बोर्ड के सूत्रों के अनुसार अगर कार्य समिति में बिताए समय को भी जोड़ा जाएगा तो 80 प्रतिशत से अधिक सदस्य अपनी मतदान की पात्रता गंवा देंगे। इसमें बंगाल क्रिकेट संघ के प्रमुख सौरव गांगुली और गुजरात क्रिकेट संघ के संयुक्त सचिव जय शाह जैसे अधिकारी भी शामिल होंगे।
बीसीसीआई के एक पूर्व सचिव और राज्य संघ के अनुभवी अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर पीटीआई को बताया, ‘‘छह साल के कार्यकाल नियम के अनुसार सौरव और शाह के 10 महीने बचे हैं। लेकिन कार्य समिति के कार्यकाल के कारण वह तुरंत प्रभाव से बाहर हो जाएंगे। क्या सीओए वास्तव में चुनाव कराने की इच्छा रखता है या इसमें विलंब करना चाहता है? हमनें प्रक्रिया तय कर ली है। हम अब क्या करेंगे?’’
पता चला है कि 10 से अधिक राज्य इकाइयों ने न्याय मित्र पीएस नरसिम्हा से संपर्क किया है और इस मुद्दे पर उनसे हस्तक्षेप करने और निर्देश देने को कहा है। कम से कम 25 राज्य इकाइयां पहले ही चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर चुकी हैं लेकिन इस नए निर्देश का पूरी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘कम से कम 10 राज्य इकाइयों ने न्यायमित्र से संपर्क किया है और तुरंत हल चाहती हैं क्योंकि हम चुनाव कराना चाहते हैं। लेकिन अगर कार्य समिति के कार्यकाल को शामिल किया गया तो हमें नयी मतदाता सूची तैयार करनी होगी।’’
सीओए का यह निर्देश उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त लोढा समिति की शुरुआती सिफारिशों में शामिल नहीं था। राज्य इकाइयों ने दावा किया कि उन्हें लग रहा था कि सिर्फ पदाधिकारियों (अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष) के कार्यकाल की गणना की जानी है।
न्यायमूर्ति लोढा से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति लोढा ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने हमें काम सौंपा और हमने अपना काम किया। इसका क्या अर्थ निकाला जाता है इस पर टिप्पणी करना मेरा काम नहीं है। ’’
उम्मीद है कि इस नए निर्देश को वापस नहीं लिए जाने पर कुछ राज्य संघ 22 अक्टूबर को होने वाले बीसीसीआई के प्रस्तावित चुनाव पर रोक लगाने का आदेश देने की मांग कर सकते हैं।