इनमें कुछ ऐसे घरेलू क्रिकेटर भी हैं जिन्होंने सिर्फ रणजी ट्रॉफी के दौरान मैच खेले। इन क्रिकेटरों को बीसीसीआई की तरफ से उन्हें इस एवज में मुआवजा देने की बात कही गई थी। वो मुआवजा भी उन क्रिकेटरों को नहीं मिला। भारत में इस साल घरेलू सत्र की शुरूआत जनवरी में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के जरिए हुए और जिसके बाद विजय हजारे ट्रॉफी और महिलाओं का एकदिवसीय टूर्नामेंट भी खेला गया।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अंपायरों और टूर्नामेंट अधिकारियों को बिल जमा करने को कहा था। ये बिल तीन दिन से ज्यादा के नहीं थे। एक अंपायर ने नाम न लेने की शर्त पर कहा, अक्सर हमें टूर्नामेंट समाप्त होने के 15 दिन के अंदर भुगतान कर दिया जाता था। लेकिन मुश्ताक अली ट्रॉफी के समाप्त हुए 2 महीने गुजर चुके हैं। लेकिन बीसीसीआई की तरफ से हमें पैसा नहीं मिला। ऐसा माना जा रहा है कि मैच अधिकारियों को पैसे न मिलने की मुख्य वजह बीसीसीआई के पास क्रिकेट संचालन जनरल मैनेजर का न होना है। बीते साल सबा करीम ने बीसीसीआई क्रिकेट ऑपरेशंस पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद से इस पद पर अभी तक किसी की तैनाती नहीं हुई है। पैसे न मिलने का असर उन अधिकारियों पर ज्यादा हो रहा है जिनकी कमाई मैचों पर आधारित है। खास बात ये है कि इन मैच अधिकारियों में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें बीते साल मार्च से बीसीसीआई ने भुगतान नहीं किया है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की वार्षिक आम बैठक बीते साल दिसंबर में हुई थी। इस मीटिंग में ये निर्णय लिया गया था कि अधिकारियों का एक वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा जो खिलाड़ियों ,मैच अधिकारियों और क्रिकेट से जुड़ी दूसरी चीजों पर निर्णय लेगा। वहीं सालाना आम बैठक खत्म हुए तीन महीने से ज्याादा बीत चुके हैं लेकिन इस मामले पर सब चुप्पी साधे हैं। बीते साल आईपीएल 2020 में बीसीसीआई को 4000 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इसके बावजूद घरेलू मैच अधिकारियों के पैसों का भुगतान नहीं किया। यहां तक भारतीय क्रिकेट बोर्ड की शीर्ष परिषद इंडियन क्रिकेटर्स एसोसिएशन भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे है।