वनडे क्रिकेट में एक बार फिर बीसीसीआई ने अंपायर फैसला समीक्षा प्रणाली (यूडीआरएस) के खिलाफ फिर मोर्चा खोलते हुए धमकी दी है कि कोई भी मेजबान देश अगर इसे लागू करने पर जोर देता है तो टीम इंडिया वह दौरा रद्द कर देगी।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) कार्यकारी बोर्ड की बैठक में इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के प्रतिनिधि जाइल्स क्लार्क ने यूडीआरएस की मौजूदा नीति में बदलाव का मुद्दा उठाया लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। बाकी किसी भी बोर्ड ने इस पर अपना रख स्पष्ट नहीं किया।
अब तक की व्यवस्था के अनुरूप यूडीआरएस के लिए मेजबान और मेहमान टीमों के बोर्डों की सहमति जरूरी है लेकिन क्लार्क ने कहा इसमें बदलाव किया जाना चाहिए ताकि मेजबान बोर्ड की मंजूरी से ही यूडीआरएस को किया जा सके। भारत शुरू से ही यूडीआरएस का विरोध करता आया है।
भारत के कई प्रमुख खिलाड़ी भी इस तकनीक को लागू करने के पक्ष में हैं। बीसीसीआई का मानना है कि मौजूदा यूडीआरएस सटीक नहीं है और इसमें कई खामियां हैं। माना जा रहा है कि श्रीनिवासन ने बैठक में धमकी तक दे डाली कि अगर किसी सीरीज में मेजबान बोर्ड ने यूडीआरएस लागू करने की कोशिश की गई तो भारत दौरे से हट जाएगा।
हालांकि डीआरएस का मुद्दा बैठक के एजेंडे में नहीं था और न ही बैठक के बाद जारी प्रेस रिलीज में इसके बारे में इसका कोई जिक्र था। गत चार दिसंबर को आईसीसी के मुख्य कार्यकारियों की समिति (सीईसी) की बैठक में यूडीआरएस को सभी सीरीज में लागू करने के बारे में व्यापक चर्चा हुई थी।
उस बैठक में भारत को छोड़कर सभी देशों के प्रतिनिधियों ने डीआरएस लागू करने की मौजूदा नीति में बदलाव का समर्थन किया था। सीईसी ने साथ ही यह सिफारिश भी की थी कि कार्यकारी बोर्ड की बैठक में इस पर वोटिंग की जानी चाहिए। लेकिन कार्यकारी बोर्ड की बैठक में दस पूर्णकालिक सदस्यों और तीन एसोसिएट सदस्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
यह पहला मौका नहीं है जब बीसीसीआई ने यूडीआरएस का विरोध किया है। आईसीसी की कुआलालंपुर में हुई पिछली वार्षिक बैठक में सीईसी ने सभी मैचों में यूडीआरएस को अनिवार्य करने की सिफारिश की थी। लेकिन कार्यकारी बोर्ड ने इस मुद्दे पर मतदान कराने से परहेज किया था।