कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में लगातार जीत दर्ज कर टीम इंडिया रविवार को इंग्लैंड के खिलाफ खिताबी मुकाबले में उतरेगी।
आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारतीय टीम जीत दर्ज कर न सिर्फ इस खिताब को कब्जाना चाहेगी बल्कि इसके अंतिम संस्करण की विजेता होने का गौरव भी हासिल करना उसका मकसद होगा।
धोनी की कप्तानी में भारत ने 2007 में टी-20 विश्वकप, 2011 में वनडे विश्वकप जीता और साथ ही टीम टेस्ट और वनडे रैंकिंग में नंबर वन पर पहुंची है।
अब टीम इंडिया के पास चैंपियंस ट्राफी का आखिरी संस्करण जीतकर इस अंतिम किले को भी फतह करने का शानदार मौका है।
टीम इंडिया तीसरी बार चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची है। वर्ष 2002-03 में टीम इंडिया, श्रीलंका के साथ संयुक्त विजेता बनी थी जबकि 2000-01 में उसे फाइनल में न्यूजीलैंड के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ाथा।
भारत इस टूर्नामेंट में अब तक अपराजेय चल रहा है। उसने अभ्यास मैचों में श्रीलंका और आस्ट्रेलिया को हराया था। लीग मैचों में भारत ने द. अफ्रीका, वेस्टइंडीज और पाकिस्तान को पटखनी दी थी जबकि सेमीफाइनल में श्रीलंका को करारी शिकस्त थमाकर फाइनल का टिकट कटाया था।
दूसरी तरफ इंग्लैंड के लिए भी यह एक सुनहरा अवसर है। क्रिकेट के जन्मदाता इस देश ने वनडे फार्मेट में अभी तक कोई आईसीसी टूर्नामेंट नहीं जीता है।
हालांकि टी-20 में टीम 2009 में विश्व चैंपियन बनी थी लेकिन वनडे खिताब उससे हमेशा दूर ही रहे हैं। इंग्लिश टीम चैंपियंस ट्रॉफी के इतिहास में भारत को कभी नहीं हरा पाई है और इस बार उसकी कोशिश इतिहास बदलने की होगी।