क्रिकेट में फैसलों में कोई चूक न हो इसलिए आईसीसी ने डीआरएस का इस्तेमाल शुरू किया, लेकिन पिछले कुछ समय से डीआरएस ने कई गलत फैसले दिए हैं, जिससे उसमें और सुधार करने की मांग उठने लगी है।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड शुरू से ही डिसिजन रिव्यू सिस्टम (डीआरएस) का विरोध करता रहा है। लेकिन एशेज सीरीज में एक के बाद एक डीआरएस के गलत फैसलों के बाद इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया भी इसमें सुधार की मांग करने लगे हैं।
दोनों देशों के कप्तानों के अलावा इंग्लैंड के कोच एंडी फ्लावर ने भी डीआरएस में सुधार की मांग की है।
हाल ही में ऐसी खबर आई थी कि आईसीसी सुधारे गए डीआरएस को स्वीकार के लिए बीसीसीआई को मनाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि इस खबर को बीसीसीआई के अंतरिम अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने पूरी तरह से बकवास करार दिया। इंडियन एक्सप्रेस को दिए साक्षात्कार में डालमिया ने कहा, 'हम डीआरएस को तभी स्वीकार करेंगे जब यह तकनीक फुलप्रूफ हो जाएगी।'
उन्होंने आईसीसी की तकनीक व्यवस्था का मजाक उड़ाते हुए कहा, 'पहले सिस्टम को सौ फीसदी सही होने दीजिए। वे जब 15 साल में डकवर्थ-लुइस की समस्याओं का समाधान तो कर नहीं सके तो क्या गारंटी है कि डीआरएस में आगे कोई गलती नहीं होगी।'
डकवर्थ-लुइस नियम के बारे में डालमिया ने कहा, 'यह तकनीक आज भी खिलाड़ियों और प्रशासकों के अलावा साथ-साथ प्रशंसकों के लिए भी समझ से परे है। मैं खुद इस तकनीक को समझने की कोशिश कर रहा हूं कि कैसे किसी टीम के बनाए टोटल से विपक्षी टीम का टारगेट बढ़ जाता है। पूरी प्रक्रिया ही उलझाऊ और असमंजस में डालने वाली है।'
उन्होंने कहा कि डकवर्थ-लुइस के बाद डीआरएस भी बहुत कन्फ्यूजन पैदा करने वाला है।
भारत ने 2008 में पहली बार श्रीलंका दौरे में डीआरएस का प्रयोग किया था लेकिन टीम इंडिया के खिलाड़ियों के लिए वह अनुभव बेहद खराब रहा। इसके बाद से भारतीय खिलाड़ी डीआरएस के प्रयोग का लगातार विरोध करते रहे हैं। बाद में भारतीय बोर्ड भी अपने खिलाड़ियों के साथ आ गया।
बीसीसीआई के स्व-निर्वासित अध्यक्ष एन श्रीनिवासन भी डीआरएस के मुखर आलोचक हैं। श्रीनिवासन के ही कड़े विरोध के कारण आईसीसी द्वीपक्षीय सीरीज में डीआरएस को अनिवार्य रूप से लागू करवाने में नाकाम रहा। हालांकि आईसीसी के टूर्नामेंट्स में डीआरएस का प्रयोग किया जाता है।