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अनिल कुंबले: इंजीनियर से क्रिकेटर फिर कोच बने भारत के सबसे सफल गेंदबाज की कहानी

Thu, 17 Oct 2019 05:39 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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अनिल कुंबले - फोटो : ट्विटर
भारतीय क्रिकेट में जिस वक्त बल्लेबाजों का बोलबाला था, उस दौर में पेशे से इंजीनियर एक गेंदबाज की टीम में एंट्री होती है। गुजरते समय के साथ इस स्पिनर की चमक कुछ ऐसी बिखरी कि आज भी उनके रिकॉर्ड तोड़ने का सपना देश का हर नवोदित खिलाड़ी देखता है। छह फीट 1 इंच लंबे, सौम्य से दिखने वाले अनिल कुंबले भारतीय क्रिकेट इतिहास में सर्वाधिक विकेट चटकाने वाले गेंदबाज हैं।
 
अनिल कुंबले, टेस्ट क्रिकेट में मुथैया मुरलीधरन (800) और शेन वॉर्न (708) के बाद तीसरे सबसे सफल गेंदबाज, जिनके नाम 619 विकेट हैं। 17 अक्टूबर 1970 में बेंगलुरु में कृष्णा स्वामी और सरोजा के घर जन्मे इस लेग स्पिनर का आज 49 जन्मदिन है।

अनिल को विश्व क्रिकेट में 'जम्बो' के नाम से भी पहचाना जाता है। दरअसल, एक लेग स्पिनर की तरह दाहिना हाथ घुमाने वाले कुंबले की गेंदें लेगब्रेक न होकर यदा-कदा ऑफब्रेक होती थी। यह बात जानते सभी थे फिर भी बल्लेबाज उनके शिकार हो जाते, उनकी सफलता का राज स्पिन में नहीं बल्कि 'जम्बो जेट' जैसी रफ्तार में निहित था।
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जवागल श्रीनाथ और अनिल कुंबले
दुनिया के सबसे पढ़े-लिखे क्रिकेटर्स में गिने जाने वाले अनिल कुंबले ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। बेहद कम ही लोग जानते हैं कि अनिल कुंबले शुरुआत में तेज गेंदबाजी किया करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने स्पिन को अपना हथियार बना लिया। आईपीएल 2020 के लिए किंग्स इलेवन पंजाब के हेड कोच और ऑपरेशन क्रिकेट नियुक्त किए गए, कुंबले ने वैसे तो अपने करियर में कई यादगार स्पैल डाले, जिसने उन्हें महान गेंदबाज के तौर पर स्थापित किया, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ परफेक्ट 10 का रिकॉर्ड खास है।
 
पाकिस्तान और भारत के बीच दिल्ली में खेले गए टेस्ट मैच में कुंबले ने पारी के सभी 10 विकेट लेकर इतिहास रच दिया था। कोटला टेस्ट में टीम इंडिया ने पाकिस्तान को 420 रन का लक्ष्य दिया था। लक्ष्य हासिल करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत अच्छी रही और ओपनर सईद अनवर और शाहिद अफरीदी ने शतकीय साझेदारी भी कर ली थी। मगर इसके बाद कुंबले की फिरकी के फेर में पड़ते हुए पाकिस्तानी टीम 207 रन पर ढेर हो गई थी और टीम इंडिया को 212 रन से जीत मिली थी। कुंबले ने इस पारी में पूरे 10 विकेट चटकाए थे।
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वीरेंद्र सहवाग-अनिल कुंबले - फोटो : social Media
भारतीय टेस्ट टीम 2007 के दौर में मुश्किलों से घिरी थी। राहुल द्रविड़ ने कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था और सौरव गांगुली की पद पर वापसी नामुमकिन थी। सचिन ने कप्तानी से हाथ खड़े कर लिए थे। वन-डे की कमान नए-नए धोनी को सौंपी गई थी। सहवाग टीम मैनेजमेंट की पसंद नहीं थे। ऐसे दौर में कुंबले ने न सिर्फ टीम को संभाला बल्कि कामयाबी की नई परिभाषा भी बनाई। बतौर कप्तान कुंबले ने अपनी पहली सीरीज में पाकिस्तान को न सिर्फ नाकों चने चबवाए बल्कि दिल्ली के फिरोजशाह में पाकिस्तान पर 6 विकेट की जीत हासिल करते हुए 'प्लेयर ऑफ द मैच' भी हथियाया।
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विराट कोहली के साथ अनिल कुंबले - फोटो : पीटीआई
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद जब अनिल कुंबले भारतीय टीम के कोच बने तो कप्तान विराट कोहली के साथ उनके संबंध एक समय के बाद बिगड़ने लगे। कड़े नियम और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर के फैसले शायद विराट को पसंद नहीं आए। सीईओ को मैसेज भेजकर चीकू ने शिकायत की। 

अनिल कुंबले का कोच के तौर पर रिकॉर्ड भी शानदार था। टीम इंडिया ने उनकी कोचिंग में खेले 17 टेस्ट मैचों में 12 जीते और केवल एक मैच गंवाया था। टीम ने कोई सीरीज नहीं हारी। वन-डे मुकाबलों में भी टीम का प्रदर्शन शानदार रहा।

कुंबले के कार्यकाल में भारत ने 13 वन-डे मैच में आठ जीते, जबकि पांच मैच गंवाए। वहीं पांच टी-20 मैचों में भारत ने दो मैच जीते, दो मैच हारे और एक का कोई नतीजा नहीं निकला, लेकिन बदली हुए हालातों में अपने इसी कद के चलते कुंबले बीसीसीआई के पुराने अधिकारियों की नजरों में भी खटकने लगे थे। आखिरकार 20 जून 2017 उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
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