दरअसल, जिम्बाब्वे को जीत के लिए आखिरी ओवर में 16 रन बनाने थे। उसने पांच गेंद पर 11 रन बना लिए थे। आखिरी गेंद पर पांच रनों की दरकार थी। मोसादेक हुसैन गेंदबाजी कर रहे थे। उनके सामने निचले क्रम के बल्लेबाज ब्लेसिंग मुजरबानी थे। मोसादेक की गेंद मुजरबानी नहीं खेल पाए। वह क्रीज छोड़कर आगे बढ़ चुके थे। विकेटकीपर नुरुल हसन ने उन्हें स्टंप कर दिया। दोनों टीमों को लगा कि मैच समाप्त हो चुका है और सभी खिलाड़ी डग आउट में चले गए। बांग्लादेश चार रनों से मैच जीत चुका था, लेकिन असली ड्रामा अभी बाकी था।
बांग्लादेश के विकेटकीपर ने की गलती
दोनों टीमों के डगआउट में पहुंचने तक आखिरी गेंद को बार-बार चेक किया जा रहा था। थर्ड अंपायर यह देख रहे थे कि मुजरबानी आउट हैं या नहीं। इतने में यह दिख गया कि विकेटकीपर नुरुल हसन ने स्टंप के आगे से गेंद को पकड़कर मुजरबानी को आउट किया है। थर्ड अंपायर ने बड़ी स्क्रीन पर अपना फैसला दिखाया। मुजरबानी को नॉटआउट बताया। इतना ही नहीं नुरुल की गलती के कारण गेंद को नो बॉल करार दिया। जिम्बाब्वे के खाते में एक रन जुड़ गए और उसे एक गेंद भी मिल गया। नो-बॉल होने के कारण जिम्बाब्वे को फ्री-हिट भी मिली।
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मुजरबानी नहीं दिला सके जीत
अंपायर का फैसला आने के बाद दोनों टीमों को फिर से मैदान में आना पड़ा। शाकिब ने एक बार फिर से फील्ड सजाई। अब जिम्बाब्वे को जीत के लिए आखिरी गेंद पर चार रन बनाने थे। मुजरबानी अगर तीन रन भी ले लेते तो मुकाबला सुपर ओवर में पहुंच जाता। मोसादेक के ऊपर बांग्लादेश को जीत दिलाने की जिम्मेवारी थी। उनकी सीधी गेंद को मुजरबानी नहीं खेल सके और बांग्लादेश तीन रन से मैच को जीत गया। इस तरह जिम्बाब्वे ने लगातार दूसरे मैच में जीत का गोल्डन चांस गंवा दिया।
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