राजकुमार संभाल रहा था और जब आज जब वो विदा हुए तो गांगुली बीसीसीआई के बॉस हैं।

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गांगुली ने संवारा करियर!

- फोटो : ट्विटर
धोनी को 'धोनी' बनाने का श्रेय सौरव गांगुली को जाता है। माही की खोज दादा ने की। रणजी के रण से निखरकर रांची का यह लड़का टीम इंडिया तक तो पहुंचा, लेकिन अभी खुद को साबित करना शेष था। बांग्लादेश के खिलाफ 2004 में अपनी पहली सीरीज में बुरी तरह फ्लॉप रहे। शुरुआती चार मैच में बल्ले से सिर्फ 22 रन ही निकले। मगर कप्तान गांगुली ने विश्वास बनाए रखा। पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज के दूसरे मुकाबले में नंबर तीन पर बल्लेबाजी के लिए प्रमोट किया। फिर जो हुआ उससे दुनिया वाकिफ है। जिस कप्तान ने अपनी पोजिशन दांव पर लगा दी, बाद में उन्हीं सौरव गांगुली के साथ धोनी के विवाद की खबरें भी आईं, हालांकि सारी अफवाह ही साबित हुईं।

धोनी की कप्तानी में गांगुली का संन्यास

सौरव गांगुली ने कई बार खुले मंच पर कहा कि तत्कालीन कोच ग्रेग चैपल ने उन्हें भारतीय टीम से बाहर किया। अपनी आत्मकथा 'ए सेंचुरी इज नॉट इनफ' में उन्होंने इसका जिक्र भी किया है। चैपल के कार्यकाल में न सिर्फ उन्हें कप्तानी गंवानी पड़ी बल्कि टीम से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। चयनकर्ताओं का इशारा भी साफ था कि 100 से अधिक टेस्ट मैच खेल चुके सौरव को संन्यास ले लेना चाहिए। क्रिकेट इतिहास गवाह है कि दादा ने न सिर्फ वापसी की बल्कि अपनी अंतिम श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन भी किया। 2008 में मोहाली में शतक जमाया और नागपुर में करीबी अंतर से चूके। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जारी उस टेस्ट मैच में कप्तान धोनी के एक फैसले से दादा हैरान भी रह गए थे। मैच के आखिरी पलों में धोनी ने सौरव गांगुली से टीम इंडिया की कप्तानी करने को कहा था। धोनी चाहते थे कि गांगुली बतौर कप्तान ही विदा ले। धोनी के इस व्यवहार को मौजूदा बीसीसीआई अध्यक्ष आज भी याद करते हैं।

अब गांगुली की अध्यक्षता में धोनी जा रहे हैं

सौरव गांगुली-एमएस धोनी - फोटो : सोशल मीडिया
इधर धोनी अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को बुलंदियों तक पहुंचा रहे थे तो उधर संन्यास के बाद दादा बतौर कमेंटेटर, एक्सपर्ट और क्रिकेट प्रशासक खुद को नई चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे थे। इस बीच मैदान पर माही का चौंकाना भी जारी था। कभी अचानक कप्तानी छोड़ देते तो कभी टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का एलान कर देते। 2015 से 2019 तक बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष रहने के बाद सौरव गांगुली ने उसी साल बीसीसीआई का अध्यक्ष पद संभाला। 1992 में इंटरनेशनल क्रिकेट की शुरुआत करने वाले दादा ने जब 2008 में संन्यास लिया, तब तक महेंद्र सिंह धोनी भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा नाम बन चुके थे और जब धोनी ने अपने 16 साल लंबे (2004-2020) करियर पर विराम लगाया तो सौरव गांगुली बीसीसीआई के कर्ताधर्ता हैं।
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एक युग का अंत

सौरव गांगुली, एमएस धोनी और इरफान पठान - फोटो : सोशल मीडिया
धोनी के संन्यास को बोर्ड अध्यक्ष ने एक युग का अंत बताया। गांगुली ने लिखा,
'वह देश और विश्व क्रिकेट के धुरंधर हैं। खेल के छोटे प्रारूप में उनके नेतृत्व कौशल की तुलना करना नामुमकिन। वह नैसर्गिक प्रतिभा के धनी हैं। आपके करियर के शुरुआती दौर में एकदिवसीय क्रिकेट की बल्लेबाजी से हर कोई प्रभावित था। हर अच्छी चीज का अंत होता है और यह पूरी तरह से शानदार रहा है, उन्होंने आने वाले विकेटकीपर्स के लिए मानक तय किए हैं, उन्हें मैदान से विदा लेने पर कोई पछतावा नहीं होगा। एक उत्कृष्ट करियर। मैं उन्हें जीवन में शुभकामनाएं देता हूं।'

2007 टी-20 विश्व कप जीतकर युवाओं के भीतर जोश भरने के लिए। 28 साल बाद 2011 में एकदिवसीय विश्व कप दिलाकर सचिन तेंदुलकर का सपना पूरा करने के लिए। 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी कब्जाकर अंग्रेजों को उन्हीं के घर में मात देने के लिए। शुक्रिया माही। धन्यवाद असंख्य यादें देने के लिए।

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