जौहरी का कहना है कि सच्चाई सामने आ गई है। वह भगवान के शुक्रगुजार हैं। उन पर लगे आरोपों के चलते उन्होंने और उनके परिवार ने बेहद बुरा वक्त गुजारा है। जौहरी ने ऑफिस ज्वाइन करने की भी बात स्वीकारी।
आरोप साबित नहीं
जस्टिस शर्मा की ओर से रिपोर्ट विनोद राय को 21 नवंबर को साढ़े 11 बजे सौंप दी गई। इसे राय ने बोर्ड की लीगल कमेटी के समक्ष खोला और इसके अंश बुधवार को सार्वजनिक किए। जस्टिस सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शिकायतें जौहरी पर लगे आरोपों को साबित नहीं कर पाती हैं। जौहरी पर ऑफिस के बाहर और अंदर लगे यौन उत्पीडऩ के आरोप तथ्यहीन हैं।
आरोपों के जरिए जौहरी की प्रतिष्ठा पर धब्बा लगाने के साथ उन्हें बोर्ड ऑफिस से बाहर किए जाने की कोशिश है। यही कारण है कि ट्वीट, ईमेल, सोशल मीडिया और शिकायत के जरिए जौहरी पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की जरूरत नहीं है।
सिंह ने यहां तक कहा है कि इस तरह मनगढ़ंत आरोप महिलाओं के कद और उनके काम करने के अवसरों को धक्का पहुंचाने वाले हैं। कमेटी के समक्ष बोर्ड की एंटी करप्शन यूनिट के चीफ नीरज कुमार, बोर्ड ट्रेजरॉर अनिरुद्ध चौधरी, रणजी खिलाड़ी शिशिर हटंग्गड़ी के अलावा आईपीएल याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा पेश हुए। वर्मा ने कमेटी के फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 27 नवंबर को होने वाली सुनवाई में विनोद राय और जौहरी की कारगुजारी को रखेंगे।